क्या आपको कश मारने की लत है? क्या आप काफी लंबे समय से धूम्रपान कर रहे हैं तो सावधान हो जाइए। ये जानलेवा बीमारी हो सकती है।
विज्ञापन
कश मारने की लत है, सावधान! ये जानलेवा बीमारी हो जाएगी
2 of 10
बात कर रहे हैं, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) की। ये एक साइलेंट किलर है जो सांस नली की सिकुड़न से शुरू होकर जान की दुश्मन बन जाती है। इस रोग में सांस नली में सिकुड़न व सूजन आ जाती है, जो फेफड़ों को स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त कर सकती है।
विज्ञापन
कश मारने की लत है, सावधान! ये जानलेवा बीमारी हो जाएगी
3 of 10
डॉक्टर एमएल अत्री बताते हैं कि 'सीओपीडी' के दो प्रकार हैं। पहला, क्रॉनिक ब्रॉन्काइटिस और दूसरा एमफीसीमा। क्रॉनिक ब्रॉन्काइटिस में सामान्यत: एक लंबे वक्त तक रोगी को खांसी व बलगम की शिकायत रहती है। वहीं, एमफीसीमा में एक अर्से के बाद रोगी के फेफड़े क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।
कश मारने की लत है, सावधान! ये जानलेवा बीमारी हो जाएगी
4 of 10
डॉक्टर एमएल अत्री बताते हैं कि इस रोग में सबसे पहले खांसी आती है। खांसी के साथ बलगम भी निकलता है। पीड़ित व्यक्ति की सांस फूलती है। इस स्थिति में मरीज अक्सर हांफने लगता है और समय के साथ यह स्थिति और बिगड़ती जाती है। और तो और, व्यायाम करने पर सांस कहीं अधिक उखड़ने लगती है।
विज्ञापन
कश मारने की लत है, सावधान! ये जानलेवा बीमारी हो जाएगी
5 of 10
डॉक्टर अत्री बताते हैं कि सांस फूलने की हर बीमारी सीओपीडी नहीं होती। इसमें उम्र सबसे अहम होती है। दोनों ही बीमारी फेफड़ों और सांस की नली से जुड़ी होती है। दोनों में बहुत कम अंतर होता है। इसे आसानी से पहचाना नहीं जा सकता है।
विज्ञापन
कश मारने की लत है, सावधान! ये जानलेवा बीमारी हो जाएगी
6 of 10
अस्थमा को सही ट्रीटमेंट की मदद से ठीक किया जा सकता है जबकि सीओपीडी में सांस की नली संकरी होने से ऑक्सीजन पास होने में दिक्कत होती है। अस्थमा का अटैक किसी भी चीज मसलन धूल, फंगस या खुशबू से हो सकता है। इसके उल्ट सीओपीडी 40 साल की उम्र के बाद ही बढ़ती है। इसे जांच के जरिए ही पहचाना जा सकता है।
विज्ञापन
कश मारने की लत है, सावधान! ये जानलेवा बीमारी हो जाएगी
7 of 10
डॉक्टर अत्री ने बताया कि ठंड के साथ दीपावली पर पटाखों के कारण होने वाला प्रदूषण भी इस बीमारी के बढ़ने का कारण है। ओपीडी में आने वाले नए मरीजों की संख्या जहां सामान्य दिनों में 10-12 होती है वहीं इन दिनों में यह संख्या 25 तक पहुंच जाती है।
कश मारने की लत है, सावधान! ये जानलेवा बीमारी हो जाएगी
8 of 10
'सीओपीडी' की गंभीर अवस्था कॉरपल्मोनेल की समस्या पैदा कर सकती है। इस स्थिति में हृदय पर दबाव पड़ता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि हृदय द्वारा फेफड़ों को रक्त की आपूर्ति करने में उसे अतिरिक्त परिश्रम करना पड़ता है। कॉरपल्मोनेल के लक्षणों में एक लक्षण पैरों और टखने में सूजन आना है।
कश मारने की लत है, सावधान! ये जानलेवा बीमारी हो जाएगी
9 of 10
डॉक्टर अत्री बताती हैं कि रोगग्रस्त होने से बेहतर है बचाव करना। 'सीओपीडी' से पीड़ित व्यक्तियों को डॉक्टर के परामर्श से हर साल इंफ्लूएन्जा की और न्यूमोकोकल (न्यूमोनिया से संबंधित) वैक्सीनें लगवानी चाहिए। धूम्रपान कर रहे व्यक्ति के करीब न रहें। धूल, धुएं और प्रदूषित माहौल से बचें। रसोईघर में गैस व धुएं की निकासी के लिए समुचित व्यवस्था होनी चाहिए।
कश मारने की लत है, सावधान! ये जानलेवा बीमारी हो जाएगी
10 of 10
डॉ. अत्री बताती हैं कि दुनियाभर में फैल रही तीसरी जानलेवा बीमारी है क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी)। यह फेफड़ों में होनी बाली एक आम बीमारी है और देश में करीब 15 मिलियन लोग सीओपीडी से जूझ रहे हैं।