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एक ऐसा मंदिर, जहां सांप के रूप में साक्षात दर्शन देते हैं शिव

Tue, 30 Jun 2015 10:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पेहोवा, कुरुक्षेत्र(हरियाणा)
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ये मंदिर है, कुरुक्षेत्र जिले के पेहोवा में स्थित संगमेश्वर महादेव मंदिर। सरस्वती और अरुणा के संगम स्थल पर बने इस प्राचीन मंदिर में आज भी साढे़ सात फुट लंबे नागराज शिवलिंग से लिपटते हैं और भक्तों के विश्वास को पक्का करते हैं कि शिव साक्षात यहां विद्यमान हैं।
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दो पत्रकारों ने इस चमत्कार को सबसे पहले देखा था। दोनों पत्रकार जब मंदिर में पहुंचे तो उन्होने साढे़ सात फुट लंबे नागराज को शिवलिंग से लिपटे हुए देखा जिसे देखकर दोनों पत्रकार उल्लास से भर गए। यहां पहले भी दो लघु नागों को शिवलिंग से लिपटे हुए देखा गया था।

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पौराणिक इतिहास बताता है कि अरुणाय स्थित यह वही मन्दिर है जहां भगवान शिव ने बाबा गणेश गिरी को सपने में दर्शन देकर कहा था, आप सरस्वती और अरुणा के संगम पर मेरी पूजा करो। सपने के बाद बाबा गणेश गिरी यहां वटवृक्षों के झुंड में बैठ गए। वह वट वृक्ष आज भी विद्यमान है।

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सपने में बाबा गिरी जी जब घने जंगल में जा रहे थे कि उनको दीमक का ढेर दिखा जिसे खुरचने पर पत्‍थर की पिंडी दिखाई दी। भगवान शिव ने सपने में स्पष्ट प्रेरणा दी थी कि मुझे उखाड़ने का असफल प्रयास मत करो बल्कि यहां ‌भक्ति का जीवन सफल बनाओ।

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जैसे ही बाबा की नींद खुली तो वह अंधेरे में ही उसी स्‍थान पर गए वहां पिंडी पर मणिमय सर्पराज फन फैलाए विद्यमान थे। महात्मा ने जैसे ही दूर से प्रणाम किया, सर्पराज लुप्त हो गए। उसी दिन से मंदिर की शक्ति का इस युग को पता चला। सांप यहां हर साल आते हैं।

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तीर्थ का नाम अरुणा संगम पड़ने के पीछे भी दंत कथा है। महाभारत में वर्णन है कि यहां पर विश्वामित्र जी के श्राप से सरस्वती रक्त मिश्रित होकर बही थी। सरस्वती को श्राप से मुक्त करवाने के लिए ऋषि-मुनियों ने निरंतर जप-तप करके भगवान शिव को प्रसन्न किया था। भगवान शिव ने प्रकट होकर सरस्वती का कल्याण किया और ऋषि-मुनियों के वरदान मांगने पर यहां स्वयंभू शिवलिंग के रूप में विराजमान ह़ुए।

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पिछले साल भी श्री संगमेश्वर महादेव मंदिर में एक काले नाग के आने से मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लग गई। व्यवस्थापक महंत वासुदेव गिरी लाल बाबा व महंत भीमपुरी ने बताया कि अचानक सुबह एक लंबा काला नाग मंदिर परिसर में बैठ गया तथा उसने कई बार शिवलिंग का आलिंगन किया।

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महंत वासुदेव गिरी ने कहा कि नाग भगवान शिव का आभूषण है तथा यह संयोग है कि एक बड़ा नाग मंदिर में आकर भगवान शिव के पावन शिवलिंग के पास बैठ गया। वहीं इस बात की सूचना फैलते ही मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा गया। ये नाग शिवलिंग के आसपास मंदिर में आता है।

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