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ससुराल आकर मंगेतर ने दी शहीद को अंतिम विदाई, मां ने सेहरा-कलगी बांधी, हाथ जोड़ बोली- गर्व है

Sun, 17 Feb 2019 10:56 AM IST
खुशबू गोयल जगजीत सिंह, अमर उजाला, रोपड़ (पंजाब)
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कुलविंदर सिंह को अंतिम विदाई
शादी नहीं हो पाई, फिर भी वह ससुराल आई और अपने मंगेतर शहीद कुलविंदर सिंह को अंतिम विदाई दी। शवयात्रा चलने से पहले उसने सेल्यूट करके कहा, शहादत पर गर्व करती हूं, शत शत नमन, देखिए तस्वीरें।
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कुलविंदर सिंह को अंतिम विदाई
पुलवामा में आतंकी हमले में शहीद हुए गांव रौली वासी शहीद कुलविंदर सिंह का पार्थिव शरीर जब नूरपुरबेदी से गांव रौली ले जाया जा रहा था तो रास्ते में लोगों ने फूलों की वर्षा की। शव के गांव में पहुंचते ही माहौल गमगीन हो गया और सारा गांव रो पड़ा। विवाह के दौरान की जाने वाली रस्म के अनुसार, शहीद के शव पर सेहरा और कलगी रखी गई, उसके बाद हाथ जोड़कर बोली, बेटा तुम्हारी शहादत पर गर्व है।
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कुलविंदर सिंह को अंतिम विदाई
शहीद कुलविंदर की मंगनी गांव लोदीपुर वासी अमनदीप कौर से लगभग ढाई साल पहले हुई थी। आठ नवंबर को शादी होनी तय थी। अमनदीप कौर भी अपने मंगेतर को अंतिम विदाई देने के लिए गांव पहुंची। इस दौरान अमनदीप कौर कई बार बेहोश हुई। दो लोगों ने सहारा देकर उसे गुरुद्वारा साहिब से घर तक पहुंचाया। अंतिम संस्कार के बाद अमनदीप कौर ससुराल पहुंची तो अपने होने वाले ससुर दर्शन सिंह के गले लग कर काफी देर तक रोती रही।

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कुलविंदर सिंह को अंतिम विदाई
शहीद की करीब दो किलोमीटर लंबी अंतिम यात्रा में हजारों लोग शामिल हुए। स्थानीय विधायक अमरजीत सिंह संदोआ ने भी उन्हें कंधा दिया। पूर्व सूबेदार गुरचेत सिंह ने शव यात्रा में पीएम मुर्दाबाद के नारे भी लगाए। श्मशान घाट पहुंचने पर सीआरपीएफ के जवानों ने शहीद को सलामी दी। सीआरपीएफ की ओर से शहीद के शव को लिपटे तिरंगे को जब पिता दर्शन सिंह को सौंपा गया तो उन्होंने तिरंगे को सीने से लगा लिया और कहा अब यही मेरा बेटा है।
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कुलविंदर सिंह को अंतिम विदाई
दर्शन सिंह ने कहा कि अगर उनका बेटा जंग में दुश्मन को मारकर शहीद होता तो उन्हें ओर गर्व होता। सरकार के प्रति रोष व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि और भी बेटे देश की सेवा कर रहे हैं पर सरकार ने उनके हाथ बांधे हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने जवानों को फायर हवा में और पैरों में करने के लिए बोला है पर छाती पर गोली दागने की इज्जाजत नहीं दी है। अगर सैनिक अपनी मनमर्जी करता है तो उसे नौकरी से निकाल दिया जाता है।
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कुलविंदर सिंह को अंतिम विदाई
दर्शन सिंह ने कहा कि सैनिकों को शूट करने के पूरे अधिकार मिलने चाहिए। उन्होंने कहा कि कुलविंदर सिंह अपनी शादी के लिए बैंड बाजे और गाड़ियां तक बुक करके गया था। सरकार की ओर शहीदों के परिवारों के लिए किए गए एलान पर दर्शन सिंह ने कहा कि सरकारों वादे करके मुकर जाती है। कुलविंदर सिंह के पिता दर्शन सिंह ट्रक ड्राइवर हैं। लगभग एक माह से लाइसेंस एक्सपायर होने के कारण वह काम नहीं कर रहे है। परिवार के पास गांव में जमीन भी केवल एक एकड़ ही है।
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कुलविंदर सिंह को अंतिम विदाई
शहीद के रिश्तेदार किरनदीप सिंह ने बताया कि कुलविंदर जब गांव में आता था तो गुरुद्वारा साहिब में सुबह व शाम को पाठ करता था। कुलविंदर को क्रिकेट और फुटबाल खेलने का शौक था। सीआरपीएफ में भर्ती के बाद कुलवदिंर को पंजाब पुलिस के जेल विभाग से भी नौकरी का पत्र आ गया था, लेकिन उसने देश सेवा को तवज्जो दी। जानकारी के अनुसार, कुलविंदर सिंह 92 बटालियन में कांस्टेबल था। 92 बटालियन की बस खराब होने के कारण इस बस में बैठे जवानों को पांच-पांच कर अन्य बसों में बिठाया गया था।
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