सुप्रीम कोर्ट के शराबबंदी के फैसले के बाद देश में भूचाल आ गया है। विरोध में लोग, करोबारी और होटल मालिक सड़कों पर उतर आए। तस्वीरों में देखिए हाल।
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SC के शराबबंदी के फैसले खिलाफ विरोध प्रदर्शन
स्टेट व नेशनल हाईवे के 500 मीटर के दायरे में आने वाले होटल, रेस्तरां व डिस्कोथेक में शराबबंदी के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में सोमवार को सेक्टर-17 प्लाजा में ट्राईसिटी के होटल मालिकों ने प्रदर्शन किया। होटल मालिकों ने शहर के स्टेट व नेशनल हाईवे से सटे होटल, रेस्तरां और बार में शराब परोसे जाने पर लगाई गई पाबंदी के फैसले में रियायत दिए जाने की मांग की।
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SC के शराबबंदी के फैसले खिलाफ विरोध प्रदर्शन
होटल व रेस्तरां मालिकों ने प्रदर्शन के बाद पंजाब के गवर्नर और चंडीगढ़ के प्रशासक वीपी सिंह बदनौर से मुलाकात की। होटल मालिकों ने प्रशासक से मिलकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार करने और राहत देने की मांग की। इस पर प्रशासक बदनौर ने होटल व रेस्तरां मालिकों को स्पष्ट लफ्जों में यह कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को दरकिनार नहीं किया जा सकता।
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SC के शराबबंदी के फैसले खिलाफ विरोध प्रदर्शन
सुप्रीमकोर्ट के फैसले पर टिप्पणी करना कानून की मर्यादा का उल्लंघन करना है। बदनौर ने होटल मालिकों को दूसरा विकल्प ढूंढना के लिए कहा है। एसोसिएशन के प्रेसिडेंट अरविंदर पाल सिंह ने कहा कि शहर के 66 होटल, रेस्तरां, पब और 25 बीयर बार में शराब पर पूरी तरह पाबंदी से कारोबारियों को हर माह करीब 150 करोड़ रुपये घाटा झेलना पड़ेगा।
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SC के शराबबंदी के फैसले खिलाफ विरोध प्रदर्शन
शराबबंदी के कारण चंडीगढ़ प्रशासन को भी हर साल करोड़ों रुपये के राजस्व से हाथ धोना पड़ेगा। एसोसिएशन के चेयरमैन मनमोहन सिंह ने कहा कि रातों रात होटल इंडस्ट्री बंद होने के कगार पर आ गई है। काम न होने के कारण हजारों युवा बेरोजगार हो गए है। चेयरमैन मनमोहन सिंह ने कहा कि दो दिन के अंदर चंडीगढ़ में होटल इंडस्ट्री को करीब 10 से 12 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
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SC के शराबबंदी के फैसले खिलाफ विरोध प्रदर्शन
होटल इंडस्ट्री को रोजाना चार से पांच करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ रहा है। अरविंदर पाल ने कहा कि कई लोगों ने बैंकों से लोन लेकर हाल ही में अपना बिजनेस शुरू किया था। बिजनेस शुरू होते ही बंद हो गया। रोजगार पर काफी असर पड़ा है। होटल, रेस्तरां, डिस्कोथेक और क्लब में गार्ड व बाउंसर्स का काम करने वाली लगभग हजार लेडी बाउंसर्स बेरोजगार हो गई है।
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SC के शराबबंदी के फैसले खिलाफ विरोध प्रदर्शन
वहीं शराबबंदी के बाद चंडीगढ़ के एनएच और स्टेट हाईवे के साथ लगते सेक्टरों के रिहायशी इलाकों में अब बर्थ डे और अन्य छोटी पार्टियों में भी शराब नहीं परोसी जाएगी। अब तक आयोजक आबकारी विभाग को दो हजार रुपये शुल्क अदा करके एक दिन शराब परोसने का लाइसेंस लेते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाएगा। यहां तक कि रिहायशी इलाकों में होने वाली शादियों में भी इसी तरह से शराब नही परोसी जाएगी।
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liquor ban
हाईवे के साथ मनीमाजरा, सेक्टर-27,26,7,19,8,18,19,11,15, खुडा जस्सू, खुडा लाहौरा और सारंगपुर का एरिया है। ये सभी एरिया स्टेट हाईवे के साथ लगते हैं जबकि नेशनल हाईवे के अंतगर्त रायपुर खुर्द, हल्लोमाजरा, सेक्टर-31, 32, 30, 20, 33, 21, 34, 34,43 और 41 का एरिया शामिल है। इन सेक्टरों में हाईवे से 500 मीटर किसी भी पार्टी में शराब परोसने की मंजूरी नहीं होगी।
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शराब बिक्री पर बढ़ावा देने का आरोप
- फोटो : Getty
कम्युनिटी सेंटरों में फिर से शराब परोसने का मामला नगर निगम प्रशासन से टेकअप करने जा रहा था लेकिन हाईवे से 500 मीटर दूरी तक शराब पर पाबंदी लगने से अब फिर से यह मामला अटक गया है। दो माह पहले सदन की बैठक में इस मामले पर चर्चा करते हुए निर्णय लिया गया था कि प्रशासक के स्तर पर इस मामले को उठाकर फिर से कम्युनिटी सेंटर में होने वाली शादियों में शराब शुरू करवाई जाएगी।
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भारत के एक अन्य राज्य बिहार ने सभी तरह की शराब पर पूर्ण पाबंदी लगा दी
- फोटो : Thinkstock
हरियाणा सहित राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हाईवे से पांच सौ मीटर के भीतर स्थित पब-बार और डिस्को बंद होने से खट्टर सरकार को पांच सौ करोड़ की चपत लगेगी। सुप्रीम कोर्ट केआदेश लागू होने के बाद भले ही शराब कारोबारी व पब-बार व्यवसायी सड़कों पर विरोध का बिगुल फूंक चुके हों, लेकिन सरकार के सामने फिलहाल कोई विकल्प नहीं है।
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शराब पर प्रतिबंध
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उच्चतम न्यायालय का आदेश आने के बाद सरकार ने देश के अटार्नी जनरल और हरियाणा के एडवोकेट जनरल से पब-बार में शराबबंदी को लेकर राय ली थी, जिसमें आदेशों का कोई असर न पड़ने की बात कही गई थी, लेकिन पहली अप्रैल से लागू हुए ताजा आदेशों में पब-बार और डिस्को भी पांच सौ मीटर के दायरे में लाए गए हैं। इससे शराब कारोबारियों और व्यवसायियों में हड़कंप मचा हुआ है।
आबकारी एवं कराधान विभाग ने भी बार-पब में शराबबंदी के बाद होने वाली वित्तीय हानि को लेकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करनी शुरू कर दी है। विभाग के प्रधान सचिव संजीव कौशल और आबकारी एवं कराधान आयुक्त श्यामल मिश्रा पब-बार और डिस्को में शराब बिक्री के साथ ही प्राप्त होने वाले राजस्व के आंकड़े जुटा रहे हैं। उन्हें आबकारी एवं कराधान मंत्री कैप्टन अभिमन्यु को भी इससे अवगत कराना है।