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CG Naxal Encounter: एके-47 से लेकर बीजीएल लॉन्चर तक, ढेर हुए नक्सलियों के पास से बरामद हुए ऐसे-ऐसे हथियार

Thu, 22 May 2025 10:54 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला नेटवर्क, छत्तीसगढ़

सार

अबूझमाड़ लगभग 5000 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला हुआ है, जो नारायणपुर, बीजापुर, कांकेर और दंतेवाड़ा जिलों में स्थित है, जो अत्यधिक कठिन और ऊबड़-खाबड़ इलाका है, जिसमें घने जंगल माओवादियों के सशस्त्र दस्तों एवं माओवादियों के शीर्ष नेतृत्व के लिए सुरक्षित ठिकाने व आश्रयस्थली प्रदान करते हैं।
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छत्तीसगढ़ नक्सल एनकाउंटर - फोटो : अमर उजाला
नारायणपुर, बीजापुर, दंतेवाड़ा के सीमावर्ती क्षेत्रों में हुई मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने सीपीआई (माओवादी) को एक बड़ा झटका देते हुए, इसके महासचिव और शीर्ष नेता नम्बाला केशव राव उर्फ बसव राजू उर्फ बीआर दादा उर्फ गंगन्ना को डीआरजी टीमों ने अबूझमाड़ के जंगलों में एक ऐतिहासिक मुठभेड़ में निष्क्रिय कर दिया। इस कार्रवाई के लिए नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और कोंडागांव के डीआरजी दलों को अबूझमाड़ के जंगलों में भेजा गया। अब तक, इस अभियान में सीपीआई (माओवादी) महासचिव नम्बाला केशव राव सहित कुल 27 नक्सलियों के शव और बड़ी संख्या में हथियार बरामद किए गए हैं। सुरक्षाबलों को तलाशी अभियान में तीन एके-47, चार-एसएलआर, छह इंसास, एक कार्बाइन, छह .303, एक बीजीएल लॉन्चर, दो सुरका (रॉकेट लॉन्चर), दो 12 बोर, एक देसी पिस्टल, दो भरमार और अन्य हथियारों और गोला-बारूद की बड़ी मात्रा बरामद हुई है।
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छत्तीसगढ़ नक्सल एनकाउंटर - फोटो : अमर उजाला
छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ क्षेत्र में सुरक्षाबलों द्वारा एक संयुक्त माओवादी विरोधी अभियान चलाया गया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है कि सुरक्षा विहीन क्षेत्रों में नए सुरक्षा शिविरों की स्थापना, माओवादी प्रभावित जिलों में राज्य विकास योजनाओं का प्रभावी कार्यान्वयन ताकि नागरिकों के लिए क्षेत्र का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सके और सशस्त्र दस्तों और माओवादियों के पूरे ईको सिस्टम के खिलाफ प्रभावी अभियान चलाना। इसके परिणामस्वरूप, सुरक्षा बलों ने माओवादियों के सशस्त्र दस्तों और उनके ईको सिस्टम तंत्र को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे उनके प्रभाव क्षेत्र में महत्वपूर्ण कमी आई है।
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छत्तीसगढ़ नक्सल एनकाउंटर - फोटो : अमर उजाला
अबूझमाड़ लगभग 5000 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला हुआ है, जो नारायणपुर, बीजापुर, कांकेर और दंतेवाड़ा जिलों में स्थित है, जो अत्यधिक कठिन और ऊबड़-खाबड़ इलाका है, जिसमें घने जंगल माओवादियों के सशस्त्र दस्तों एवं माओवादियों के शीर्ष नेतृत्व के लिए सुरक्षित ठिकाने व आश्रयस्थली प्रदान करते हैं। पिछले दो और आधे वर्षों में सुरक्षा शिविरों की स्थापना और माओवादी विरोधी अभियानों के कारण माओवादियों का गढ़ महत्वपूर्ण रूप से कमजोर हुआ है।

