छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के आईएएस अफसर डा. जगदीश सोनकर एक बार फिर चर्चाओं में हैं। कुछ दिन पहले एक अस्पताल के निरीक्षण के दौरान मरीज के पलंग पर पैर रखकर बात करते ट्रेनी आईएएस की तस्वीरें सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद वह आलोचनाओं के घेरे में आ गए थे। उसके बाद से उन्हें लगातार निशाना बनाया जा रहा था लेकिन अब उनकी कुछ ऐसी तस्वीरें भी सामने आई हैं जिन्हें देखकर उनका दूसरा ही रूप नजर आता है।
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हालांकि इस सबसे इतर युवा आईएएस ने अब अपनी उस गलती के लिए माफी भी मांग ली है। अपने फेसबुक पेज पर उन्होंने अपना माफीनामा लिखा है। एमबीबीएस डॉक्टर से आईएएस बने डा. जगदीश सोनकर मूल रूप से मध्यप्रदेश के रहने वाले हैं उन्होंने इंदौर के एमजीएम कालेज से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की है।
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एमबीबीएस करने के बाद उनका चयन आईएएस में हो गया। छत्तीसगढ़ कैडर के आईएएस डा. जगदीश सोनकर फिलहाल जिस वजह से सुर्खियों में हैं उससे अलग उनका एक और चेहरा भी है, जिसे सामने लाए हैं उनके बॉस और बलरामपुर जिले के कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन। तमाम आलोचनाओं के बीच मेनन रामानुजगंज के एसडीएम डा. जगदीश सोनकर के पक्ष में आ खड़े हुए हैं उन्होंने सोनकर की कई खास तस्वीरें ट्वीटर पर शेयर की हैं। इनमें कई तस्वीरें तो ऐसी हैं जिसमें प्रशिक्षित डॉक्टर सोनकर मरीजों का इलाज करते नजर आ रहे हैं।
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लोकल मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार डा. सोनकर अपनी ड्यूटी में से टाइम निकालकर अक्सर मरीजों का फ्री इलाज करते हैं। वह कहीं दौरे पर जाते हैं तो लोगों का हाल चाल पूछना नहीं भूलते। अस्पताल के दौरे में तो वह खुद मरीजों से उनकी बीमारी के बारे में पूछने लगते हैं। ग्रामीण क्षेत्र के दौरे के दौरान तो वह अक्सर लोगों के बीच में बैठकर ही उनसे बातें करने लग जाते हैं। इसके कारण जल्द ही इलाके में उनकी अच्छी छवि भी बन गई है लेकिन पिछले दिनों सामने आई एक तस्वीर ने जल्द ही उन्हें निशाने पर ला दिया।
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हालांकि युवा आईएएस को अपनी इस गलती का जल्द ही एहसास हो गया जिसके बाद उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर बिना शर्त माफीनामा लिखते हुए कहा है कि उनकी वजह से अगर किसी को कष्ट पहुंचता है तो वह माफी चाहते हैं और आगे से ऐसा न हो इसका ध्यान रखेंगे।
सोनकर लिखते हैं कि उनसे जो गलती हुई उसे किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता। लेकिन मैंने जानबूझकर ऐसा नहीं किया न ही मेरी मंशा किसी को कष्ट पहुंचाने की थी। फिर भी एक सिविल सर्वेंट होने के नाते मेरे इस कृत्य को सही नहीं ठहराया जा सकता।