देश के दो भाइयों ने जर्मनी में हरियाणा का नाम उंचा कर दिया। एक वहां सांसद बना और दूसरा जज। दोनों भारत लौटे तो देखिए कैसे हुआ स्वागत?
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जर्मनी में छाए यमुनानगर के दो भाई
यमुनानगर जिले के जठलाना क्षेत्र के गांव अलाहर के रहने वाले दो भाईयों को एक साल ही हुआ है कि दोनो ऐसे पदों पर तैनात हुए हैं, लेकिन ऐसे में वह अपने गांव आना नहीं भूले। सोमवार को दोनों भाई जब गांव में पहुंचे तो उनके स्वागत के लिए गांव के लोगों ने अपनी आंखें बिछाए रखी और उनके आते ही ढोल नगाड़ों के साथ उनके स्वागत के लिए गांव से बाहर पहुंच गए।
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जर्मनी में छाए यमुनानगर के दो भाई
गांव अलाहर के साधारण से परिवार के पैदा हुए कपिल व राहुल दोनों अपने पिता के साथ जर्मनी के शहर फ्रैंकफोर्ट में जाकर रहने लग गए थे। हालांकि कपिल तो यहीं पढ़ाई करने के बाद जर्मनी गया था, लेकिन राहुल थोड़ा यहां पढ़ा और बाकी की पढ़ाई उसने जर्मनी में ही जाकर की। अब जब दोनों बड़े होकर अच्छे मुकाम पर पहुंचे तो दोनों भाई अपने गांव आना नहीं भूले, जबकि इनके पिता राज कुमार काफी समय पहले अपने गांव में वापस आ गए थे।
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जर्मनी में छाए यमुनानगर के दो भाई
आते ही दोनों भाईयों ने ग्रामीणों के पांव छूकर आशीर्वाद लिया और अपने गुरु को रथ पर बिठाकर स्वयं गांव के लोगों के साथ साथ चलने लग गए। सांसद कपिल व राहुल को गांव के लोगों ने पगड़ी पहना कर उनका स्वागत किया। लेकिन यहां भी इन बेटे ने अपने बाप का आदर सत्कार करने में कसर नहीं छोड़ी और अपने सिर से पगड़ी को हटा कर अपने पिता के सिर पर रख दी। जिससे राज कुमार का सीना खुशी के मारे चौड़ा हो गया।
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जर्मनी में छाए यमुनानगर के दो भाई
जर्मनी में सांसद बने कपिल का कहना है कि वह भले ही आज जर्मनी में सांसद है, लेकिन अपनी मातृ भूमि को नहीं भूले। यहां वह खेल कूद कर बड़े हुए हैं। उसे वह ऊंचाई पर ले जाना चाहते हैं और ऐसे में अब वह 21 दिन के लिए भारत आए हैं। वह शीघ्र ही हरियाणा के मुख्यमंत्री से मिलकर हरियाणा के विकास के लिए जर्मनी तकनीक के बारे में जानकारी देंगे और दोनों देशों के विचार सांझा कर हरियाणा को आगे लाने पर भी बात करेंगे।
कपिल का कहना है कि अपने गांव के बारे में भी सीएम से बात कर इस गांव का विकास भी जर्मनी की तर्ज पर कराया जाएगा। हालांकि जब देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जर्मनी गए थे तो उनके स्वागत के लिए भी कपिल पहुंचे थे, लेकिन यहां आने पर उन्होंने किसी प्रकार की कोई सुरक्षा तक की मांग भी नहीं कि और अपने ग्रामीण साथियों के साथ गांव में पहुंच गए।