धोनी और कोहली
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शिक्षा की ताकत: बायजू
2019 से 2023 तक बायजू (Byju’s) ने भारतीय टीम की जर्सी को अपनाया। ऑनलाइन एजुकेशन स्टार्टअप होने के बावजूद इस ब्रांड ने विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाई। हालांकि आर्थिक चुनौतियों और विवादों की वजह से इसका सफर लंबा नहीं चल सका। 2019 में बायजू ने टीम के पिछले जर्सी स्पॉन्सर ओप्पो से सभी जिम्मेदारियां ले लीं। बायजू ने जून 2022 में अनुमानित 35 मिलियन अमेरिकी डॉलर में बोर्ड के साथ अपने जर्सी प्रायोजन सौदे को नवंबर 2023 तक बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की थी। बायजू ने बीसीसीआई के साथ अपने अनुबंध को खत्म करने का अनुरोध किया। इस पर बोर्ड ने कंपनी को मार्च 2023 तक साथ बने रहने के लिए कहा था। दोनों के बीच सहमति हुई और बायजू मार्च तक टीम का जर्सी स्पॉन्सर था। इसके बाद बोर्ड ने इस अधिकार को ड्रीम 11 के हाथों में दे दिया था।
कंपनी की मौजूदा स्थिति: मार्च 2022 बायजू का वैल्युएशन 22 अरब डॉलर था जो कंपनी के हालिया विवादों के कारण घटकर आठ अरब डॉलर रह गया है। बायजू का कारोबार एक समय में 22 बिलियन यूएस डॉलर के मूल्यांकन पर था, लेकिन अब इसका मूल्यांकन केवल दो-तीन बिलियन यूएस डॉलर के बीच आ गया है। यानी लगभग 85–90 फीसद की भारी कमी हुई है। वित्तीय वर्ष 2022 में कंपनी ने 8,245 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दर्ज किया। भारी घाटों और नकदी संकट के चलते कंपनी ने सैकड़ों कर्मचारियों को रोजगार से हटाया। कई स्थानों पर कर्मचारियों का वेतन समय पर नहीं भेजा गया, और कुछ को वेतन जारी करने में भी मुश्किलें आईं। एक समय में देश की सबसे चमकदार एजु-टेक सफलता बायजू, आज कानूनी उलझनों, भारी घाटे, कंपनी के ढांचे में संकट और गवर्नेंस में कमजोरियों का सामना कर रही है।