एक शौक ने जिसे क्राइम की दुनिया में लाकर खड़ा कर दिया, कांस्टेबल को पीटकर सिर्फ 6 मिनट में दोस्त उसे छुड़ाकर ले गए। तस्वीरों में देखिए कैसे?
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Panchkula Deepak
- फोटो : अमर उजाला
लग्जरी एशो आराम और लग्जरी कारों के शौक ने दीपक को छात्र से क्राइम की दुनिया में लाकर खड़ा कर दिया। आए दिन भौतिक सुख की चाहत बढ़ती गई और वह पढ़ाई का रास्ता छोड़कर अंतरराज्यीय लुटेरा गिरोह में शामिल हो गया। ये वही लुटेरा है, जिसे पंचकूला पुलिस ने शहर के एनएच पर सेक्टर-23 और 24 के टी प्वाइंट से गिरफ्तार किया था।
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Panchkula Firing
दीपक मूल रूप से जैन चौक भिवानी का रहने वाला है। 4 अगस्त 2014 को दीपक के खिलाफ भिवानी में शस्त्र अधिनियम के तहत मामला दर्ज हुआ था। दीपक के अपराध से जुड़े तार सिर्फ हरियाणा में ही नहीं बल्कि हरियाणा, हिमाचल, पंजाब, राजस्थान, सहित अन्य राज्यों से भी जुड़े हैं। खास बात ये है कि दीपक जिन वाहनों को लूटता था, उन्हीं में बैठकर लूट की वारदात करता था।
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Panchkula Firing
इसका खुलासा तब हुआ जब दीपक और इसके साथी अंबाला से एक कार लूटी और उसी कार में बीकानेर में जाकर वारदात को अंजाम दिया, लेकिन वहां ये राजस्थान पुलिस के हत्थे चढ़ गए। ऐसी ही कई क्राइम करने की सजा दीपक अंबाला की सेंट्रल जेल में रहकर भुगत रहा था। इस कड़ी में शनिवार को एक केस की पेशी के लिए उसे पंचकूला लाया गया।
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Panchkula Firing
पेश के बाद दीपक को एमआरआई कराने के लिए पुलिस टीम पंचकूला के सेक्टर 6 स्थित नागरिक अस्पताल लाई। जैसे ही वे पहुंचे, कार और बाइक पर सवार होकर आए युवकों ने फायरिंग करनी शुरू कर दी। इधर दीपक ने पुलिस टीम से छुटने की कोशिश की, उधर से युवक दौड़े आए। इतने में दीपक ने मिर्च स्प्रे पुलिस वालों की आंखों छिड़क दिया।
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कांस्टेबल राकेश ने खाली हाथ अपराधियों को पकड़ने की कई बार कोशिश की, लेकिन पूरी तैयारी के साथ पहुंचे अपराधी पुलिस से एक कदम आगे रहे। हथियारबंद बदमाशों ने कैदी दीपक को भगाने के लिए फायरिंग भी की। बड़ा सवाल यह है कि आखिरकार अस्पताल जैसे सार्वजनिक स्थल में रोजाना पहुंचने वाले सैकड़ों लोगों की सुरक्षा के नाम पर यहां महज सीसीटीवी कैमरे हैं।
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सुरक्षाकर्मी अगर तैनात भी होते हैं तो उनके पास ऐसी किसी भी वारदात से निपटने के लिए कोई हथियार नहीं हैं। सिविल अस्पताल में रोजाना सैकड़ों मरीज और तीमारदार पहुंचते हैं। पिछले दिनों नर्स के साथ मारपीट की घटना हुई। अस्पताल में मेटल डिटेक्टर या मेटलिक डोर फ्रेम भी नहीं है, जिससे किसी संदिग्ध हथियार के साथ दाखिल होने वाले का भी सुराग मिल सके।
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Panchkula Firing
सीएमओ वीके बंसल ने दावा किया कि सुरक्षा में कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि फरार होने वाले कैदी को पकड़ने के लिए पुलिस कर्मियों के साथ साथ नर्स भी थीं। लेकिन स्प्रे से निकलने वाले जहरीले धुएं के कारण सभी बेबस हो गए। इस वारदात में पुलिस कर्मी राकेश, रोशन और सुखदेव के चेहरे का हिस्सा बुरी तरह चपेट में आया है। उन्हें आंखों में देखने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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हालांकि कांस्टेबल राकेश और बदमाशों के बीच दो से तीन बार हुए संघर्ष में उनके शरीर के अलग अलग हिस्से में गुम चोटें आई हैं। राकेश ने बताया कि जब आरोपियों ने उनके साथ मारपीट शुरू की तो उन्होंने डटकर मुकाबला किया। फायरिंग के बाद जब आरोपी भागने लगे तो अस्पताल परिसर में खड़ी एक पजेरो के मालिक को भी रास्ता रोकने को कहा, लेकिन वह नहीं माना। पर राकेश ने हार नहीं मानी और पीछा करने का प्रयास किया।
10.45 बजे कैदी को ले रहे पुलिस कर्मी का दो बदमाशों ने पीछा करना शुरू किया। 10.46-अस्पताल परिसर की इमरजेंसी के पास कॉरिडोर में स्प्रे किया। 10.47-कैदी पुलिस से हाथ छुड़ाकर भाग गया। 10.48-बदमाश कैदी को छुड़ाने के लिए पुलिस से भिड़े। इस बीच दोनों पक्षों में मारपीट हुई और गोली भी चली। 10.49-कैदी को पकड़ने की अस्पताल के बाहर फिर कांस्टेबल राकेश ने कोशिश की, वहां भी मारपीट हुई। 10.50-गेट नंबर-दो से दूसरा बदमाश आया और कुछ सेकेंड में बाद फिर गोली चली और बदमाश गेट नंबर-1 पर खड़ी बाइक में फरार हो गए।