विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर हम आपको सुना रहे हैं, 'हीरो आफ एन्वायरन्मेंट' की कहानी, जिसने अकेले ऐसा काम कर दिखाया कि पद्मश्री अवार्ड मिला।
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‘पर्यावरण के हीरो’ के टाइटिल से नवाजे गए संत बलबीर सिंह सीचेवाल
- फोटो : amarujala
हम बात कर रहे हैं, पर्यावरण कार्यकर्ता और सिख धर्मगुरु संत बलबीर सिंह सीचेवाल की। इसी साल इन्हें इनकी उपलब्धियों के लिए भारत सरकार ने पद्मश्री अवार्ड से नवाजा। इस शख्स ने अकेले प्रदूषित नदी की सफाई करके मिसाल पेश की।
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संत बलबीर सिंह सीचेवाल
पंजाब के होशियारपुर में बनी काली बेई नदी एक समय में बहुत प्रदूषित थी। उसमें नहाना तो छोड़, लोग उसके पास से निकल भी नहीं पाते थे। धीरे धीरे नदी के आसपास बसे 40 गांवों के लोग उसमें कचरा डालने लगे थे, लेकिन संत ने अकेले उसकी सफाई कर दी। सन् 2000 में पर्यावरण कार्यकर्ता बलबीर सिंह सीचेवाल ने इस नदी को साफ करने का काम शुरू किया था।
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पीयू ने बलबीर सिंह सीचेवाल को किया सम्मानित
- फोटो : अमर उजाला
संत ने अपने समर्थक और सहयोगी सेवकों के साथ मिलकर सबसे पहले इसके किनारों का निर्माण किया और नदी के किनारे पर सड़कें बनवाई। लोगों के बीच जनजागृति अभियान चलाया। इसके तहत लोगों से अपना कचरा कहीं और डालने को कहा गया। नदी में मिलने वाले गंदे नालों का रुख मोड़ा गया और नदी के किनारे बसे लोगों को इसकी पवित्रता को लेकर जागरूक किया।
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बलबीर सिंह सीचेवाल
- फोटो : अमर उजाला
नतीजा, जिस नदी के किनारे खड़े होने पर लोगों को नाक पर रुमाल रखना पड़ता था, आज उसी नदी के किनारे लोग पिकनिक मनाते हैं। काली बेई नदी होशियारपुर जिले में 160 किलोमीटर क्षेत्र में बहती है। यह वही काली बेई नदी है, जिसके किनारे 500 साल पहले गुरु नानक देव को अंतर्ज्ञान प्राप्त हुआ था। यहां से अंतर्ज्ञान प्राप्त होने बाद से ही नानक से गुरु नानक के रूप में पहचाने जाने लगे थे।
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पद्मश्री संत सींचेवाल
बाबा बलबीर सिंह सीचेवाल पंजाब के धर्मगुरु और पर्यावरण कार्यकर्ता हैं। सीचेवाला के फॉलोअर दुनियाभर में मौजूद हैं। वे अक्सर पर्यावरण को लेकर अभियान चलाते हैं। टाइम मैग्जीन सीचेवाल को दुनिया भर से चुने गए 30 हीरोज आफ एन्वायरन्मेंट में शामिल कर चुकी हैं। सीचेवाल को सफाईगिरी अवार्ड से भी सम्मानित किया गया था, जो केंद्रीय मंत्री वैंकेया नायडू, अभिनेत्री ऐश्वर्या राय बच्चन और अरुण पुरी ने प्रदान किया।
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संत सीचेवाल
संत सीचेवाल के अथक प्रयासों से प्रभावित होकर पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम दो बार सुल्तानपुर लोधी आए थे। संत सीचेवाल की ओर से म्यूनिसिपल कमेटियों के गंदे पानी को ट्रीट करके खेती में इस्तेमाल करने के लिए लगाए ट्रीटमेंट प्लांट को देखकर पूर्व राष्ट्रपति भी वाह-वाह कह उठे थे। केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती भी संत सीचेवाल के पर्यावरणीय कार्यों से प्रभावित होकर हाल ही में सुल्तानपुर लोधी का दौरा करके गई हैं।
पद्मश्री संत सीचेवाल ने अब घग्गर नदी का उद्धार करने का बीड़ा उठाया है। सीचेवाल बताते हैं कि घग्घर नदी व अन्य दरियाओं को दूषित करना कानूनी अपराध है और 22 लो 1974 एक्ट के तहत इस मे 3 साल से 6 साल तक की सजा का भी प्रवाधान है। फैक्ट्रियों का दूषित पानी नदियों में छोडऩा कानूनी अपराध है इसके लिए नदियों पर ट्रीटमेंट प्लांट लगाकर इस नदी के दूषित पानी को बचाया जा सकता है।