पुलवामा में आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद जवान हरि सिंह को उनके 10 महीने के बेटे ने मुखाग्नि दी तो मां और पत्नी फूट-फूट कर रोईं। वहीं बहनें बेसुध हो गईं। हर किसी की आंख नम हो गई, देखिए तस्वीरें...
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शहीद हरि सिंह का अंतिम संस्कार
शहीद हरि सिंह का अंतिम संस्कार रेवाड़ी जिले के गांव राजगढ़ में मंगलवार दोपहर हजारों लोगों की मौजूदगी में हुआ। रेवाड़ी के राजगढ़ में प्रवेश करते ही कारगिल के शहीद वेदपाल सिंह चौहान का स्मृति स्थल बना हुआ है। इसी के साथ शहीद हरि सिंह का अंतिम संस्कार किया गया। सेना की टुकड़ी ने शहीद जवान को सलामी दी।
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शहीद हरि सिंह का अंतिम संस्कार
अंतिम संस्कार के समय लोग शहीद हरि सिंह अमर रहे...वंदे मातरम.. भारत माता की जय...पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाते रहे। जवान हरि सिंह का शव गांव पहुंचा, तो लोगों ने फूल बरसाकार श्रद्धांजलि अर्पित की। शव घर ले जाया गया, जहां मां पत्नी और बहनों को आखिरी बार उनका चेहरा दिखाया गया।
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शहीद हरि सिंह का अंतिम संस्कार
उसके बाद सभी रस्में निभाकर शहीद को अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान पूरा गांव मौजूद रहा और लोग लगातार पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाते रहे। शहीद की पत्नी राधा ने बताया कि रविवार को ही उनकी हरि सिंह से बातचीत हुई थी। मुझे क्या पता था कि मैं उनसे आखिरी बार बात कर रही हूं, पर मुझे उन पर गर्व है।
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शहीद हरि सिंह का अंतिम संस्कार
राधा ने बताया, उन्होंने कहा था कि यहां हालात बहुत खराब हैं। पुलवामा में शहीद हुए अपने 40 भाइयों की शहादत का बदला लेकर जल्द घर आऊंगा, फिर हम घूमने चलेंगे और खूब बातें करेंगे। बेटे का ख्याल रखने की बात कहकर उन्होंने फोन रख दिया था और सोमवार सुबह सेना ने उनकी शहादत की सूचना भेज दी।
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा क्षेत्र में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में हरि सिंह (28) शहीद हो गए। इनका जन्म 15 अगस्त 1993 को हुआ था। वह वर्ष 2011 में 55-राष्ट्रीय राइफल में भर्ती हुए थे। हरि सिंह चार भाई-बहनों में तीसरे नंबर के थे। वह परिवार में इकलौते कमाने वाले थे। घर में उनकी मां के अलावा पत्नी और एक दस माह का बेटा है।