सरयू-यमुना एक्सप्रेस (14649) बर्निंग ट्रेन बन गई थी। आग इतनी भयानक थी कि लोग चींखने-चिल्लाने लगे, उतरकर इधर उधर भागने लगे। कई जिंदगियां बाल-बाल बच गईं, देखिए तस्वीरें।
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बर्निंग ट्रेन
- फोटो : अमर उजाला
सरयू-यमुना एक्सप्रेस ट्रेन अपने निर्धारित समय पर जालंधर रेलवे स्टेशन पर पहुंच गई थी। जैसे ही ट्रेन करतारपुर के लिए रवाना हुई तो रास्ते में सूरानुस्सी के पास ट्रेन के एस-2 कोच से धुआं उठने लगा। डिब्बे में सो रहे यात्री हड़बड़ाहट में उठे और शोर मचाने लगे। ट्रेन रात 10.30 बजे करतारपुर स्टेशन पर रुकी तो यात्रियों की चीखें चिल्लाने की आवाजें आईं।
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बर्निंग ट्रेन
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शोर शराबा सुनकर रेलवे मुलाजिम दौड़े आए और डिब्बों में लगी आग को देखा। वे तुरतं हरकत में आए और आग को पानी की बाल्टियों से बुझाने का प्रयास किया, मगर आग बहुत फैल चुकी थी। फायर ब्रिगेड भी मौके पर पहुंची, लेकिन कई घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। आग की लपटें इतनी ऊंची थी कि प्लेटफार्म की छत तक जल गई।
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बर्निंग ट्रेन
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दरअसल, डिब्बों में आग लगने की जानकारी ट्रेन ड्राइवर और गार्ड को भी नहीं थी। अगर ट्रेन का स्टॉपेज करतारपुर स्टेशन पर न होता तो बड़ा हादसा हो सकता था। जांच में यह बात सामने आई है। वहीं जालंधर रेलवे स्टेशन से करतारपुर स्टेशन तक के रास्ते में कई फाटक पड़ते हैं, लेकिन किसी भी गेट मेन ने ट्रेन में लगी आग को नहीं देखा।
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जीआरपी जालंधर थाना के प्रभारी धर्मेंद्र कल्याण ने कहा कि ट्रेन में लगी आग को लेकर अभी तक कोई केस दर्ज नहीं किया गया है। यात्रियों के बयान भी दर्ज किए गए। कहीं कोई यात्री ज्वलनशील पदार्थ तो नहीं लेकर जा रहा था, इसकी जांच पड़ताल भी गई। फोरेंसिक टीम की रिपोर्ट आने के बाद ही अगली कार्रवाई हो पाएगी। वहीं रेलवे हादसे को शार्ट सर्किट मानकर जांच कर रहा है।
फिरोजपुर मंडल के डीआरएम राजेश अग्रवाल ने कहा कि ट्रेन में लगी आग की घटना के बाद मंडल के महाप्रबंधक (जीएम) टीपी सिंह ने तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है, जो जल्द ही जालंधर आकर पूरे मामले की जांच करेगी। आग किन कारणों से लगी, इसकी जांच होगी। फिलहाल फोरेंसिक टीम ने अपनी जांच शुरू करके जले हुए डिब्बों से मिली वस्तुओं को सील कर चंडीगढ़ में भेज दिया है।