23 साल की एक एयरहोस्टेस, जिस उम्र में तमाम सपने पूरा करने के लिए युवा दिन रात एक करते हैं, उस उम्र में इस लड़की ने 360 लोगों के लिए अपनी जान खो दी।
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आपके लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि आखिर नीरजा भनोट कौन थीं और उन्होंने कैसे अपने साहस के दम पर सैकड़ों लोगों की जान बचा ली थी।
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नीरजा भनोट मुंबई में पैन ऍम एयरलाइन्स (Pan Am Airlines) की विमान परिचारिका थीं। उनका जन्म 7 सितंबर 1963 भारत के चढ़ीगढ़ में हुआ था। 5 सितंबर 1986 को मुंबई से न्यूयॉर्क जा रही पैनएम-73 फ्लाइट का अपहरण कर लिया गया था। उस उड़ान के दौरान नीरजा भी फ्लाइट में ही थीं और उनके साहस के कारण ही सैकड़ों लोगों की जान बची थी। हालांकि नीरजा खुद अपहृत विमान में यात्रियों की सहायता एवं सुरक्षा करते हुए आतंकवादियों की गोलियों का शिकार हो गईं थीं।
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इस बहादुरी के लिए भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत शान्ति काल के अपने सर्वोच्च वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया और साथ ही पाकिस्तान सरकार और अमरीकी सरकार ने भी उन्हें इस वीरता के लिए सम्मानित किया।
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नीरजा
उनके पिता मुंबई में पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत थे और नीरजा की प्रारंभिक शिक्षा चंडीगढ़ के सैक्रेड हार्ट सीनियर सेकेण्डरी स्कूल में हुई। बाद में उनकी शिक्षा मुम्बई के स्कोटिश स्कूल और सेंट ज़ेवियर्स कॉलेज में हुई।
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नीरजा
नीरजा की मौत जिस वक्त हुई तब वो मात्र 23 साल की थीं। इस तरह से वो यह पदक पाने वाली पहली महिला और सबसे कम उम्र की नागरिक बन गईं। पाकिस्तान सरकार की ओर से उन्हें तमगा-ए-इन्सानियत से नवाज़ा गया।
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5 सितंबर को हाईजेक हुआ प्लेन और नीरजा भनोट
मुंबई से न्यूयॉर्क के लिए रवाना पैन ऍम-73 को कराची में चार आतंकवादियों ने अपहृत कर लिया और सारे यात्रियों को बंधक बना लिया। नीरजा उस विमान में सीनियर पर्सर के तौप पर नियुक्त थीं और उन्हीं की तत्काल सूचना पर चालक दल के तीन सदस्य विमान के कॉकपिट से तुरंत सुरक्षित निकलने में कामयाब हो गए।
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सबसे सीनियर विमानकर्मी के रूप में यात्रियों की जिम्मेवारी नीरजा के ऊपर थी और जब 17 घंटों के बाद आतंकवादियों ने यात्रियों की हत्या शुरू कर दी और विमान में विस्फोटक लगाने शुरु किए तो नीरजा विमान का इमरजेंसी दरवाजा खोलने में कामयाब हुईं और यात्रियों को सुरक्षित निकलने का रास्ता मुहैय्या कराया।
वे चाहतीं तो दरवाजा खोलते ही खुद पहले कूदकर निकल सकती थीं किन्तु उन्होंने ऐसा न करके पहले यात्रियों को निकलने का प्रयास किया। इसी प्रयास में तीन बच्चों को निकालते हुए जब एक आतंकवादी ने बच्चों पर गोली चलानी चाही तो नीरजा बीच में आ गई और आतंकवादी की गोलियों की बौछार से नीरजा की मौत हो गई।