स्टेज पर जब अनुपम खेर की जुबान लड़खड़ाने लगी तो कहने लगे की आज भी मैं किरण जी के सामने आता हूं तो मैं नर्वस हो जाता हूँ। पढ़िए ऐसे ही उनके Life एक्सपीरियंस...
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पीयू में एलुमनी मीट के दौरान लॉ ऑडिटोरियम में सांसद खेर और उनके पति
- फोटो : अमर उजाला
‘मुझे यहां बुलाने में 42 साल लगा दिए। शायद मुझे पद्म भूषण मिलने का या फिर मेरी पत्नी के सांसद बनने का इंतजार किया जा रहा था।’ यह बातें जाने माने फिल्म अभिनेता पद्म भूषण अनुपम खेर ने शनिवार को पीयू में आयोजित एलुमनी मीट के दौरान लॉ ऑडिटोरियम में कही। दरअसल पीयू में बलवंत गार्गी सेंटेनरी सेलिब्रेशन के तहत वह और सांसद किरण खेर पीयू परिसर पहुंचे थे, जहां उन्होंने छात्रों से बलवंत गार्गी और अपनी जिंदगी से जुड़ी बातों को साझा किया।
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पीयू में एलुमनी मीट के दौरान लॉ ऑडिटोरियम में सांसद खेर और उनके पति
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अनुपम खेर बताते हैं कि मेरी जिंदगी की फिलॉसफी इसी में है कि जिंदगी में कभी भी कुछ भी हो सकता है। ऐसा नहीं है कि जो हमने सोचा हो वो ही हमारे साथ हो कई बार जो हमने सोचा भी नहीं होता है वो भी हमारे साथ हो जाता है। बीए में मेरे 38 प्रतिशत नंबर आए थे। इसके बाद मैं एमए करना चाहता था 27 जुलाई 1974 को मैं शिमला से पीयू आ गया और थिएटर से जुड़ा। कभी सोचा भी नहीं था कि बीए में 38 प्रतिशत लाने वाला इंडियन थिएटर डिपार्टमेंट से गोल्ड मेडल लेकर निकलेगा।
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पीयू में एलुमनी मीट के दौरान लॉ ऑडिटोरियम में सांसद खेर और उनके पति
अनुपम खेर ने कहा कि आज मैं जिस मुकाम पर हूं वो बलवंत गार्गी जी की वजह से ही है। उनसे मुझे एक्टिंग, पेंटिंग, साहित्य सब कुछ सीखने को मिला। मैंने डेढ़ साल उनके घर पर रहकर जिंदगी के बारे में, थिएटर के बारे में और सिनेमा के बारे में इतना कुछ सीखा कि मैं अपने आप को उस डेढ़ साल के नजरिए से अपने आप को धनी समझता हूं। सफलता और असफलता के सवाल पर जवाब देते हुए अनुपम खेर ने कहा कि इंसान को कभी असफलता से घबराना नहीं चाहिए। एक इवेंट फेल हो सकता है, लेकिन इंसान नहीं। असफलता का खौफ कल्पना के जैसा होता है। असफलता ही इंसान की सफलता की पहली सीढ़ी होती है।
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पीयू में एलुमनी मीट के दौरान लॉ ऑडिटोरियम में सांसद खेर और उनके पति
अनुपम बताते हैं कि उनको दोस्त ने बताया कि पीयू में इंडियन थिएटर डिपार्टमेंट में ऑडिशन है और सेलेक्ट होने वाले को 200 रुपए भी मिलेंगे तो मैंने सोचा क्यों न मुझे भी जाना चाहिए, लेकिन घर के हालात इतने ठीक नहीं थे। मेरे पास बस में जाने का किराया नहीं था तो मां के मंदिर से 100 रुपये चुराकर चंडीगढ़ आया। ऑडिशन में मैंने कुछ अलग किया ताकि मैं सेलेक्ट हो जाऊं। लेकिन जब ऑडिशन खत्म होने के बाद गार्गी जी ने बहुत मुँह बनाया मैंने सोचा इनका नेचर ही ऐसा होगा।
मुझे लगा खुश होंगे मेरे अलग करने पर लेकिन उन्होंने मुझे कहा वैरी बेड। बस इसके बाद मैं घर चला गया और वहां जाकर देखा तो मां ने पुलिस बुलाई थी 100 रुपये चोरी होने के कारण। कुछ समय बीत जाने पर पापा ने मुझसे पूछा की उस दिन तुम कहां गए थे और मैंने सब बता दिया। पापा ने मां को कहा अनुपम को 200 रुपये मिलेंगे। उनमें से 100 रुपये जो चुराया है उसमें से ले लेना।
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पीयू में एलुमनी मीट के दौरान लॉ ऑडिटोरियम में सांसद खेर और उनके पति
अनुपम स्टेज पर थे तो बीच में उनकी जुबान लड़खड़ाने लगी तो कहने लगे की आज भी मैं किरण जी के सामने आता हूं तो मैं नर्वस हो जाता हूँ। वैसे जब भी किरण स्टेज पर होती है तो मैं स्टेज के नीचे ही होता हूँ। पंजाब यूनिवर्सिटी एलुमिनी मीट के दूसरे सेशन में पद्म भूषण अनुपम खेर और सांसद किरण खेर ने अपनी जिदंगी से जुड़ी कुछ बातों को साझा किया। बलवंत गार्गी के बारे में बात करते हुए अनुपम खेर ने बताया कि उन्होंने बलवंत गार्गी से यह सीखा कि इंसान को कभी भी जिंदगी में सीरियस नहीं होना चाहिए। जिंदगी को एक कॉमेडी की तरह जीना चाहिए ।
पीयू में एलुमनी मीट के दौरान लॉ ऑडिटोरियम में सांसद खेर और उनके पति
सांसद किरण खेर ने चंडीगढ़ की खूबसूरती के बारे में बात करते हुए बताया कि चंडीगढ़ खूबसूरत तो है ही साथ ही में यहां पर ट्रैफिक की समस्या मुंबई से बहुत कम है। मुंबई में अब बहुत ज्यादा भीड़ हो गई है। मुंबई से चंडीगढ़ बसने का विचार 7 साल पहले ही आ गया था। यहां पर आकर मुझे शांति मिलती है और लगता है कि अपने घर वापस आ गई हूं। वही अनुपम खेर ने शिमला में रहने की इच्छा जताई।