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जानिए क्या हुआ था इस शख्स के साथ, जो SC में डाली याचिका और देश हिला दिया

Tue, 11 Apr 2017 09:11 AM IST
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
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हरमन सिंह सिद्धू
47 साल के इस शख्स के साथ एक ऐसा हादसा हुआ, जिससे दुखी होकर इसने वो काम कर दिखाया कि पूरे देश में भूचाल आ गया। दिलचस्प है कहानी।
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दिव्यांग हरमन सिद्धू की याचिका पर हुई ‘शराबबंदी’ - फोटो : अमर उजाला
हम बात कर रहे हैं देश में शराबबंदी कराने वाले चंडीगढ़ निवासी हरमन सिंह सिद्धू की।  इनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शराब और हाइवे किनारे बने शराब के ठेके बैन किए। ये 20 साल से व्हील चेयर पर बैठे हैं और इन्होंने शराबबंदी के लिए लंबी लड़ाई लड़ी, जिसमें जीत भी मिली। पर हरमन सिद्धू के लिए जीत की राह इतनी आसान नहीं थी। यह लड़ाई उन्हें 20 साल पहले हुए हादसे की याद दिलाती है।
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दिव्यांग हरमन सिद्धू की याचिका पर हुई ‘शराबबंदी’ - फोटो : अमर उजाला
क्या हुआ था 20 साल पहले: 1996 में अक्टूबर महीने की सर्द शाम को हरमन अपने तीन दोस्तों के साथ हिमाचल के रेणुका इलाके से चंडीगढ़ जा रहे थे। कुछ जंगली जानवरों को देखने की चाहत में उन्होंने हाइवे किनारे की कच्ची सड़क पर गाड़ी चलानी शुरू की। अचानक कार फिसल गई और पहाड़ी से नीचे जा गिरी। हरमन के दोस्त कार से निकलने में कामयाब हो गए, लेकिन वह नहीं हो पाए।

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दिव्यांग हरमन सिद्धू की याचिका पर हुई ‘शराबबंदी’ - फोटो : अमर उजाला
उन्हें पीजीआई अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें पता चला कि उन्हें रीढ़ की हड्डी में चोट लगी है। इसकी वजह से उनकी गर्दन से नीचे का हिस्सा काम नहीं करता। 26 साल की उम्र में ही वह वीलचेयर के सहारे जीने को मजबूर हो गए। अगले कुछ वर्षों तक वह बार-बार यही सवाल करते, 'मेरे साथ ही ऐसा क्यों हुआ? अस्पताल के बेड पर जब मरीजों का हाल पूछा जाता, तब उन्हें समझ आया कि वह अकेले नहीं हैं।

 
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हरमन सिद्धू
हरमन को लगा कि रोजाना कई लोग सड़क दुर्घटना का शिकार होते हैं। यही बात उनके लिए टर्निंग पॉइंट बन गई और और उन्होंने सड़क सुरक्षा के लिए काम करने की ठानी। सिद्धू ने एक रिसर्च की और इसमें पाया कि भारत में हर 4 मिनट में सड़क हादसे में एक मौत होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़े के मुताबिक 30-35 फीसदी सड़क हादसे शराब पीकर गाड़ी चलाने से होते हैं।
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हरमन सिद्धू
सिद्धू ने 2012 जो सर्वे किया, उसके पानीपत से जालंधर के बीच करीब 291 किलोमीटर का फासला है। इतनी दूरी में हाईवे किनारे 185 शराब के ठेके हैं. इस हिसाब से हर डेढ़ किलोमीटर में एक ठेका हुआ। तमाम आंकड़े जुटाकर सिद्धू ने कोर्ट में हाईवे किनारे शराबबंदी के लिए जनहित याचिका डाली। इसके बाद पंजाब और हरियाणा में हाईवे किनारे के करीब 1000 ठेके बंद भी किए गए।
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हरमन सिद्धू
पर इस फैसले पर दोनों राज्यों की सरकारों ने सुप्रीम कोर्ट से स्टे ले लिया। आखिरकार लंबी लड़ाई लड़ते हुए हरमन सिद्धू के हौसले की जीत हुई और अब सुप्रीम कोर्ट ने हाइवे किनारे शराब की बिक्री पर रोक लगा दी है। अप्रैल 2017 से हाइवे किनारे शराब की बिक्री नहीं होगी। इसके बाद शुरू हुआ धमकियां मिलने का सिलसिला। दिन भर में करीब 20-25 कॉल आ जाती हैं।

