टीम इंडिया के जिम्बाब्वे के खिलाफ मुकाबले के दौरान भारतीय प्रशंसक मैच को लेकर खासे क्रेजी नहीं दिखते लेकिन कई बार ऐसे भी मौके आए जब इस अफ्रीकी टीम ने भारत की हालत खराब कर दी, हालांकि बेजोड़ पारियों ने भारतीय टीम को संकट से उबार दिया।
महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई में टीम इंडिया की उभरती खेप जिम्बाब्वे के दौरे पर है और इस बार भी युवा शक्तियां लाजवाब प्रदर्शन को बेताब होंगी। इनका खेल तो अभी 9 जून से शुरू होगा, लेकिन जानते हैं उन 5 बेजोड़ पारियों के बारे में जो भारत की ओर से जिम्बाब्वे के खिलाफ खेली गई।
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जिम्बाब्वे के खिलाफ खेली गई वो 5 महान पारियां, जो हमेशा रहती हैं याद
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- फोटो : Getty
जिम्बाब्वे के खिलाफ सबसे महान भारतीय पारियों में एक पार महान ऑलराउंडर कपिल देव के बल्ले से निकली थी जिसे उस समय क्रिकेट वर्ल्ड की सबसे बेस्ट पारी आंका गया था। 1983 में खेले गए वर्ल्ड कप के लीग चरण के एक मैच में जिम्बाब्वे के खिलाफ उसकी शुरुआत बेहद खराब रही और उसने 5 विकेट 17 रन पर ही गंवा दिए। सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए भारत को यह मैच हर हाल में जीतना था। संकट में दिख रही टीम इंडिया के लिए कप्तान कपिल बड़े खेवनहार बनकर आए और उन्होंने शुरुआत में संयम दिखाया, फिर बल्ले का मुंह खोल दिया।
इस पारी में उन्होंने 16 चौके और 6 छक्के की मदद से 138 गेंदों में 175 रनों की पारी खेली। उन्होंने नौंवे विकेट के लिए सैय्यद किरमानी के साथ 126 रनों की साझेदारी भी की जिसमें किरमानी ने 56 गेंदों में 24 रन ही बनाए और बाकी के रन कपिल के बल्ले से आए। बाद में भारत ने यह मैच 31 रन से जीत लिया और फिर टीम वर्ल्ड चैंपियन भी बनी।
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कपिल देव के बाद जिम्बाब्वे के खिलाफ भारत की ओर से दूसरी सबसे नायाब पारी स्पेशल बल्लेबाज वीवीएस लक्ष्मण के बल्ले से निकली। 2003-04 के भारत के ऑस्ट्रेलियाई दौरे के दौरान उन्होंने यह ऐतिहासिक पारी खेली थी। एडिलेड में हुए मैच में जिम्बाब्वे के खिलाफ भारत के 3 विकेट 4 रन पर गिर गए थे और टीम गहरे संकट में थी।
ऐसे में लक्ष्मण ने तेज गेंदबाज हीथ स्ट्रीक की अगुवाई वाली पेस बैटरी के खिलाफ मोर्चा संभाला। उन्होंने राहुल द्रविड़ और रोहन गावस्कर के साथ साझेदारी करते हुए शतकीय पारी खेली। द्रविड़ ने 56 और रोहन ने 54 रनों की पारी खेली जबकि खुद लक्ष्मण ने शानदार शतक लगाते हुए 131 रन बनाए।
भारत ने 50 ओवर में 280 रन बनाए जवाब में जिम्बाब्वे की ओर से 2 शतक (स्टुअर्ट चार्लीस्ले और सीयन इरविन) लगे लेकिन टीम 3 रन से लक्ष्य से दूर रह गई और टीम इंडिया को नायाब जीत मिल गई।
जिम्बाब्वे के खिलाफ खेली गई वो 5 महान पारियां, जो हमेशा रहती हैं याद
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युवराज सिंह
