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GST के जाल में उलझे देश के कारोबारी, इस वजह से झेलना पड़ा रहा नुकसान

Tue, 01 Aug 2017 09:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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GST impact
जब से जीएसटी लागू हुआ है, देश भर के कारोबारियों के लिए मुसीबतों का दौर शुरू हो गया है। कारोबारियों को काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है और इसकी वजह है ये फॉर्म।
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GST BILL
दरअसल, हमेशा की तरह पंजाब से भूटान और नेपाल जा रहा माल दस्तावेज न होने के कारण कस्टम अधिकारियों ने सीमा पर ही रोक लिया है। पंजाब से बड़ी संख्या में लुधियाना, जालंधर व अन्य जिलों के कारोबारी अपना माल नेपाल व भूटान भेजते रहे हैं। एक जुलाई को जीएसटी लागू होने से पहले उसमें कोई रुकावट नहीं आती थी। निर्यात पर कोई टैक्स है नहीं। व्यापारियों को सिर्फ फॉर्म एच भरकर देना होता था। उसके बाद उनका माल दोनों देशों को चला जाता था।
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जीएसटी
हमेशा की तरह कारोबारियों ने अपना माल भेजा तो शुक्रवार को सीमा पर मौजूद कस्टम अधिकारियों ने उनसे दस्तावेज मांगे, जोकि नहीं थे। इसके बाद माल नेपाल व भूटान जाने की इजाजत नहीं दी गई। इंडस्ट्रियल एंड ट्रेडर्स ज्वाइंट एक्शन कमेटी के कनवीनर गुरशरन सिंह ने कहा कि उन्होंने जीएसटी से जुड़े अधिकारियों से बात की है। उनका कहना है कि कारोबारियों को पहले एक बॉन्ड भरना होगा। इसके बाद उनके दस्तावेज बन जाएंगे।

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GST BILL
गुरशरन सिंह ने कहा कि इन दस्तावेज को दिखाकर ही उनका माल बाहर जा सकेगा, लेकिन इसमें वक्त लगेगा। इसलिए तब तक माल सीमा पर ही रुका रहेगा। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में गोरखपुर जिले के पास स्थित नेपाल सीमा और असम में गुवाहाटी से आगे भूटान सीमा पर करीब डेढ़-डेढ़ सौ ट्रक खड़े हैं। इनमें पंजाब के करीब पचास-पचास ट्रक हैं, बाकी सारे देश के व्यापारियों का माल रुका हुआ है। सरकार को पहले इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए थी।
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जीएसटी ‌‌ब‌िल
गुरशरन सिंह ने कहा कि वे भूटान और नेपाल को माल निर्यात करते हैं, पहले उस पर कोई टैक्स नहीं लगता था, लेकिन अब जीएसटी के स्लैब के हिसाब से सभी को पहले टैक्स जमा करना होगा। फिर तीन से चार महीने बाद उन्हें अपना रिफंड मिलेगा। इससे कारोबारियों को और ज्यादा निवेश करना पड़ेगा। उन्होंने इस संबंध में केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली को पत्र भेजा है, साथ ही वित्तमंत्री मनप्रीत बादल से भी मिले हैं। निर्यात होने वाले सामान पर कोई टैक्स नहीं होना चाहिए।
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