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अंतिम संस्कार से पहले जिंदा हो गई नवजात, फिर जो हुआ देख पिता के होश उड़े

Tue, 22 Aug 2017 09:38 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, यमुनानगर(हरियाणा)
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अं​तिम संस्कार से पहले जिंदा हो गई नवजात
नवजात का अंतिम संस्कार करने के लिए गए तो अचानक बच्ची ने आंखें खोल ली और वह जी उठी। पर उसके बाद जो हुआ, देखकर पिता के होश उड़ गए। आपको भी यकीं न होगा।
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अं​तिम संस्कार से पहले जिंदा हो गई नवजात
मामला हरियाणा के यमुनानगर का है।  डिलीवरी के बाद डॉक्टरों ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया। पिता अंतिम संस्कार के लिए ले गया तो आखिरी बार चेहरा देखना को पॉलीथिन हटाया तो देखा कि बच्ची की आंखें खुली है और वह हाथ हिला रही है। यह देखते ही पिता चिल्लाने लगा और बच्ची को पॉलीथिन से बाहर निकाला और उसे डॉक्टर के पास ले गए, लेकिन बच्ची की जान नहीं बची।

 
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अं​तिम संस्कार से पहले जिंदा हो गई नवजात
बच्ची के पिता जुबेर ने आरोप लगाया कि मेरी बेटी जी उठी थी, लेकिन वक्त पर इलाज न मिल पाने के चलते उसने दम तोड़ दिया। मैं बेटी को लेकर जेपी अस्पताल गया था, उस समय उसकी सांसें चल रही थी। लेकिन वहां से मुझे यह कहकर लौटा दिया कि उनके पास बच्ची को रखने के लिए मशीन नहीं है, इसलिए वे उसे पीजीआई ले जाएं। लेकिन मेरे पास इतने पैसे नहीं थे कि दूसरे अस्पताल ले जा सकूं।

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अं​तिम संस्कार से पहले जिंदा हो गई नवजात
बच्ची के पिता जुबेर ने बताया कि वह बच्ची को लेकर वापस घर लौट गया। घर जाते ही उसकी बच्ची ने दम तोड़ दिया। करीब पांच घंटे तक मैं अपनी बच्ची को लेकर अपने घर की खुशी को हाथों में लिए घूमता रहा, लेकिन आखिर उम्मीद हार गई। वही मामले में डॉक्टर ने कैमरे के सामने आने से बचते हुए जो बयान दिए, वो चौंकाने वाले थे। हालांकि अभी तक कोई केस दर्ज नहीं हुआ है।
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अं​तिम संस्कार से पहले जिंदा हो गई नवजात
पुराना हमीदा की आनंद कालोनी निवासी जुबेर हसन ने बताया कि वह मूलरूप से बिहार के जिला रोहतास के गांव घमाड़ी का रहने वाला है। उसकी पत्नी शाहिना खातून छह माह की गर्भवती थी। शुक्रवार सुबह पेट में दर्द होने पर जेपी अस्पताल में भर्ती कराया था। डॉक्टर ने बताया कि डिलीवरी समय से पहले हो जाएगी। अस्पताल में उसके साथ शाहिना की बहन शबिहा खातून भी थी।
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अं​तिम संस्कार से पहले जिंदा हो गई नवजात
जुबेर ने बताया कि शनिवार तड़के चार बजे शाहिना ने नॉर्मल डिलीवरी से बच्ची को जन्म दिया। स्टाफ ने उन्हें बताया कि बच्ची मरी हुई है। डॉक्टरों ने बच्ची को एक थैली में बांधकर दे दिया। उसे लेकर वे घर आ गए और जब बच्ची को दफनाने की तैयारियां हो रही थी तो देखा कि बच्ची की आंखें खुली थी। वह हाथ भी हिला रही थी। लेकिन सहयोग न मिलने से बच्ची बच न सकी।
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