संगाकारा, जयवर्धने और दिलशान जैसे दिग्गजों के संन्यास के बाद बदलाव के दौर से गुजर रही श्रीलंकाई टीम कुछ नए-पुराने नामों के साथ चैंपियंस ट्रॉफी में उतरेगी। आईसीसी वनडे रैंकिंग में नंबर-7 तक लुढक चुकी इस टीम के पास बड़े नाम भले ही न हों, मगर मौका मिलने पर उलटफेर करने वाले चपल-चतुर खिलाड़ी अवश्य हैं। हालांकि, श्रीलंका को प्रबल दावेदार कोई नहीं मान रहा।
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चैंपियनों की जंग में 'अंडरडॉग' बनकर उतरेंगे श्रीलंकाई चीते
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दिनेश चांदीमल
- फोटो : getty
श्रीलंकाई चीते 23 बार चैंपियंस ट्रॉफी के मैच में मैदान में उतरहे हैं। इनमें से 13 मैचों में जीत उनके नसीब में लिखी थी, जबकि 9 मैचों में उसे हार का सामना करना पड़ा। 1 मैच बेनतीजा रहा, जो कि 2002 में चैंपियंस ट्रॉफी का फाइनल था। इस मैच के रद्द के कारण श्रीलंका और भारत को संयुक्त विजेता घोषित किया था।
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चैंपियनों की जंग में 'अंडरडॉग' बनकर उतरेंगे श्रीलंकाई चीते
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थिसारा परेरा
2002 में संयुक्त रूप से चैंपियन बनने वाली इस टीम को 3 बार ग्रुप स्टेज से ही बाहर होना पड़ा है। इस प्रतियोगिता में श्रीलंका के लिए मुरलीधरन 24 विकेट लेकर सबसे सफल गेंदबाज और बल्ले से 742 रन जड़ने वाले महेला जयवर्धने सबसे सफल बल्लेबाज रहे हैं। एंजेलो मैथ्यूज की सेना ट्रॉफी जितने का माद्दा भले ही न रखे, मगर दूसरों का स्वाद किरकिरा जरूर कर सकती है।
चैंपियनों की जंग में 'अंडरडॉग' बनकर उतरेंगे श्रीलंकाई चीते
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नुवान कुलासेकरा
श्रीलंका इस बार ग्रुप-बी में शामिल है। 'ग्रुप ऑफ डेथ' में शामिल श्रीलंकाई टीम को 3 जून को दक्षिण अफ्रीका, 8 जून को टीम इंडिया और 12 जून को पाकिस्तान से भिड़ना है। श्रीलंका को अपने कप्तान एंजेलो मैथ्यूज के अलावा बल्लेबाज दिनेश चांदीमल, ऑलराउंडर थिसारा परेरा और तेज गेंदबाज नुवान कुलासेकरा से खासी उम्मीदें होंगी।