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Team India: पूर्व स्पिनर का बड़ा खुलासा, बोले- कैच छोड़ने पर कपिल देव से डांट पड़ने के बाद रोने लगे थे कुंबले

Wed, 17 Aug 2022 05:22 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत के पूर्व कप्तान और महान स्पिनर बिशन सिंह बेदी ने एक कार्यक्रम के दौरान एक घटना का जिक्र किया और बताया कि कैसे करियर के शुरुआत में कुंबले को जूझना पड़ा था। उन्होंने बताया कि 1990 में ओल्ड ट्रैफर्ड में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट मैच के दौरान कुंबले को कपिल देव से भी डांट खानी पड़ी थी।
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अनिल कुंबले और कपिल देव - फोटो : सोशल मीडिया
अनिल कुंबले और कपिल देव को भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे बड़े मैच विनर्स में से एक माना जाता है। हालांकि, कुंबले के करियर के शुरुआती कुछ दिन अच्छे नहीं रहे थे। 1990 में जब कुंबले को भारतीय टीम में सिलेक्ट किया गया था, तो कई अधिकारी और पूर्व क्रिकेटर्स इस फैसले के खिलाफ थे। बाकी स्पिनर्स की तुलना में कुंबले कद में थोड़े लंबे थे और गेंद को कुछ खास टर्न नहीं करवा पाते थे। शुरुआत में उनका ध्यान पूरी तरह से एक्यूरेसी और वेरिएशन पर होता था। ऐसे में करियर में धीमी शुरुआत के बाद लोग कुंबले की टीम में जगह पर सवाल खड़े करने लगे थे। उन्हें तब कोई भविष्य के महान गेंदबाज के तौर पर नहीं देखता था।
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अनिल कुंबले - फोटो : सोशल मीडिया
भारत के पूर्व कप्तान और महान स्पिनर बिशन सिंह बेदी ने एक कार्यक्रम के दौरान एक घटना का जिक्र किया और बताया कि कैसे करियर के शुरुआत में कुंबले को जूझना पड़ा था। उन्होंने बताया कि 1990 में ओल्ड ट्रैफर्ड में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट मैच के दौरान कुंबले को कपिल देव से भी डांट खानी पड़ी थी। 
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कपिल देव - फोटो : सोशल मीडिया
बिशन बेदी ने बताया कि तब वे ओल्ड ट्रैफर्ड में क्रिकेट मैनेजर के पद पर थे। उन्होंने कहा- कुंबले का यह पहला टेस्ट मैच था। चायकाल से पहले कपिल ने कुंबले को डीप फाइन लेग में फील्डिंग के लिए लगाया था। इसके बाद कपिल ने एलन लैम्ब को बाउंसर फेंका और इस गेंद पर लैम्ब ने हुक किया। वह एक आसान कैच लग रहा था। कपिल तब टेस्ट मैच में सबसे ज्यादा विकेट से बस एक विकेट दूर थे। तभी कुंबले ने कैच ड्रॉप कर दिया।

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बिशन बेदी और कपिल देव - फोटो : सोशल मीडिया
बिशन बेदी ने बताया- कुंबले ने जैसे ही कैच ड्रॉप किया, कपिल ने मैदान पर ही उनको खूब फटकार लगाई। वह कुंबले का डेब्यू मैच था और कपिल मेरे ख्याल से तब तक 100 टेस्ट खेल चुके थे। जब मैं ड्रेसिंग रूम गया, तो कुंबले रो रहे थे। मुझे लगता है यहीं से कुंबले मजबूत हो गए। उन्हें भी कैच ड्रॉप करने पर बुरा लगा था। हालांकि, इससे उन्होंने काफी कुछ सीखा और आगे की कहानी आपको पता ही है कि वह भारत के महानतम गेंदबाज बने।
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टूटे जबड़े के साथ कपिल देव - फोटो : सोशल मीडिया
1992 तक कुंबले ने सिर्फ दो साल के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी पैठ जमा ली थी। इसके बाद वह मानसिक रूप से और मजबूत हुए। उन्होंने अपनी स्किल में सुधार किया। 10 साल बाद 2002 में जब कुंबले ने टूटे जबड़े के साथ गेंदबाजी की और ब्रायन लारा को आउट किया, तो किसी को याद नहीं आया कि यह वही खिलाड़ी था जिसके रवैये पर जल्दी सवाल उठाया गया था। कुंबले ने 2008 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया था। उन्होंने टेस्ट करियर में 619 विकेट लिए। वनडे में उनके नाम 337 विकेट हैं।
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