वैलेंटाइन डे के मौके पर हम आपको मिलवा रहे हैं, पाकिस्तान में रह रहे 42 बच्चों की 86 वर्षीय दादी अम्मा से। ये भारतीय हैं और इनकी स्टोरी दिल छू लेने वाली है।
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valentine day
यह कहानी नही हकीकत है और अगर किसी निर्देशक की नजर में आ जाए तो सुपर डुपर हिट फिल्म बन सकती है। कहानी ऐसी सिख लड़की की है जो 1946 में ब्याह कर अमृतसर से लाहौर गई, लेकिन 1947 भारत-पाकिस्तान बंटवारे में पाकिस्तान से भारत लौटते समय उसके ससुराल वाले दंगे की भेंट चढ़ गए। एक मुस्लिम ने उसे बचा लिया और हालात ऐसे बने कि उसने धर्म परिवर्तन करके उससे शादी कर ली।
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Valentine's Day
कहानी में दिलचस्प मोड़ तब आया, जब 1962 में पाकिस्तान से अपने मायके (अमृतसर) लौटी। उसके बाद मायके वालों ने उसे दोबारा पाकिस्तान नही जाने दिया और वहां उसकी 6 संतानें छूट गई। अब वह लड़की 86 साल की हो चुकी है और संतानों से मिलने के लिए कराची पहुंची है। वहीं, पाकिस्तान में अब 5 बच्चे रह गए हैं। एक की मौत हो गई हैं। सभी 6 बच्चों से उसके 42 पोते-पोतियों हैं और सभी उसे दादी अम्मा कहते हैं।
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लव
इनका नाम है, हरभजन कौर जो भारत-पाकिस्तान बंटवारे में खुद भी बंट गई थी। 1946 में लाहौर में शादी हुई थी। बंटवारे के आतंक में भारत लौटते समय उसके ससुराल वालों दंगे के भेंट चढ़ गए। हरभजन की जान कराची के अफजल खां ने बचाई। हरभजन को जब किसी सूरत में भारत नही भेज सका तो उसका धर्म परिवर्तन करके शहनाज बेगम नाम रखते हुए निकाह कबूल करवा लिया। इसी दौरान छह संतान हुई। सब कुछ अच्छा चल रहा था शहनाज बेगम की जिंदगी में।
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प्रेम राशिफल
1962 में नाटकीय मोड़ तब आया जब शहनाज बेगम भारत-पाकिस्तान के बीच सरल वीजा नीति के तहत अमृतसर अपने पैतृक गांव राजासांसी पहुंची। हरभजन कौर से शहनाज बेगम बनने की सारी कहानी परिवार वालों ने सुन तो ली लेकिन उसे उसे पाकिस्तान जाने नही दिया। अमृतसर में उसकी दोबारा शादी गुरबचन सिंह से कर दी गई। गुरबचन सिंह से हरभजन कौर ने एक बेटे को जन्म दिया। बेटे का नाम रौमी रखा। रौमी धीरे-धीरे बड़ा होने लगा।
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फेसबुक पर दो साल का प्यार
उधर, भारत में रहकर पाकिस्तान में अपने बच्चों से मिलने की ललक हरभजन कौर को कभी चैंन से सोने नही दिया। अक्सर वो अपनी बातें बेटे रौमी को बताती रहती थी। समय बीतता रहा। हरभजन कौर का बेटा रौमी ने मां के उस सपनों को पूरा करने के लिए हर दिन कोशिश करता रहा। अब वह सपना पूरा हुआ और हरभजन 7 फरवरी को कनाडा से कराची पहुंच गईं। उनके पास 9 मार्च तक पाकिस्तान का वीजा है।
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प्यार
पाकिस्तान का वीजा उसे कनाडा की सिटीजन होने के नाते मिला है। पाकिस्तान में हरभजन कौर की छह संतान थीं। एक की मौत हो चुकी है, अब पांच रह गए हैं। इन पांच बच्चों के अब तक 42 बच्चे हैं, 15 पौत्र-पौत्रियां व 37 पड़पोते-पड़पोतियां। सबसे बड़ा बेटा रिजवान है। दो बेटियां हैं जमीला व खुर्शीदा। हरभजन कौर परिवार से ताल्लुक रखने वाले इतिहासकार सुरेन्द्र कोछड़ कहते हैं कि हरभजन कौर की रीयल स्टोरी पर सुपरहिट रील फिल्म बन सकती है।
रौमी बताते हैं कि उन्होंने पाकिस्तान के उर्दू अखबार में विज्ञापन दिया। हरभजन कौर को अपने पाकिस्तानी पूर्व शौहर का नाम-पता मालूम था। यह इश्तहार पाकिस्तान के सोशल मीडिया में वायरल हुआ कि एक भारतीय महिला अपने शौहर का पता ढूंढ रही है। सोशल मीडिया से यह बात हरभजन कौर की बड़ी बेटी खुर्शीदा बेगम तक पहुंची। खुर्शीदा मां से मिलने कनाडा आईं, फिर पाकिस्तान का वीजा लगवाया गया। इस तरह वे अपने परिवार से मिला पाईं।