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आतिशबाजी से निकले धुएं के 5 बड़े नुकसान, नहीं जानते होंगे आप

Mon, 24 Oct 2016 10:05 PM IST
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
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दीवाली पर आतिशबाजी
दीवाली की तैयारी चल रही है। खूब पटाखे फोड़े जाएंगे, लेकिन क्या आप आतिशबाजी से निकलने वाले धुएं के ये 5 बड़े नुकसान जानते हैं?
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दीवाली पर आतिशबाजी
आतिशबाजी के शौकीन इस बार कई सारे पटाखे फोड़ने का प्लान बना रहे हैं, लेकिन बहुत कम लोगों को पता होगा कि पटाखे के फूटने के साथ कई सारे केमिकल भी निकलते हैं। जैसे कि कॉपर, जिंक, लैड व मैग्नीशियम, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक होते हैं। इसके अलावा पटाखों के फोड़ने से जलने और चोट लगने का भी खतरा रहता है। आतिशबाजी से उठने वाला धुआं भी आंखों और सांस की बीमारियों को भी बढ़ावा देता है।
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दीवाली पर आतिशबाजी
कौन से केमिकल निकलते हैं और उनसे क्या खतरे
केमिकल-----स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव
कॉपर--------सांस लेने में दिक्कत
केडियम------एनिमया और किडनी फेल
लेड----------नर्वस सिस्टम पर असर

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दीवाली पर आतिशबाजी
ये कैमिकल भी निकलते हैं पटाखे से
मैग्नीशियम-----धूल से बुखार होने का खतरा
सोडियम-------स्किन को नुकसान पहुंचता है
जिंक----------उल्टी की दिक्कत बढ़ाता है
नाइट्रेट---------मानसिक बीमारियों का बढ़ावा
नाइट्रिट--------कोमा की संभावना
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दीवाली पर आतिशबाजी
पर्यावरण के लिए खतरनाकः पीजीआई के स्कूल आफ पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट इन्वायरमेंट विंग के एसोसिएट प्रोफेसर डा. रविंद्रा खैवाल के मुताबिक पटाखे स्वास्थ्य के लिए तो खतरनाक हैं ही, साथ ही पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाते हैं। कलरफुल आतिशबाजी के लिए भी कई खतरनाक केमिकल मिलाए जाते हैं।
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दीवाली पर आतिशबाजी
पटाखे फोड़ने के बाद उसमें सल्फर, नाइट्रोजन, अमोनिया, फास्टफेट सहित अन्य केमिकल निकलते हैं, जो पर्यावरण में घुलने के साथ नीचे आते हैं। इससे ग्राउंड वाटर भी प्रभावित होता है। पटाखों से निकला धुआं भी धुंध बढ़ाता है जो लंग्स से संबंधित बीमारियों के लिए खतरा होता है। इससे दीपावली के समय अस्थमा भी बढ़ता है। विशेषज्ञों के मुताबिक ग्रीन दीवाली मनाएं, एक भी पटाखा न फोड़ें।
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दीवाली पर आतिशबाजी
आतिशबाजी के दौरान उठाए ये कदमः लाइसेंसी दुकान से ही आतिशबाजी खरीदें। पटाखे फोड़ने से पहले उसमें लिखे दिशा-निर्देश पढ़ें। खुले स्थान पर पटाखे फोड़ें। ऊपर जाने वाले पटाखों को सावधानी से छोड़ें। पेरेंट्स या किसी बड़े व्यक्ति की मौजूदगी में बच्चे पटाखे छोड़ें। आतिशबाजी के दौरान काटन के कपड़े पहने। पैरों पर जूते या चप्पल जरूर होने चाहिए। जब कोई पटाखा न चले तो उसके पास जाने से पहले उसमें पानी डाल दें।

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दीवाली पर आतिशबाजी
ये उपाय भी करने चाहिएः बिना जले पटाखे का बारूद न जलाएं। इससे आग जल्दी पकड़ती है। नवजात बच्चों को कमरे के अंदर ही रखें। आतिशबाजी के दौरान पानी की दो बाल्टियां रखें। पालतू जानवर को ऐसी जगह पर रखें, जहां धमाकों की आवाज न सुनाई पड़े। उसे बार-बार पुचकारते रहें ताकि उसे लगे कि आप उसके आसपास हैं।

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दीवाली पर आतिशबाजी
आतिशबाजी करते समय क्या न करें: कभी भी डुप्लीकेट या स्ट्रीट वेंडर से पटाखे न खरीदें। जब भी पटाखे फोड़ रहे हों तो उस दौरान आसपास ज्वलनशील सामान न हो। भीड़भाड़ वाली जगह पर पटाखे न फोड़ें। ऊपर जाने वाले पटाखों को जमीन पर न छुड़ाए। आतिशबाजी के दौरान ढीले-ढाले कपड़े डालने से बचें। फेंक कर छुटाने वाले बमों को न फोड़े। सड़क पर तो बिल्कुल पटाखा न फोड़े।

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दीवाली पर आतिशबाजी
आंख पर चोट लगने या जलने पर क्या करें: आतिशबाजी के दौरान यदि किसी की आंख पर चोट लग जाए तो तुरंत जीएमसीएच 32, जीएमएसएच 16 या फिर पीजीआई आई सेंटर पहुंचना चाहिए। तीनों हास्पिटल में दीपावली के दौरान आंखों के लिए विशेष इमरजेंसी सेवाएं चालू रहती हैं। जलने की स्थिति में भी यही करना चाहिए। प्राथमिक उपचार के लिए जले हिस्से को पानी में भिगोएं और तब तक भिगोकर रखें जब तक जलन कम न हो।
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दीवाली पर आतिशबाजी
कहूंगा कि दीपावली के दिन भी पटाखे न फोड़ें। इससे न सिर्फ पर्यावरण को खतरा है बल्कि लोगों को भी नुकसान पहुंचता है। कई लोग जख्मी होते हैं। बम धमाकों से ध्वनि प्रदूषण काफी बढ़ जाता है। आतिशबाजी के दौरान कई केमिकल निकलते हैं, जिनके दूरगामी परिणाम देखने को मिलते हैं। आतिशबाजी के बाद काफी सारा कूड़ा भी इकट्ठा होता है, जो स्वच्छता अभियान के लिए रोड़ा बनता है।
- रविंद्रा खैवाल, एसोसिएट प्रोफेसर, इन्वायरमेंट विंग पीजीआई
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