भंग का रंग चढ़ा हो चकाचक-हे ब्रजवारे हे बजमारे हे/हे हुरिहारे हे दिनकड्डारे/ कि होरी आई रे कन्हाई रंग छलके/ बजा दे जरा बांसुरी...होरी आई रे आई रे होरी आई रे.../कि ‘भंग भवानी भय हरै भाग जाय भयभूत/ ललित लेखनी से लिखे लेख ललित अवधूत’/जो करै भांग की बुराई/ वाय खाय कालका माई/ बोल सियावर रामचंद्र की जै, पवनसुत हनुमान की जै, जो न बौले वाई में धै...।
अथ ट्रंप जी की होली ट्रंप जी गोली-ट्रंप जी वाह! ट्रंप जी वाह! ट्रंप जी वाह! ट्रंप जी वाह.../खेलें ट्रंप जी होली दुनिया में खेलें ट्रंप जी होली/ मिसाइल तोप चलावें ट्रंप सबको घुड़कावैं/ट्रंप जी करें ठिठोली ट्रंप जी मारें अंखियन से गोली/ जेलेंस्की जी समझे नहीं ट्रंप बॉस की बात!/ पहले तू तू मैं करी और फिर खाई लात.../ जेलेंस्की ने खाई लात भई यूक्रेन की पिटाई/ पुतिन गाएं सारारा और सारा यूक्रेन हमारा/ व्हाइट हाउस में ट्रंप जी जग का मुजरा ले!/ जे जितना टैरिफ लेत है उतना टैरिफ दे!! ट्रंप जी खेलें होली खेलें लठामार होली.../ट्रंप जी सारारा सारारा सारारा/ये है न्यू वर्ल्ड ऑर्डर...ये है न्यू वर्ल्ड ऑर्डर.../ ऐ दिल है मुश्किल जीना यहां/जरा हट के जरा बचके ये अमरीका मेरी जां/ खेले चीन से होली और खेले इंडिया कनाडा मेक्सिको से होली.../ ‘यूएसएड’ को मारी गोली, ‘एनजीओबाजी’ की हुई विदाई/ अमेरिका में दो ही ‘जेंडर’, बाकी पर शामत है आई/ एक ‘औरत’ दूसरा ‘मर्द’ भाई, नो मोर ‘थर्ड जेंडर’ अब भाई/‘एलजीबीटीक्यू’ सारे भए बंद... भजो राधे गोविंद.../ बदल दिया अमेरिका बदल दी दुनिया/ ट्रंप जी खेलें होली करें ठिठोली, कि ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’, मीडिया गाए ग्रेट अगेन।
मोदी जी शाह जी योगी जी की होली ठिठोली-उधर ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ तो इधर ‘मेक इंडिया ग्रेट अगेन’/ तुम ‘गुरु’ तो हमहूं गुरुओं के गुरु यानी विश्व के गुरू घंटाल बनावें इस इंडिया को मालामाल.../ तू महान तो मैं महान और मान न मान मैं तेरा मेहमान...।
कि आज बिरज में होरी से रसिया आज बरसाने में होरी रे रसिया/ पहले दिन लड्डुअन की होरी दूजे दिन फूलन की होरी तीसरे दिन लट्ठमार होरी फिर रंगों की होली फिर होती धुलेंडी की होरी/ ‘चंग बजे मिरदंग बजै और भंग चढ़े सब ग्वालन पे/ नंग नचें अधनंग नचें बहुरंग रंग चढ़े ब्रजवासन में!/ पानी की बौछार पड़ै और लट्ठ पड़ै हुरहारन पे/ नंग बनें और मनंग बनें ऐसी धूम मची वृंदावन में!’/ हुरिहारे सारारा कि बोलें सारारा कि बोलें राधे राधे राधे राधे कि सारे गोपी ग्वाल बाल बोलें/ ‘लाडली जू की जय बृंदावन बिहारी लाल की जय/ कि जो न बोले वामें ही धै...। मोदी जी वाह मोदी जी, शाह जी वाह शाह जी, योगी जी वाह योगी जी/ ऐसा ‘मंतर’ मारा कि जीत लिया इंडिया सारा/ कि मिल के खेलो होली...कि बंटोगे तो कटोगे तब कैसे खेलोगे होली?/ ‘एक रहोगे तो सेफ रहोगे, तभी तो खेल सकोगे ‘सेफ’ और नेक होली/ मोदी जी सारारा कूट दिया ‘आईएनडीआईए’ सारा।
महाकुंभ की होली-होली खेलत मोदी जी महाकुंभ में...होली खेलत शाह जी महाकुंभ में...होली खेलत योगी जी महाकुंभ में.../ सारे अखाड़े और सारे ही बाबा...सारे ही संत और सारे महंत जी वीवीआईपी रोज मारें डुबकी महाकुंभ में... अंबानी और अदानी भी खूब लगावैं डुबकी महाकुंभ में/ कैटरीना कैफ और प्रीति जिंटा भर-भर मारें डुबकी महाकुंभ में... अक्षय कुमार और विकी कौशल, संग में ममता कुलकर्णी लगावें डुबकी महाकुंभ में...