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हरमन सिद्धू
वहीं हाईवे पर शराब की बिक्री के खिलाफ जंग लड़ने वाले हरमन सिद्धू को अब लोगों का साथ भी मिलने लगा है। इससे हरमन सिद्धू के हौसले और बुलंद हो गए हैं। रविवार को पंजाब की पूर्व स्वास्थ्य मंत्री लक्ष्मीकांत चावला भी सिद्धू से मिलने के लिए उनके निवास पहुंचीं। उन्होंने बताया कि सिद्धू के बारे में उन्होंने अखबारों में पढ़ा था। तब से मिलने की इच्छा हो रही थी।

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हरमन सिद्धू
पत्रकारों से चंडीगढ़ का पता लिया और मिलने के लिए पहुंच गई। सिद्धू से मिलकर काफी खुशी हुई है। पूरे देश के लोगों को ऐसे शख्स का हौसलाअफजाई करना चाहिए। सिद्धू ने कहा कि चावला के साथ मिलने के बाद वे काफी मोटीवेट हुए हैं। खुद चावला भी शराब की बिक्री के खिलाफ काफी एक्टिव रही हैं। चावला ने कहा कि यदि सिद्धू को कुछ होता है तो उसकी जिम्मेदारी भारत सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन की होगी।

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दिव्यांग हरमन सिद्धू की याचिका पर हुई ‘शराबबंदी’ - फोटो : अमर उजाला
सिद्धू के मोबाइल पर कई लोगों की धमकी भरी काल्स आ रही थीं। जब से मीडिया में ये खबरें आईं हैं तब से इसमें कमी आई, लेकिन अब उन्हें हौसलाअफजाई की ई-मेल आ रही हैं। देशभर से ई-मेल आ रही हैं। मैसेज भी आ रहे हैं। हालांकि सिद्धू इससे ज्यादा संतुष्ट नहीं दिखते। उनका कहना है कि इससे मोटीवेशन तो मिलती है, लेकिन जरूरत सपोर्ट की है। कोई साथ खड़ा नहीं होता।

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दिव्यांग हरमन सिद्धू की याचिका पर हुई ‘शराबबंदी’ - फोटो : अमर उजाला
सिद्धू कहते हैं कि शराबबंदी पर सुप्रीमकोर्ट के फैसले की कई प्रदेश काट निकाल रहे हैं। सबसे पहले चंडीगढ़ ने शुरुआत की। सभी स्टेट हाईवे को मेजर डिस्ट्रिक रोड में तब्दील कर दिया। उसके देखा-देखी राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, हिमाचल, पंजाब, यूपी और तेलगांना ने स्टेट हाइवे को मेजर डिस्ट्रिक रोड में बदल दिया है। इससे सुप्रीमकोर्ट का फैसला कोई मायने नहीं रखता।

 
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हरमन सिद्धू
हालांकि सिद्धू ने चंडीगढ़ प्रशासन के इस फैसले के खिलाफ याचिका डाली थी। हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन के पक्ष में फैसला दिया। अब सिद्धू ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट में याचिका डाली है। 13 अप्रैल को इसकी सुनवाई होनी है। यदि सिद्धू की अपील स्वीकार होती है तो चंडीगढ़ की सभी सड़क दोबारा से स्टेट हाइवे में तब्दील हो जाएंगी और जो ठेके अभी अलॉट हुए हैं, वे फिर से सुप्रीमकोर्ट के फैसले के दायरे में आ जाएंगे।
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