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पिता ने थमाई थी हॉकी, जुनून ने बनाया दुनिया का सितारा, पढ़ें- दिग्गज खिलाड़ी बलबीर सिंह की अनसुनी बातें

Tue, 26 May 2020 01:28 PM IST
ajay kumar अरविंद बाजपेयी, अमर उजाला, जीरकपुर (पंजाब)
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बलबीर सिंह सीनियर - फोटो : फाइल फोटो
प्रिंसिपल साहब... हॉकी मैच का फैसला 90 मिनट में होता है। 90 मिनट में फैसला नहीं हुआ तो टाई ब्रेकर, और टाई ब्रेकर में भी चुके तो... गोल्डन गोल, यानी खेलते जाओ... और खेलते जाओ, जैसे ही गोल्डन गोल हुआ तो खेल खत्म हुआ। अब मेरे जीवन का भी गोल्डन गोल पीरियड ही चल रहा है। पता नहीं कब गोल्डन गोल हो जाए और खेल खत्म हो जाए। करीब 96 वर्ष की उम्र में पिछले दिनों हॉकी ओलंपियन बलबीर सिंह सीनियर के साथ बातचीत के दौरान उनकी ओर से कहे गए यह शब्द स्पोर्ट्स एक्सपर्ट प्रिंसिपल सरवन सिंह नहीं भूले।
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प्रिंसिपल सरवन सिंह ने कहा कि सीनियर के तो सिरहाने हॉकी, हाथ में हॉकी और जुबां पर भी हॉकी ही रहती थी, मानो हॉकी उनकी प्रेमिका थी। हॉकी खेल जगत में एक अनूठा इतिहास रचने वाले बलबीर सिंह सीनियर दूसरों से इसी वजह से जुदा थे। वह हमेशा स्पोर्ट्स पर ही अपना ध्यान केंद्रित रखते थे। शहीद भगत सिंह नगर में मुकंदपुर गांव के रहने वाले प्रिंसिपल सरवन सिंह ने बताया कि वर्ष 1975 में हॉकी का वर्ल्ड कप खेला गया था। बलबीर सिंह सीनियर भारतीय टीम के कोच थे।
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उनकी बायोग्राफी लिखने वाले प्रिंसिपल सरवन सिंह ने बताया कि वर्ल्ड कप के लिए भारतीय हॉकी टीम का कैंप चंडीगढ़ में लगा हुआ था। इसी दौरान बलबीर सिंह सीनियर के पिता का निधन हो गया। उन्होंने कैंप से एक दिन की छुट्टी ली। इसके बाद टीम को लेकर वर्ल्ड कप के लिए चले गए।जब वापस लौटे तो उन्होंने अपने स्वर्गीय पिता के लिए अखंड पाठ करवाया। सरवन सिंह ने बताया कि हालैंड के खिलाफ बलबीर सिंह सीनियर ने 5 गोल करने का जो रिकॉर्ड कायम किया था उसको कोई नहीं तोड़ सका।

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बलबीर सिंह - फोटो : social Media
प्रिंसिपल सरवन सिंह ने बताया कि 950 पेज की बायोग्राफी में इस महान व्यक्तित्व का समाना आसान नहीं था। वर्ष 2012 में एशिया से दो आईकोनिक ओलंपियन चुने गए थे। इनमें से एक बलबीर सिंह सीनियर रहे हैं। बायोग्राफी की शुरुआत में ही लिखा है कि जब पिता से बलबीर सिंह सीनियर को हॉकी का खिलौना दिया गया तो वह उसमें ऐसा रम गए कि उनका पूरा जीवन ही हॉकी को समर्पित हो गया।
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बलबीर सिंह - फोटो : ट्विटर
प्रिंसिपल सरवन सिंह ने बताया कि बलबीर सिंह सीनियर जब विदेश में जाते थे तो वहां भी मैदानों में विजिट कर हॉकी का प्रचार करते थे। चूंकि वह स्पोर्ट्स पर काम करते थे तो कई बार उनसे मुलाकात हो जाती थी। इसी मुलाकात के दौरान उन्होंने जाना कि बलबीर सिंह सीनियर कहीं भी किसी हॉकी खिलाड़ी को प्रैक्टिस करते देखते थे तो उसका हौसला जरूर बढ़ाते थे। सिर्फ इतना ही नहीं, उनको खिलाड़ियों से बहुत ज्यादा प्यार था।
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