सीपीआई (माओवादी) महासचिव बसव राजू और डीकेएसजेडसी और पीएलजीए संरचनाओं के अन्य वरिष्ठ दस्तों की उपस्थिति के बारे में छत्तीसगढ़ एसआईबी से प्राप्त खुफिया जानकारी के आधार पर छत्तीसगढ़ पुलिस की संयुक्त डीआरजी टीमों ने 18 मई 2025 को नारायणपुर, बीजापुर और दंतेवाड़ा की सीमा क्षेत्र में अबूझमाड़ के जंगलों में इस निर्णायक अभियान के लिए प्रस्थान किया। 

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छत्तीसगढ़ नक्सल एनकाउंटर - फोटो : अमर उजाला
तलाशी अभियान के दौरान, 21 मई को सुबह के समय माओवादियों ने सुरक्षाबलों पर अंधाधुंध गोलीबारी की। प्रतिकार में सुरक्षा बलों ने बहादुरी और कुशलता से अवैध और प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) संगठन के खिलाफ संघर्ष किया, जिसमें 27 सशस्त्र माओवादियों के शव बरामद हुए और ऑपरेशन के दौरान एके-47, इंसास, एसएलआर, 303 राइफल, कार्बाइन, सुरखा आदि सहित बड़ी संख्या में हथियार बरामद किए गए। 27 निष्क्रिय किए गए माओवादियों में सीपीआई (माओवादी) महासचिव नम्बाला केशव राव भी शामिल है, इस पर छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा 1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया गया था और इसी तरह अन्य एलडब्ल्यूई प्रभावित राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों ने विभिन्न इनाम घोषित किए हैं।

बसव राजू के बारे में एक नजर में
नाम: नम्बाला केशव राव
उपनाम: बसवराज, गंगन्ना, बीआर, प्रकाश, कृष्णा, दारापु नरसिंह रेड्डी
पिता का नाम: स्व. एन. वासुदेव राव
आयु: 70 वर्ष (2024 के अनुसार)
जन्म स्थान: जियन्नापेट, थाना और मंडल: कोटबोम्माली, जिला श्रीकाकुलम (आंध्र प्रदेश)
जाति: कालिंगा
शिक्षा: रासायनिक अभियांत्रिकी में बीटेक, क्षेत्रीय अभियांत्रिकी कॉलेज, वारंगल (अब एनआईटी वारंगल)
बसव राज :संगठनात्मक भूमिकाएं और सैन्य गतिविधियां 
वर्तमान पद: महासचिव, CPI (माओवादी) (10 नवम्बर 2018 से)
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छत्तीसगढ़ नक्सल एनकाउंटर - फोटो : अमर उजाला
बसव राजू की अन्य प्रमुख भूमिकाएं
केंद्रीय समिति सदस्य (संस्थापक सदस्य)
पोलितब्यूरो (पीबी) सदस्य
केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी) प्रमुख
राजू की पदोन्नति वैचारिक से सैन्य आक्रामकता की ओर एक बदलाव को दर्शाती है, जो गुरिल्ला और मोबाइल युद्ध रणनीतियों और पीएलजीए (पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी) को मजबूत करने पर केंद्रित है। वह विशेष रूप से विस्फोटकों, आईईडी के उपयोग, सैन्य गठन, पुलिस थानों पर हमलों आदि में सैन्य प्रशिक्षण में माहिरा था। 

बसवराज से जुड़े प्रमुख हमले:
* 2004 कोरापुट शस्त्रागार लूट: 3 मारे गए, 1,000 उन्नत बंदूकें और 1,000 अन्य हथियार, मूल्य लगभग 50 करोड़ रुपये।

* 2005 जहानाबाद जेल ब्रेक: 389 कैदियों की फरारी, जिनमें माओवादी और कुख्यात अपराधी शामिल थे।

* 2010 दंतेवाड़ा नरसंहार: 76 सीआरपीएफ कर्मी मारे गए।

* 2013 जीरम घाटी हमला: 27 मारे गए (जिसमें वरिष्ठ कांग्रेस नेता शामिल थे)।

* 2018 आंध्र प्रदेश के विधायकों की हत्या: किदारी सर्वेश्वर राव (टीडीपी)।

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