- फोटो : PTI
भारत की ओर से जिम्बाब्वे के खिलाफ खेली गई तीसरी सबसे यादगार वनडे पारी युवराज सिंह की है। 4 सितंबर, 2005 में हरारे में मेजबान टीम से मिले 251 रनों के लक्ष्य के जवाब में टीम इंडिया का शीर्ष क्रम लड़खड़ा गया और उसके 4 विकेट 36 रन पर ही लुढ़क गए थे। इसके बाद युवराज ने विकेटों के गिरने का सिलसिला रोका और भारत का पांचवां विकेट 91 रन पर जाकर गिरा।
युवराज ने फिर छठे विकेट के लिए बल्लेबाज महेंद्र सिंह धोनी के साथ 158 रनों की साझेदारी दिखती हार को जीत में तब्दील कर दिया। धोनी 63 गेंदों में 67 रन बनाकर नाबाद रहे, लेकिन मैच जीताऊ पारी खेलने वाले युवराज ने 124 गेंदों में 120 रनों शानदार पारी खेली। हालांकि टीम जब लक्ष्य से 2 रन दूर थी तो युवराज आउट हो गए, लेकिन वो अपना काम तो कर ही गए थे।
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जिम्बाब्वे के खिलाफ खेली गई वो 5 महान पारियां, जो हमेशा रहती हैं याद
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जिम्बाब्वे के खिलाफ टीम इंडिया की एक जानदार पारी पिछले साल के दौरान खेली गई। अजिंक्य रहाणे की अगुवाई में जिम्बाब्वे गई टीम इंडिया ने 14 जुलाई को सीरीज का अंतिम मैच खेला जो हरारे में ही हुआ। इस मैच में लचर शुरुआत के बाद छठे नंबर पर बल्लेबाजी करने आए केदार जाधव ने शानदार पारी खेली और शतक लगाया। वह 105 रन बनाकर अंत तक नाबाद रहे।
सीरीज में क्लीन स्वीप के इरादे से इस मैच में उतरी टीम इंडिया के महज 4 विकेट 82 रन पर गिर गए थे, लेकिन इसके बाद केदार ने मनीष पांडे (71) के साथ पांचवें विकेट के लिए 144 रनों की साझेदारी कर टीम की लाज बचाई जिससे वे जिम्बाब्वे को 277 रनों का लक्ष्य दे सकी। बाद में भारतीय गेंदबाजों ने मेजबान टीम को 42 ओवर के अंदर ही समेट कर क्लीन स्वीप करा दिया। मनीष का यह पहला वनडे मैच भी था।
जिम्बाब्वे के खिलाफ खेली गई वो 5 महान पारियां, जो हमेशा रहती हैं याद
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सुरेश रैना
सुरेश रैना ने भी जिम्बाब्वे के खिलाफ भारत की ओर से एक महान पारी खेली है जिसे शीर्ष 5 पारियों में रखा जा सकता है। पिछले साल ही ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में खेले गए वर्ल्ड कप के लीग चरण के मुकाबले में जिम्बाब्वे ने भारत के सामने जीत के लिए 288 रनों का लक्ष्य रखा था।
लेकिन ऑकलैंड में खेले गए मैच में भारत की शुरुआत खराब हो गई और 21 रन के स्कोर पर दोनों ओपनर्स (रोहित शर्मा और शिखर धवन) का विकेट खोने के बाद सौ से पहले ही भारत के 4 विकेट वापस पवेलियन लौट गए। दबाव में दिख रही टीम इंडिया के लिए बाएं हाथ के बल्लेबाज रैना ने संकटमोचक की भूमिका निभाई और कप्तान धोनी के साथ पांचवें विकेट के लिए अविजित 196 रनों की साझेदारी कर टीम को जीत दिला ही दी। 6 विकेट से मिली इस जीत में रैना ने 104 गेंदों में 110 रनों की नाबाद पारी खेली, जबकि धोनी ने 76 गेंदों में 85 रन बनाए थे।