खींच-खींच फोटो महाकुंभ में/ सारे के सारे श्रद्धालु खीचें सेल्फी पे सेल्फी महाकुंभ में.../ ममता कुलकर्णी जी वाह/ कि एक दिन ‘महामंडलेश्वर’ अगले दिन छिना ‘कमंडल’, फिर अगले दिन मिला ‘कमंडल’... सभी के धुल गए पाप कुंभ में सभी कमावें पुण्य महाकुंभ में...।
विरोधी खेलें विरोध की होली...कोई देखे ‘कीचड़’ कोई देखें ‘लाशें’ महाकुंभ में.../ योगी जी कहें कि ‘जाकी रही भावना जैसी, महाकुंभ देखत तिन तैसी’... ‘सुअर’ देखें कीचड़ महाकुंभ में...‘गिद्ध’ देखें लाशें महाकुंभ में.../ अड़सठ करोड़ गोपी ग्वाल बाल खेलें होली महाकुंभ में और लाखों देसी-विदेशी खेलें होली महाकुंभ में... महाकुंभ आया ‘यूएन हेरिटेज’ की लिस्ट में... भीड़न के सारे रिकॉर्ड टूटे महाकुंभ में...भगवा की बहार बहै महाकुंभ में... ‘जलने वाले’ जलें महाकुंभ में.../ मोदी जी शाह जी योगी जी हिल मिल खेलें होली महाकुंभ में... बुलडोजर मारे भर-भर पिचकारी जिसे देख भागै गुंडों की टोली सारी.../ बुलडोजर जी खेलें होली महाकुंभ में.../ जब अड़सठ करोड़ मारें पिचकारी तो क्यों न चढ़े भगवा रंग गिरधारी और फाग में क्यों न नाचें हुरिहारी/ रंग बरसे खीझें विपक्ष वारे रंग बरसे...।
दिल्ली उर्फ देवदास का होली गीत- देवदास उस दिन उदास थे/ चुनाव परिणाम आसपास थे/ उन्हें बता यह दिया गया था वे दिल्ली हारेंगे/ धीरे-धीरे चले अकेले विपस्सना में करते योगा/मिटाते अपने रोगा...। और देवदास गाते फिल्मी गाने किः ‘दुख के अब दिन बीतत नाहीं.../ एक सपन था...अब वो दीखत नाहीं.../ दुख के दिन बीतत नाहीं...’/ कि ‘करमवा बैरी हो गए हमार, कि शीश महलवा बैरी हो गए हमार...’/ चांदी का बंगला सोने का जंगला केस पे केस कराला...’/ असल वक्त कछु काम न आया रोवें केजरीवाला/ उधर विपक्ष गाए कि ‘नजर लागी राजा तोरे बंगले पे...’/ दिल्ली की जनता ऐसी बेवफा.../ जिसने ऐसी ये धूम मचाई कि केजरीवाल के साथ कि उनपे झेली न जाई कैसी ये होली मचाई कि करम गति टारे टरै न रे भाई...।
बिहार की होली-फास्ट फॉरवर्ड- बिहार में का बा?/ बिहार में मोदी बा! बिहार में नीतीश बा! बिहार में तेजस्वी बा! लालू बा और उधर प्रशांत बा, बेहद अशांत बा.../ सभी मिल खेलें होली आपस में करें ठिठोली/ मोदी जी का अपर हैंड है, विपक्ष का बजा बैंड है/ बिहार में का बा? बिहार में बागेश्वर बा! बिहार में श्री श्री रविशंकर बा!/ विपक्षियों की समझ न आए कि बाबा क्योंकर आए कि इनसे कैसे खेलें होली ये तो लगादें सबकी बोली/ मोदी नीतीश की डबल पिचकारी कहीं पड़े न विपक्ष पर भारी...।
और अंत में राहुल भाई का होली गीत- कि संविधान बचाओ रे भइया कि उसपे संकट आयो रे/ अपनी अपनी पॉकेट में नया संविधान लाओ रे/ और दिखा दिखा के उसे हवा लगाओ रे उसे बचाओ रे.../ कि होरी खेलें राहुल भाई संसद में कि अपना होली गीत गाएं राहुल भाई संसद में/कि ‘जितनी जिसकी संख्या भारी उतनी उसकी हिस्सेदारी...’/ कि कर दो सब कुछ सबके नाम जी कि अपन चले वियतनाम जी...।