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देखिए चेस का ऐसा चैंपियन, जिसने क्रिकेट में अंग्रेजों से वसूला लगान

Fri, 03 Feb 2017 09:39 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
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यजुवेंद्र चहल
मिलिए चेस के ऐसे चैम्पियन से, जिसने क्रिकेट के मैदान में अंग्रेजों से इस तरह से लगान वसूला कि उन्हें नानी याद आ गई। जानिए इनके बारे में सब कुछ।
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d - फोटो : espncricinfo
इंग्लैंड से टी20 सीरिज जीतने के बाद मैच से ज्यादा चर्चा एक नाम की हो रही है और वो है यजुवेंद्र चहल। उन्होंने इस मैच में भारत की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस मैच के जीतने के साथ ही भारत ने सिरीज भी अपने नाम कर ली। चहल ने इंग्लैंड के बल्लेबाजों को छकाते हुए 25 रन देकर 3 विकेट लिए। शानदार गेंदबाजी के लिए चहल को मैन ऑफ मैच और सिरीज में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए मैन ऑफ द सिरीज घोषित किया गया।
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d - फोटो : espncricinfo
टीम इंडिया में शामिल युजवेंद्र चहल का करियर चेस बोर्ड से शुरू हुआ था। शंतरज में शह और मात के खेल में विरोधियों को चित्त करने वाले चहल ने चेस के अंदाज में ही बंगलूरू में इंग्लिश टीम को भी चेस बोर्ड की तरह पटखनी दी। टीम इंडिया के लिए संघर्षपूर्ण बनते मैच को चहल ने अपनी फिरकी से आसान कर टीम को जीत दिलाई। यजुवेंद्र चहल शतरंज के अच्छे खिलाड़ी थे, लेकिन अब क्रिकेट में धूम मचा रहे है।

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Yuzvendra Chahal
चहल ने करीब 10 साल की उम्र में राष्ट्रीय स्तर पर खेलना शुरू कर दिया था, वहीं 13 साल की उम्र में उन्होंने ग्रीस में आयोजित जूनियर वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व किया। चेस में महारथ होने के चलते चहल मानसिक रूप से काफी मजबूत हैं और विरोधी की चाल को समय से पहले ही बखूबी समझ जाते हैं। चेस में चहल एशियन और वर्ल्ड यूथ चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
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d - फोटो : espncricinfo
चहल का नाम फिडे (FIDE) की ऑफिशल साइट पर भी है और उन्हें साइट पर रेटिंग भी जबरदस्त मिली थी। चहल चेस में डूबते गए, लेकिन वक्त ऐसा भी आया जब उन्हें अपना करियर आगे बढ़ाने के लिए स्पॉन्सर नहीं मिला। यहीं से उनका ध्यान चेस से भटका और क्रिकेट में लगा। बचपन से ही वो क्रिकेट हॉबी के तौर पर खेलते थे। इसके बाद मन बदल गया और उसने क्रिकेट को ही अपनी दुनिया बनाने की ठान ली।
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यजुवेंद्र चहल
शुरुआत अंडर-14 टीम में खेलकर की। उसके बाद अंडर-15, 16, 17, 19, 23 व 25 में अपनी प्रतिभा दिखाई। यहीं से उनका ध्यान चेस से भटका और क्रिकेट में लगा। बचपन से ही वो क्रिकेट हॉबी के तौर पर खेलते थे। यजुवेंद्र चहल हरियाणा के जींद जिले के रहने वाले है। 23 जुलाई 1990 को जींद जिले में जन्मे यजुवेंद्र IPL में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू के लिए खेलते रहे हैं।

 
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यजुवेंद्र चहल
विश्व में यह टी-20 अंतर्राष्ट्रीय मैचों में तीसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। चहल से पहले श्रीलंका के अजंता मेंडिस ने दो बार इस तरह का प्रदर्शन किया है। मेंडिस ने 10 रन देकर 6 विकेट ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ और 2012 में जिम्बावे के खिलाफ 8 रन देकर 6 विकेट हासिल किए थे। सिरीज में चहल सबसे सफल गेंदबाज रहे उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 सिरीज में 10.62 की औसत से 8 विकेट हासिल किए।

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यजुवेंद्र चहल
युजवेंद्र कहते हैं कि चेस के कारण उन्हें विरोधी खिलाड़ी के खिलाफ रणनीति बनाने और उसे वापस पवेलियन पहुंचाने में बहुत मदद मिलती है। वे बल्लेबाज से एक कदम आगे बने रहने की कोशिश करते हैं। कप्तान कोहली की तारीफ में यजुवेंद्र कहते हैं कि कोहली ने मुझे हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। चाहे मैं अच्छा नहीं भी कर रहा होता हूं तो भी वह हौसला बढ़ाते हैं।

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यजुवेंद्र चहल
चहल की डाइट की बात करें तो वजन न बढ़े इस पर वे खास ध्यान देते हैं और काफी बैलेंस डाइट लेते हैं। यजुवेंद्र की मां सुनीता देवी बताती हैं कि घर हो या बाहर सन्नी (यजुवेंद्र) कभी भी तली हुई चीजें नहीं खाता। देशी घी भी बहुत कम। उसकी खाने में सबसे फेवरिट डिश राजमा-चावल और लहसुन की चटनी होती है। खाने में दोनों टाइम वह लहसुन की चटनी जरूर खाता है। दूध पीने से वह कभी मना नहीं करता।
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यजुवेंद्र चहल
सुनीता देवी बताती हैं कि घर हो या बाहर यजुवेंद्र डेली 2 से 3 किलो दूध दिन भर में पी जाता है। यजुवेंद्र के पिता एडवोकेट केके चहल बताते हैं कि चहल पहले अंडा तक नहीं खाता था लेकिन कोच ने मसल्स प्रॉब्लम बताकर नॉनवेज खिलाना शुरू कर दिया।
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