जींद के गांव ईंटल कलां में तालाब की खुदाई चल रही थी। इस बीच कुछ ऐसा निकलकर सामने आया कि देखकर सभी की आंखें खुली रह गईं। देखिए तस्वीरें।
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तालाब की खुदाई के दौरान मिले अवशेष
- फोटो : अमर उजाला
दरअसल, खुदाई के दौरान 10 फीट नीचे ईंटों से बनी एक दीवार निकली। दीवार में लगी ईंटें का अनुपात हड़प्पनकालीन ईंटों के अनुपात 1:2:4 से भी बड़ी है। इसे ऋग्वैदिक कालीन अवशेष माना जा रहा है। इसकी खबर मिलते ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के पूर्व निदेशक और सरस्वती हैरिटेज पर काम कर रहे डा. धर्मवीर शर्मा मौके पर पहुंचे और जांच की।
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तालाब की खुदाई के दौरान मिले अवशेष
- फोटो : अमर उजाला
धर्मवीर शर्मा ने यहां वीरवार को बताया कि दीवार में लगी ईंटों को देखकर कहा कि ये ईंटें हड़प्पनकाल से भी चार हजार साल पुरानी हो सकती हैं। इस स्थान पर मिली ईंटों पर तीन रेखाओं के निशान है। इन्हें ‘लोकतिहरे’ कहा जाता था और यह तीन लोकों का प्रतीक माने जाते हैं। ये विशिष्ट संस्कारों, आयोजनों यज्ञों, हवनों इत्यादि के समापन के समय पूजा-अर्चना के लिए बनाए जाते थे।
तालाब की खुदाई के दौरान मिले अवशेष
- फोटो : अमर उजाला
इतिहास संकलन समिति अध्यक्ष और सेवानिवृत्त प्रोफेसर बीबी कौशिक ने बताया कि तालाब की बनावट और इन दीवारों की स्थिति से प्रतीत होता है कि तालाब संभवतया धार्मिक आयोजनों के लिए बनाया गया था। यहां पानी के आगमन और अधिक पानी के निगमन के लिए व्यवस्था थी। इस मौके पर प्रो. डीएस हुड्डा, डा. ओपी गुप्ता आदि मौजूद रहे।