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डॉक्टर ने उंगली से कुछ पकड़ने से मना कर दिया था...पर वो नही मानी, बन गई वर्ल्ड चैम्पियन

Sun, 22 Apr 2018 03:49 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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हिना सिद्धू
डॉक्टर ने उंगली से कुछ भी पकड़ने से मना कर दिया था, लेकिन जुनून ऐसा था कि हिम्मत नहीं छोड़ी और बन गई वर्ल्ड चैम्पियन, जानिए कौन है।
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हीना सिद्धू - फोटो : sportsstar
हम बात कर रहे हैं देश की स्टार महिला शूटर हिना सिद्धू की, जिन्होंने आस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में चल रही 21वीं कॉमनवेल्थ गेम्स में देश के सिल्वर मेडल जीता। हिना ने 234.0 स्कोर के साथ सिल्वर मेडल जीता। ऑस्ट्रेलिया की एलिना गलिआबोविच ने 214.9 के स्कोर के साथ ब्रोन्ज मेडल जीता। हिना, मनु भाकर से करीब 7 अंक पीछे रहीं। उन्होंने स्टेज वन में 46.1 और 95.5 अंक हासिल किए, जबकि स्टेज 2 एलिमिनेशन राउंड में 234 का स्कोर किया।
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heena sidhu
अगस्त 1989 में पंजाब के लुधियाना में पैदा हुई हिना सिद्धू के भाई करनवीर सिंह जूनियर स्तर पर शूटिंग मुकाबलों में हिस्सा ले चुके हैं। हिना के पिता राजदीप सिंह सिद्धू, एक्साइज एंड टैक्सेशन महकमे में उच्चाधिकारी रहे हैं। हिना ने साल 2012 में शूटिंग कोच रौनक पंडित से शादी की थी। उनके ससुर अशोक पंडित शूटिंग द्रोणाचार्य अवार्डी हैं। हिना सिद्धू ने बीडीएस तक पढ़ाई की है।

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हीना सिद्धू - फोटो : Twitter
हिना के पिता राजदीप ने बेटी की उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि वह तो हिना के लिए गोल्ड मेडल की आस कर रहे थे। बहरहाल, देश के लिए इस मंच पर सिल्वर मेडल जीतना भी बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि हिना की इस सफलता के बाद हिना की माता रुमिंदर कौर ने गुरुद्वारे में माथा टेका। बता दें कि हिना ने हिजाब पहनने की शर्त के चलते एक चैम्पियनशिप से नाम वापिस ले लिया था।
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हिना सिद्धू
हिना सिद्धू साल 2008 से इंटरनेशनल लेवल पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। वर्ष 2009 में उन्होंने बीजिंग में आयोजित इंटरनेशनल शूङ्क्षटग चैंपियनशिप में सिल्वर जीता, वहीं साल 2010 में गुआंगझू (चीन) में एशियन गेम्स में 10 मीटर एयर पिस्टल में गोल्ड मेडल जीता। 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स में इसी इवेंट में महिला व्यक्तिगत वर्ग में गोल्ड मेडल जीता। वह 2012 लंदन और 2016 रियो डी जेनेरियो ओलंपिक्स में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।
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हीना सिधू - फोटो : facebook
हिना सिद्धू बीडीएस कर चुकी हैं और वह न्यूरोलॉजिस्ट बनना चाहती थी, लेकिन शूटिंग का शौक था। साल 2006 में हिना मेडिकल में दाखिले के लिए जी तोड़ तैयारी कर रही थीं। वहीं घर में चाचा का बंदूकों की मरम्मत का बिजनेस था तो शौक-शौक में पिस्टल चलाना सीखा। पढ़ाई से थोड़ा ब्रेक मिल जाता था, लेकिन निशानेबाजी का शौक जल्द ही फुल टाइम मिशन में बदल गया।
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हीना सिधू - फोटो : getty
कॉलेज के दिनों से ही मेडल जीतने का सिलसिला शुरू हो गया था। 19 साल की उम्र में हिना ने हंगेरियन ओपन जीता और 2009 में बीजिंग में हुए वर्ल्ड कप में रजत पदक जीता। फिर निशानेबाज रौनक पंडित से शादी की, जो बाद में उनके कोच बने। साल 2013 की विश्व शूटिंग प्रतियोगिता में 10 मीटर एयर पिस्टल टूर्नामेंट में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाकर हिना स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।

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मनु और हीना
हिना के पिता बताते हैं कि साल 2017 में उसकी उंगली में चोट लग गई थी। जिस वजह से शूटिंग के दौरान उनकी उंगली कांपती थी। डॉक्टर ने उंगली से कोई चीज पकड़ने से भी मना कर दिया था, लेकिन इलाज, फिजियोथेरेपी और अपनी हिम्मत की बदौलत हिना ने कमबैक किया। शानदार प्रदर्शन करते हुए हिना ने साल 2017 में कॉमनवेल्थ शूटिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता।
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हिना सिद्धू
विश्व रैंकिंग में नंबर वन रह चुकीं हिना को इस साल फोर्ब्स ने 'अंडर-30 यंग अचीवर्स' की सूचि में शामिल किया। शूटिंग करने के अलावा हिना को किताबें पढ़ना और नई जगहों पर घूमना पसंद है। हिना को खेल, एनॉटमी, मनोविज्ञान और इंटीरियर डिज़ाइनिंग से जुड़ी किताबें पढ़ना पसंद हैं। निशाना साधने वाले हिना के हाथ पेंटिंग और स्केंचिंग भी कर लेते हैं।
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