हम बात कर रहे हैं, पंचकूला निवासी आनंद प्रकाश(74) की, जिन्होंने रुचिका गिरहोत्रा की मौत का कारण बने पूर्व डीजीपी एसपीएस राठौर को सलाखों के पीछे पहुंचाया। वीरवार रात करीब 11.45 बजे पंचकूला के सिविल अस्पताल में उनकी मौत हो गई। वे प्रोस्टेट कैंसर से ग्रस्त थे और आखिरी सांस तक बीमारी से लड़ते रहे, लेकिन हिम्मत नहीं छोड़ी।
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आनंद प्रकाश
आनंद प्रकाश पिछले डेढ़ साल से कैंसर से पीड़ित थे और उनका चंडीगढ़ पीजीआई में इलाज चल रहा था। आनंद प्रकाश रुचिका की दोस्त अराधना के पिता थे। अराधना ने रुचिका मामले में गवाही भी दी थी। अब अराधना ने भी पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए लड़कियों पर होने वाले किसी भी तरह के अत्याचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने की ठान ली है। आनंद प्रकाश की बड़ी बेटी अनुराधिका अमेरिका में रहती हैं।
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रुचिका गिरहोत्रा
मामला 1993 का है। तब पूर्व डीजीपी राठौर आईजी हुआ करते थे। रुचिका ने इनपर यौन शोषण का आरोप लगा खुदकुशी कर ली थी। रुचिका गिरहोत्रा हरियाणा की बहुचर्चित उभरती हुई 14 साल की महिला टेनिस खिलाड़ी थी, जोकि पंचकूला की रहने वाली थीं। 1990 में तत्कालीन आईजी एसपीएस राठौर जो हरियाणा टेनिस असोसिएशन के अध्यक्ष भी थे, पर रुचिका ने छेड़छाड़ का आरोप लगाया था।
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रुचिका गिरहोत्रा
रुचिका ने मामले में शिकायत करने पर उसे स्कूल से निकाल दिया गया था। साथ ही रुचिका के परिवार ने राठौड़ के कहने पर हरियाणा पुलिस द्वारा परेशान करने की बात कही थी। इसी सदमे के चलते 28 दिसंबर, 1993 को रुचिका ने जहर खाकर खुदकुशी कर ली थी। घटना के 16 साल के बाद 22 दिसंबर 2009 को चंडीगढ़ कोर्ट ने राठौर को धारा 354 आईपीसी (छेड़छाड़) के तहत दोषी करार देते हुए छह माह कैद और 1,000 रुपये जुर्माना की सजा सुनाई थी।
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रुचिका गिरहोत्रा
सीबीआई ने सजा बढ़ाने की अपील की तो हाईकोर्ट ने इसे बढ़ाकर 18 महीने कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के पूर्व डीजीपी एसपीएस राठौड़ की सजा को बरकरार रखा है, लेकिन उन्हें जेल नहीं जाना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सजा को बरकरार रखते हुए टिप्पणी की है कि उन्हें जेल नहीं जाना होगा, वे जो जेल काट चुके हैं वह काफी है। रुचिका के साथ जो कुछ हुआ, उसकी इकलौती चश्मदीद रुचिका की दोस्त अराधना गुप्ता है।
अराधना ऑस्ट्रेलिया से भारत सिर्फ इसलिए लौटीं ताकि वो अपनी मरहूम दोस्त को इंसाफ दिला सके। रुचिका के परिजनों को इंसाफ के लिए काफी साल तक इंतजार करना पड़ा। मामले को अराधना के पिता आनंद प्रकाश ने नतीजे तक पहुंचाया था। मामले को आनंद प्रकाश व उनकी पत्नी मधु प्रकाश ने लगातार उठाया और वर्षों तक अदालत में न्याय की लड़ाई लड़ी।