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मालगाड़ी से हादसा होता तो धमाके से उड़ जाती शताब्दी

Sun, 08 Nov 2015 08:36 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल(हरियाणा)
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रेलवे ट्रैक पर सबसे तेज दौड़ने वाली शताब्दी एक्सप्रेस अगर आज मालगाड़ी से भिड़ जाती तो हजारों जानें चली जातीं। जानिए क्या है माजरा? सभी फोटो और रिपोर्टः सोमदत्त शर्मा, करनाल
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मालगाड़ी से हादसा होता तो धमाके से उड़ जाती शताब्दी

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हुआ यूं कि आज करनाल रेलवे लाइन पर कालका शताब्दी एक्सप्रेस और एक मालगाड़ी एक ही ट्रैक पर आमने-सामने हो गई। शताब्दी के चालक ने सूझबूझ का परिचय देते हुए एकदम एमरजेंसी ब्रेक लगाकर गाड़ी को रोका।
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गनीमत रही कि ट्रैक पर गाड़ी का सिगनल न होने से मालगाड़ी आउटर पर खड़ी हुई थी। शताब्दी के रूकने तक दोनों गाडिय़ों के बीच महज तीन सौ गज का ही फासला रहा। वरना बड़ा हादसा हो सकता था।

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इस तरह दो ट्रेनों के ट्रैक पर आमने-सामने हो जाने से हड़कंप मच गया। जैसे ही यात्रियों को यह जानकारी मिली तो उनकी सांसें फूल गई और वे गाड़ी ने नीचे उतरे। आनन-फानन में रेलवे अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे और ‌स्थिति को संभाला।
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शताब्दी को ट्रैक पर पीछे करके करीब पौने की घंटे तक कांटे की मरम्मत करने के बाद दिल्ली की ओर रवाना किया गया। वहीं, रेवले ने मामले की जांच शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि इलेक्ट्रॉनिक कांटे में खराबी के चलते यह घटना घटी।
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करनाल रेलवे स्टेशन अधीक्षक वीरेंद्र ठाकुर का कहना है कि कांटे में खराबी आने के कारणों की जांच की जा रही है। विभाग के उच्चाधिकारियों को भी मामले से अवगत करा दिया गया है। जांच के दौरान में मामले में जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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वीरेंद्र ठाकुर ने बताया कि हादसा बड़ा हो सकता था, लेकिन शताब्दी के चालक ने जैसे ही गाड़ी को डॉउन की ट्रेक की बजाए अब ट्रेक पर जाता देखा तो स्थिति को भांपकर उसी समय अमरजेंसी ब्रेक लगा दिए। अगर चालक लापरवाही करता तो हजारों जानें जातीं, लेकिन उसने बहादुरी का काम किया।

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रेलवे अधिकारियों के मुताबिक रेलवे लाइनों पर ऑयलिंग का काम भी चल रहा है। कर्मियों ने सुबह ही उस कांटे की आयलिंग की। उस समय तक सब कुछ ठीक था, लेकिन दोपहर बाद कांटे में खराबी आने से कांटा नहीं बदला गया। हालांकि कांटा बदलने का सारा काम कंप्यूटर तकनीक पर आधारित होने के बाद कांटे न बदलने जाने का सिगनल स्टेशन मास्टर को नहीं मिला। 
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वहीं, कालका शताब्दी का करनाल स्टॉप होने से भी हादसा टल गया। यदि शताब्दी का करनाल स्टेशन पर स्टॉप न होता तो इस हादसे से बचने का कोई भी उपाय नहीं था। 120 किलोमीटर की स्पीड से चलने वाली शताब्दी ट्रेन को रूकने के लिए कम से कम पांच सौ मीटर का फासला एक एक मिनट का समय होना जरुरी है।
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