एक प्रोग्राम की प्रमोशन के सिलसिले में चंडीगढ़ आए एक्टर, डायरेक्टर और प्रोड्यूसर धीरज कुमार ने बताया कि अगर आपमें टैलेंट है तो आपको आगे आने से कोई नहीं रोक सकता। अब तो गॉड फादर भी टैलेंट के आधार पर बनते हैं, इसलिए आप में टैलेंट होगा तो आपको कोई भी पीछे नहीं कर सकता।
रोटी कपड़ा और मकान, क्रांति जैसी फिल्मों से नाम कमाने वाले धीरज कुमार 1970 से 1984 तक पंजाबी की 21 फिल्मों में काम कर चुके हैं। पीटीसी की और से उन्हें लाइफ चाइम एचीवमेंट अवार्ड भी मिल चुका है, जोकि अनुपम खेर ने दिया था। मनोज कुमार को वे अपना गुरु मानते हैं।
धीरज कुमार कहते हैं कि संबंधों की बुनियाद के ऊपर आप स्टार नहीं बन सकते। न ही यह सोचकर कि मैं बड़े स्टार का बेटा हूं तो स्टार बन जाऊंगा। आज के युवा आर्टिस्ट कम समय में जल्दी फेमस होना चाहते हैं। ऐसे बहुत से यंग आर्टिस्ट हुए भी हैं जिन्होंने अपनी मेहनत और हुनर के दम पर नाम कमाया है।
धीरज कुमार मानते हैं कि टीवी सीरियल इंडस्ट्री भी एक फैशन की तरह है। जैसे कभी टाइट जीन्स का फैशन आ जाता है तो कभी वेल बॉटम का। फैशन के साथ हम सब बदलते हैं। उसी तरह एक प्रोड्यूसर को भी लोगों की रूचि मुताबिक बदलना पड़ता है। पहले धार्मिक कार्यक्रम चलते थे, अब सामाजिक चलते हैं।
धीरज कुमार ने बताया कि 1990 में मेरी पत्नी यूवि कोचर जोकि पारसी हैं, उन्होंने मुझे भगवान शिव पर सीरियल बनाने के लिए कहा, फिर हमने उस पर काम करना शुरू किया और छह साल कढ़ी मेहनत करने के बाद 1996 में ओम नम: शिवाय नाम से उसका प्रसारण हुआ और उसे बनाने में छह साल लगे।