ये बच्चे दृष्टिहीन दिव्यांग जरूर हैं लेकिन कंप्यूटर और स्मार्टफोन पर इनकी अंगुलियां सरपट दौड़ती हैं और वॉइस नोट से बात करते हैं। कोई फाइल ओपन या डाउनलोड करनी हो तो ये तत्काल कर लेते हैं। हम बात कर रहे हैं दिव्य ज्योति बोर्डिंग ब्लाइंड विद्यालय में पढ़ने वाले दृष्टिहीन दिव्यांग छात्र-छात्राओं की।
इस स्कूल में दसवीं-बारहवीं कक्षा के 50 विद्यार्थी कंप्यूटर पर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। अधिकतर पाठ्य सामग्री कंप्यूटर और मोबाइल से डाउनलोड करते हैं। ये सब काम वे देखकर नहीं बल्कि टॉक बैक स्पीकिंग एप्लिकेशन की मदद से करते हैं। तकनीक ने दृष्टिहीन दिव्यांगों को नई रोशनी देने का काम किया है। आज लुई ब्रेल जयंती पर अमर उजाला ने दृष्टिहीन दिव्यांगों से जाना कि किस तरह से डिजिटल प्लेटफॉर्म उनके लिए मददगार साबित हो रहा है।
वॉइस नोट से होती है बात
दृष्टिहीन दिव्यांग आम लोगों की तरह नेट सर्फिंग करते हैं, बस इनका तरीका थोड़ा अलग है। वाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम या दूसरी सोशल मीडिया को इस्तेमाल करने के लिए ये वॉइस नोट का इस्तेमाल करते हैं, जैसे हम किसी से वाट्सएप पर बात करते समय चैटिंग करते हैं लेकिन ये विद्यार्थी वाइस नोट के जरिए अपनी बात दूसरों तक पहुंचाते हैं। वहीं, दसवीं और बारहवीं के इन विद्यार्थियों को स्मार्टफोन व कंप्यूटर से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद मिलती है। कुछ परीक्षाएं होने वाली हैं, इसलिए करंट अफेयर्स से जुडे़ सवालों को टॉक बैक की सहायता से जाना जाता है।
अब नहीं पड़ती किताबों की जरूरत
दिव्य ज्योति स्कूल के संचालक किशन लाल गौतम स्वयं भी दृष्टिहीन दिव्यांग हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों को सिलेबस की पढ़ाई कराने के लिए ब्रेल किताबों की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि कंप्यूटर और मोबाइल पर सिलेबस की हर यूनिट डाउनलोड कर लेते हैं। डिजिटल वर्ल्ड इनके लिए काफी सहायक हो चुका है। किसी भी चीज के लिए टॉक बैक एप्लिकेशन डाउनलोड करना पड़ता है, इससे बच्चे आसानी से नेट सर्फिंग कर पाते हैं।