डॉक्टरों की एक टीम मरीज का ऑपरेशन कर रही थी कि उसके पेट में ऐसी चीज नजर आई, देखकर उनके होश उड़ गए। फिर क्या हुआ, जानिए।
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पेट में छोड़ दी कैंची
डॉक्टरों की टीम को मरीज के पेट में कैंची मिली, जो पहले हुए एक ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने छोड़ दी थी। मामला पंचकूला का मई 2017 का है, लेकिन पेट में कैंची छोड़ने वाले डॉक्टरों पर अब जाकर केस दर्ज हुआ है। पिंजौर थाने में पंचकूला के जनरल अस्पताल के डॉक्टर्स के बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर तीन डॉक्टरों के खिलाफ लापरवाही बरतने का मामला दर्ज किया गया है।
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पेट में छोड़ दी कैंची
कालका के टिपरा गांव निवासी हेमंत कुमार ने शिकायत में बताया था कि उसके पिता कर्मचंद के पित्ते में पथरी थी। उनका 27 मई को शौरी अस्पताल में ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन डॉ. विमल शौरी, डॉ. संगीता शौरी व डॉ. अश्वनी ने किया था। ऑपरेशन के दौरान ही कर्मचंद को हेवी ब्लीडिंग शुरू हो गई, जिसके चलते उसे पीजीआई रेफर किया गया, लेकिन वहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
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पेट में छोड़ दी कैंची
हेमंत ने आरोप लगाया है कि पीजीआई के डॉक्टर्स ने जब उसके पिता का ऑपरेशन किया तो पता चला कि शौरी अस्पताल के डॉक्टर्स ने ऑपरेशन के दौरान गलत नसें काट दी। उनके जख्म को खुला छोड़ दिया गया। यहां तक की कैंची भी उनके पेट में छोड़ दिया गया। इसके चलते इन्फेक्शन फैल गया और ब्लीडिंग हो गई। इन सभी कारणों से उनकी जान चली गई।
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operation
हेमंत की शिकायत पर सेक्टर-6 स्थित जनरल अस्पताल पंचकूला में डॉक्टरों का एक बोर्ड बनाया गया। बोर्ड ने जांच की और डॉ. शौरी को भी बुलाया गया। इसके बाद बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर पिंजौर पुलिस थाने में शौरी अस्पताल के तीन डॉक्टर्स डॉ. विमल शौरी, डॉ. संगीता शौरी व डॉ. अश्वनी के खिलाफ लापरवाही बरतने का मामला दर्ज किया है।
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doctor
मुझे जनरल अस्पताल के डॉक्टर्स ने बुलाया था। मैंने बता दिया कि ऑपरेशन के दौरान ब्लीडिंग अचानक ज्यादा होने लगी थी, जिसके चलते उसे रेफर किया गया। मैं जितना कर सकता था, मैंने किया। कैंची इसलिए अंदर छोड़ी ताकि किसी तरीके से प्रेशर देकर, बांधकर ब्लीडिंग को रोका जा सके। कर्मचंद तीन दिन तक पीजीआई में ठीक भी रहा। वहां भी डॉक्टरों ने उसका ऑपरेशन किया। शायद वहां के डॉक्टर्स के इलाज में कुछ कमी रही हो। हमारी कोई गलती नहीं है।
-डॉ. विमल शौरी
शौरी अस्पताल के डॉ. विमल शौरी, डॉ. संगीता शौरी व डॉ. अश्वनी के खिलाफ आईपीसी की धारा 304ए के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह केस जनरल अस्पताल के डॉक्टर्स के बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर दर्ज किया गया है।
- सुखबीर सिंह, एसएचओ पिंजौर