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शर्मिला टैगोर को रिझाने के लिए छक्के उड़ाते थे टाइगर पटौदी, दर्दनाक हादसे में खोई थी एक आंख

Tue, 05 Jan 2021 01:42 PM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : फिल्मफेयर
अगर आज 'टाइगर' जिंदा होते तो 80 साल के होते। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान मंसूर अली खान पटौदी का जन्म 5 जनवरी 1941 को भोपाल के नवाब खानदान में हुआ था। सौरव गांगुली और विराट कोहली की गिनती आक्रामक कप्तानों में होती है, लेकिन टीम इंडिया में आक्रामकता के साथ शुरुआत करने का श्रेय मंसूर अली खान पटौदी को जाता है।
 
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महज 21 साल की उम्र में भारतीय टीम की कमान संभालने वाले टाइगर पटौदी की जिंदगी किसी फिल्म से कम नहीं। हादसे में एक आंख की रोशनी खो जाना, नवाबों वाली शान-शौकत के साथ जिंदगी जीना और अपने दौर की मशहूर अदाकार शर्मिला टैगोर से इश्क लड़ाने के लिए भी वे काफी चर्चित हुए। होते भी क्यों ना, उन दिनों शर्मिला टैगोर की गिनती सबसे खूबसूरत एक्ट्रेसेज में हुआ करती थी।
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मंसूर की उम्र जब 11 साल रही होगी, तब अब्बा की दिल्ली में मौत हो गई थी। उसके बाद मंसूर इंग्लैंड चले गए। वहां रहकर खूब मस्ती की। दोस्त बनाए, क्रिकेट खेला और हर शौक पूरा किया। एक जुलाई 1961 को इंग्लैंड में उनकी कार अचानक एक बड़ी गाड़ी से टकराई। हादसा इतना भयावह था कि कार का शीशा 21 वर्षीय मंसूर अली खान की दाईं आंख में जा घुसा। आनन-फानन में उन्हें अस्पताल ले जाया गया।

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ऑपरेशन के बाद पता लगा कि अब वे कभी भी एक आंख से नहीं देख पाएंगे। उनकी आंख की रेटिना ने काम करना बंद कर दिया था। एक आंख खराब होने के बाद टाइगर ने अपनी जिंदगी के 6 महीने बिस्तर पर गुजारे, लेकिन हार नहीं मानी। और फिर दिसंबर 1961 में इंग्लैंड क्रिकेट टीम के खिलाफ अपने टेस्ट करियर का आगाज किया। पहले ही मैच में 103 रनों की बेहतरीन पारी खेली।
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पटौदी ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा था कि इसी कार हादसे ने उन्हें मजबूत बनाया। और इसके पीछे सबसे बड़ी वजह थी उनकी लगन और बेजोड़ जुझारूपन। पटौदी ने अपनी बायोग्राफी में भी लिखा कि क्रिकेट खेलना तो दूर की बात थी। आंख गंवाने के बाद उन्हें गिलास में पानी डालने जैसी छोटी छोटी चीजों के लिए भी खासी मशक्कत करनी पड़ती थी।
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- फोटो : instagram
पटौदी के क्रिकेट करियर की कहानी जितनी रोचक है, उतना ही मजेदार है बॉलीवुड एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर के साथ उनकी मोहब्बत का किस्सा। दिल्ली में हुई पहली ही मुलाकात में पटौदी ने शर्मिला टैगोर को दिल दे दिया था, लेकिन मोहब्बत की राह यहां भी कठिन थी, क्योंकि टाइगर पटौदी नवाब खानदान से थे और शर्मिला बॉलीवुड एक्ट्रेस। दोनों के धर्म अलग थे, लेकिन इश्क बदस्तूर जारी था।
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शर्मिला टैगोर
रिश्ते के शुरुआती दिनों में टाइगर पटौदी ने शर्मिला टैगोर को गिफ्ट में रेफ्रिजरेटर दिया था। इसके अलावा एक किस्सा यह भी मशहूर है कि क्रिकेट के मैदान में मंसूर अली खान शर्मिला टैगोर का स्वागत छक्के से किया करते थे। कहा जाता है कि शर्मिला टैगोर जहां भी बैठती थी, मंसूर अली खान उसी दिशा में छक्का मारा करते थे। शर्मिला को मंसूर से शादी करने के लिए इस्लाम धर्म अपनाना पड़ा था।

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इतिहासकारों की मानें तो शर्मिला टैगोर को निकाह के लिए भोपाल की आखिरी नवाब और टाइगर पटौदी की मां साजिदा सुल्तान की शर्त माननी पड़ी। जिसके लिए शर्मिला ने बिना सोचे हां कर दी थी। इस्लाम धर्म अपनाकर शर्मिला टैगोर आयशा सुल्तान हो गईं और 27 दिसम्बर साल 1969 में दोनों का निकाह हो गया। शर्मिला से मंसूर को तीन बच्चे हुए- सैफ अली खान, सोहा अली खान और सबा अली खान। सबा अली देश की जानी-मानी ज्वैलरी डिजाइनर हैं।
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टाइगर ने अपने करियर में कुल 46 टेस्ट मैच खेले, जिनमें से 40 मैच उनकी कप्तानी में खेले गए। टाइगर ने अपने करियर में छह शतकों की मदद से कुल 2,793 रन बनाए। 22 सितंबर 2011 को उन्होंने दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। नवाब पटौदी को शायद एक आंख की रोशनी जाने का दर्द मालूम रहा होगा, इसलिए जाते जाते अपनी सही आंख भी किसी और के लिए छोड़ गए। पटौदी ने मौत से पहले ही अपनी दूसरी आंख डोनेट करने का फैसला कर लिया था।
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