संत रामपाल को बीमारी की वजह से हाईकोर्ट से बेशक एक सप्ताह की राहत मिल गई हो, लेकिन यह विवाद यहीं थमता नजर नहीं आ रहा है। बरवाला रोड स्थित सतलोक आश्रम में जुटे उनके हजारों अनुयायियों ने प्रशासन को खुली चेतावनी दी है कि जब तक उनके गुरु की तबीयत पूरी तरह ठीक नहीं हो जाती वे किसी भी हालत में पुलिस को उन्हें गिरफ्तार नहीं करने देंगे।
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‘गला कटवा लेंगे, संत गिरफ्तार नहीं होने देंगे’
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अनुयायियों का कहना है कि वे गला कटवाने को तैयार हैं, लेकिन जिला प्रशासन अगर जोर जबरदस्ती उन्हें गिरफ्तार करेगा तो वे खुलकर विरोध करेंगे। सोमवार को भी सतलोक आश्रम के सामने हजारों महिलाएं और बच्चे डेरा डाले बैठे रहे। संत के अनुयायियों समेत ब्लैक ड्रेस में सैकड़ों निजी हथियारबंद ‘कमांडो’ भी मौके पर डटे रहे। इसके अलावा कुछ युवकों के पास बंदूकें भी थी।
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दोपहर तक संत के अनुयायी कोर्ट के फैसले का इंतजार करते रहे। उन्हें करीब पौने तीन बजे पता लगा कि कोर्ट ने संत को 17 नवंबर को सुबह 10 बजे पेश करने के पुलिस को आदेश दिए हैं और दूसरे आरोपी रामकुमार ढाका को जमानत मिल गई है। इस पर वे कुछ शांत हुए, लेकिन अभी भी समर्थकों के तेवर उग्र हैं और हजारों की संख्या में अनुयायी आश्रम के बाहर और अंदर तैनात हैं।
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संत के अनुयायियों का कहना है कि संत रामपाल सीने में दर्द के चलते काफी बीमार हैं। हार्ट स्पेशलिस्ट पांच डॉक्टरों की टीम उनका आश्रम में ही इलाज कर रही है। अनुयायियों के अनुसार आश्रम में ही मिनी आईसीयू बनाया गया है। जिला प्रशासन ने सोमवार को आश्रम के आगे से गुजरने वाली सरकारी बसों व भारी वाहनों का रूट डायवर्ट कर दिया। एहतियात के तौर पर प्रशासन ने यह कदम उठाया।
जिला प्रशासन सोमवार को कड़े रुख में दिखाई दिया। प्रशासन ने सुबह ही बरवाला थाने में पैरामिलिट्री फोर्स और पुलिस कंपनियां भेज दी। पूरी फोर्स हांसी चौक स्थित थाने में बैठी रही। दोपहर बाद फैसला आने के बाद फोर्स वापस बुलाई गई। आश्रम के प्रवक्ता राजकपूर ने कहा कि हम कोर्ट का सम्मान करते हैं। यदि संत रामपाल 17 नवंबर तक ठीक हो जाते हैं तो कोर्ट में जरूर पेश होंगे। वे इस समय आईसीयू में हैं।