सतलोक आश्रम के कथित संत रामपाल भले ही जेल में कुकर्मों की सजा भुगत रहे हैं, लेकिन उनकी पेशी पर उमड़े समर्थकों को देख पुलिस हैरान है। देखिए, क्यों?
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रामपाल के समर्थकों का गुस्सा देख पुलिस सन्न
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रोहतक में रामपाल की पेशी के दौरान पुलिस के भारी भरकम तामझाम के बाद भी समर्थक कोर्ट और बार कार्यालय की छतों तक पहुंच गए। कई बार पुलिसकर्मियों और अधिकारियों से उनकी बहस भी हुई।
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रामपाल की पेशी के बाद जब उसको पुलिस वैन में वापस लेकर जा रही थी तो एक राहगीर ने कुछ अपशब्द कह दिए। इतना सुनते ही सड़क पर चलते समर्थकों ने राहगीर की धुनाई कर दी। मारपीट देखकर पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और राहगीर को छुड़वाया।
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इससे पहले, सुबह ही हजारों की तादाद में समर्थक मानसरोवर पार्क, अंबेडकर चौक, लघु सचिवालय और कोर्ट के पास जमा हो गए। वैन पहुंचते ही समर्थकों ने आगे बढ़ने का प्रयास किया। यहां पुलिस ने उन्हें रोक लिया। छोटी-छोटी टुकड़ी बना समर्थक कोर्ट के अंदर तक पहुंच गए।
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कोर्ट में पहुंचने के बाद भी एक घंटे तक रामपाल को वैन में ही बैठाए रखा गया। इस दौरान रामपाल के साथ पेशी भुगतने आए साथी आरोपी लगातार उसकी आवभगत में लगे रहे। साफों से रामपाल को पंखा करते रहे। पेशी भुगतने के बाद भी रामपाल को वैन में ही फिर से एक घंटे तक बैठाया गया।
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कोर्ट की ओर बढ़ रहे समर्थकों को रोकने के लिए पुलिस को हवा में लाठियां भांजनी पड़ी। कुछ ने डीएसपी पवन से बहस भी की। कई महिला समर्थक बार एसोसिएशन की तीसरी मंजिल पर जा खड़ी हुई। आनन-फानन में उनको नीचे उतारा गया।
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रामपाल समर्थक एक महिला अपनी डेढ़ वर्ष की बच्ची को कड़ाके की धूप में लिए बार एसोसिएशन के कार्यालय के बाहर खड़ी रही। जब रामपाल वैन में बैठा तो एक समर्थक कोर्ट के मेन गेट के सामने हाथ जोड़ कर सड़क पर ही लेट गया।
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ये है मामला: 12 जुलाई 2006 को करौंथा आश्रम के बाहर आर्य समाजियों और रामपाल समर्थकों के बीच हिंसक झड़प हुई। झड़प में झज्जर के बाघपुर निवासी सोनू की मौत हो गई। पुलिस ने इ स मामले में आश्रम प्रमुख रामपाल सहित 50 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया।
केस में लगभग पौने दो साल तक रामपाल रोहतक जेल में भी रहा। जमानत पर बाहर आने के बाद रामपाल ने बरवाला में आश्रम बना लिया। बरवाला आश्रम विवाद के बाद से रामपाल हिसार जेल में बंद है। बुधवार को रामपाल सहित 7 आरोपियों ने कोर्ट में हाजिरी लगाई।