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मां-बाप ही बने बच्चों की जान के दुश्मन, देखिए कैसे?

Sun, 08 Feb 2015 02:13 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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इस बात में कोई शक नहीं हैं कि मां-बाप ही अपने बच्चों की जान के दुश्मन बने हुए हैं। इन तस्वीरों को देखकर इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
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मां-बाप ही बने बच्चों की जान के दुश्मन, देखिए कैसे?

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जीरकपुर फ्लाईओवर पर हुए हादसे में स्कूल स्टूडेंट की दर्दनाक मौत ने नाबालिगों द्वार गैर-कानूनी तरीके से वाहन चलाए जाने पर सवालिया निशान लगा दिए, लेकिन हादसे सेअभिभावकों ने अभी तक सबक नहीं लिया।
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अभी भी स्कूल स्टूडेंट्स चाहे वे लड़के हों या लड़कियां बिना लाइसेंस वाहन चलाते देखे जा सकते हैं। कई नाबालिग तो ट्रिपलिंग भी करते हैं। न केवल चंडीगढ़ में देश भर में यह ट्रेंड देखा जा सकता है।

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अभिभावक भी इतने लापरवाह हैं कि बिना लाइसेंस के ही नाबालिगों को बाइक, स्कूटी या गाड़ी देकर स्कूल भेज देते हैं। कहने को तो स्टेट्स सिंबल होता है, लेकिन वे यह नहीं सोचते कि यह स्टेट्स सिंबल जान का दुश्मन भी बन सकता है।
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दूसरी ओर, सड़कों पर खुलेआम घूम रहे इन नाबालिग वाहन चालकों पर लगाम लगाने में पुलिस भी नाकाम साबित हो रही है। स्कूल प्रबंधन भी मामले में कई बार लापरवाही बरतते हैं।
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देखने में आया है कि युवाओं में दिखावे की भावना बढ़ने और मॉडर्न दिखने की चाहत ने रैश ड्राइविंग को बढ़ावा दिया है। ज्यादातर बच्चे अपने परिजनों से छिपकर ड्राइविंग करते हैं तो कुछ परिजनों के सामने खुलेआम ड्राइविंग करते है। ऐसी तस्वीर कभी भी शहर के स्कूलों के सामने देखने को मिल जाती है।
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हालांकि नाबालिग बच्चों को वाहन चलाने से रोकने की जिम्मेदारी सबसे पहले परिजनों की होती है। जबकि, कुछ परिजन तो ऐसे हैं जो अपने बच्चों की सेफ्टी के लिए बाइक के लाइसेंस पर बड़ी गाड़ियां चलने को दे देते हैं। जबकि इस बारे में पूछने पर परिजनों का जवाब आता है कि बच्चे मानते ही नहीं हैं।

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देश भर में स्कूलों के सामने नाबालिग वाहन चालक धड़ल्ले से ड्राइविंग करते दिखाई दे जाते हैं, वो भी बिना हेलमेट के। ट्रैफिक पुलिस इन नाबालिग चालकों पर लगाम लगाने का दावा कई बार कर चुकी है। लेकिन, नाबालिगों के हौसलों में कोई कमी नजर नहीं आई, बल्कि इनकी संख्या में लगातार इजाफा हुआ है।

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बेशक ट्रैफिक पुलिस लोगों को जागरूक करने के लिए कैंपेन चलाती है। स्कूली बच्चों को वीडियो दिखाकर व अन्य तरीकों से जागरूक करती है। लेकिन, इस अभियान का भी लोगों पर कुछ ज्यादा असर नहीं दिखाई दे रहा है।
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वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन के सर्वे में सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या सबसे ज्यादा 15 वर्ष से 29 वर्ष के बीच होती है। सीट बेल्ट नहीं लगाने पर ड्राइवर को 75 प्रतिशत और पीछे बैठने वालों को 50 प्रतिशत जान का खतरा रहता है। 75 प्रतिशत लोग यह मानते है कि शराब पीकर गाड़ी चलाना खतरनाक होता है। लेकिन, 50 प्रतिशत लोग शराब के नशे में अक्सर गाड़ी चलाने की बात पर सहमति जताते है।
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