दुनिया के सबसे ऊंचे लड़ाई के मैदान सियाचिन में शहीद हुए कर्नल मनु टंडन को नम आंखों के साथ अंतिम विदाई दी गई तो कोहराम मच गया, देखिए तस्वीरें।
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सियाचिन में शहीद हुए कर्नल मनु टंडन को अंतिम विदाई
करनाल के सेक्टर-9 निवासी कर्नल मनु टंडन का अंतिम संस्कार मॉडल टाउन श्मशान घाट में राजकीय सम्मान के साथ किया गया। मनु टंडन देश की सेवा करते हुए लद्दाख सियाचिन में शहीद हो गए हैं। मन्नू 47 वर्षीय कर्नल टंडन आर्मी डॉक्टर थे और उनकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई। बुधवार को जब उनका शव घर पहुंचा तो कोहराम मच गया।
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सियाचिन में शहीद हुए कर्नल मनु टंडन को अंतिम विदाई
हालांकि मनु की मौत के सही कारण पता नहीं चल पाए हैं, लेकिन उनके पिता पिता डॉ. कृष्ण लाल ने बताया कि मुझे सुबह लद्दाख से फोन आया कि यूनिट में सो रहे मनु टंडन को उठाया गया तो वे उठे नहीं। फिर जांच के बाद पता चला कि वे शहीद हो गए हैं। पिता का कहना है कि एक दिन पहले मेरी मन्नू से बात हुई थी, उसने कहा थी कि 15 जून को वे छुट्टी पर आएंगे।
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कर्नल के पिता ने बताया कि बेटे के घर आने की सूचना से पूरा परिवार खुश था, लेकिन अगले ही दिन ये खुशियां मातम में बदल गईं। मनु ने एमबीबीएस, एमडी करने के बाद भी देश सेवा के लिए आर्मी को ज्वाइन किया। पिछले बीस साल से वे आर्मी में थे। 6 माह से लद्दाख क्षेत्र में कार्यरत थे। अपने पीछे पत्नी डॉ. गीतांजलि, बेटी ऐशना और बरखा को छोड़कर गए हैं।
सियाचिन में शहीद हुए कर्नल मनु टंडन को अंतिम विदाई
एनडीआरआई करनाल से रिटायर्ड प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. हरिकृष्ण लाल ने बताया कि उनका बेटा हमेशा देश सेवा के लिए आगे रहा है। मनु टंडन देश सेवा में ही विश्वास रखते थे और खुले विचारों के थे। वे अक्सर अपनी दोनों बेटियों को कहते थे कि वे अपने जीवन में कुछ भी बने व कोई भी काम करें, लेकिन उसमें देश सेवा होनी चाहिए। क्योंकि देश सेवा से बढ़कर कोई सेवा नहीं है और जो सुकून देश सेवा करके मिलता है।