शिवानी बताती हैं कि उमंग कुमार निर्देशित सरबजीत फिल्म के कई सीन में ऐश्वर्या राय ने उन्हें गाइड किया है। हर सीन को वह जीवंत बनाने की पूरी कोशिश करती थी। वह काफी सहज हैं। शूटिंग के दौरान उन्होंने थोड़ी जाहिर नहीं होने दिया कि वह इतनी बड़ी अदाकारा हैं। फिल्म के सेट पर जाने के बाद जब ऐश्वर्या राय बच्चन से मिली तो उनकी प्रेरणा से फिल्म में एक्टिंग का सफर और आसान हो गया।
शिवानी का कहना है कि सरबजीत सिंह की जिंदगी पर आधरित फिल्म में बड़ी बेटी का किरदार पाने के लिए ऑडिशन के दौरान अपने आप को साबित करना ही चाइलेंजिंग था। क्योंकि इसमें गांव की लड़की की तरह बोल चाल से लेकर हुलिया तक बदलना पड़ा। जब सरबीत की बड़ी बेटी का रोल मिला तो ये किरदार और ज्यादा चाइलेंजिंग हो गया।
शिवानी ने बताया कि ये रोल मेरे लिए काफी चाइलेंजिंग था। सरबजीत फिल्म की शुटिंग के एक माह पहले फिल्म का स्क्रिप्ट मिला। पहले तो फिल्म का डायलॉग याद किया। उसके बाद एक्टिंग को दमदार बनाने के लिए अपने दोस्त हरमनप्रित सिंह साहनी की मदद ली। जब भी एक्टिंग शुरू करती तो इमोशन, एक्प्रेसन जैसे कमियों को बताते थे, धीरे धीरे एक्रिप्ट के मुताबिक अपना सीन तैयार कर लिया। उन्होंने ने ही ऑडिशन के दौरान मेरा वीडियो शूट किया था।
शिवानी बताती हैं कि सबसे बड़ी बात ये है कि रियल स्टोरी होने की वजह से एक्टिंग में और ज्यादा मजा आया। इंटव्यू से सीन किरदार को मिला सही इमोशन अपने किरदार को निभाने के लिए सरबीत से जुड़े वीडियो और इंटरव्यू देखती थी। जब वीडियो देखती थी तो आंखों से आंसू निकल आते थे। इन्हीं वीडियो और इंटरव्यू की मदद से अपने किरदार में इमोशन भरा और अपने किरदार को जीवंत बनाया।
शिवानी बताती हैं कि ऋचा चड्ढा जो सरबजीत की पत्नी की भूमिका निभा रही हैं, उन्हें भी उन्होंने कई सीन में गाइड किया है। पाकिस्तान की कोट लखपत जेल में मई 2013 में दम तोडने वाले सरबजीत सिंह पर बनी ये फिल्म 20 मई को रिलीज होगी। इस फिल्म में रणदीप हुडा सरबजीत के किरदार में हैं।
शिवानी सैनी चंडीगढ़ की बेटी हैं। यह शिवानी की पहली हिंदी डेब्यू फिल्म है। इससे पहले उन्होंने पंजाबी फिल्म में काम किया है। इस फिल्म शिवानी का किरदार इंटरवल से 15 -20 मिनट पहले शुरू होता है। फिल्म के लास्ट तक करीब 55 सीन फिल्म शिवानी पर फिल्माए गए हैं। शिवानी ने बताया कि ये फिल्म बिल्कुल रियल है, लेकिन 23 साल के सरबजीत के सफर को दो से ढ़ाई घंटे के फिल्म में समेटना मुश्किल था। इसलिए मुख्य घटनाएं ही ली गई हैं।