जालंधर की एक और बेटी रिंकी बहल का हौंसला एक बार टूट गया था, लेकिन हार नहीं मानी और जज बन गई। अब वे मां वष्णो दरबार गई हैं। देखिए, कैसा रहा सफर?
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देखिए, बेटी की संघर्षगाथा: पहले हौंसला टूटा फिर भी जज बनी
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बस्ती गुंजा की रहने वाली रिंकी बहल ने अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता को दिया। उन्होंने कहा कि पिता ने उनके अंदर छिपी प्रतिभा को जाना और उनका हौसला बढ़ाते मुकाम तक पहुंचने में मदद की है। उन्होंने कहा कि उनके पिता चाहते थे कि वे जज बनें। पिता ने रिंकी की शादी के लिए आए कई आफर को भी ठुकरा दिया।
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रिंकी का कहना है कि साल 2012 में एलबीबी करने के बाद उन्होंने तीन साल तक टेस्ट की तैयारी की थी। रिंकी के पिता रामकृष्ण बहल अपनी बेटी की इस सफलता के लिए काफी उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों के माता-पिता का तो फर्ज बनता है कि अगर उनके बच्चे कुछ कर गुजरने की हिम्मत रखते हैं तो उनके हौसले को उड़ान दें। लड़का हो या लड़की इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, बस बच्चा पढ़ने वाला होना चाहिए।
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रिंकी का कहना है कि जब उन्होंने पंजाब सिविल ज्युडिशियरी परीक्षा को पूरा किया था, इस दौरान वे इंटरव्यू में सफल नहीं हो पाई थी। इसके बाद उनका हौसला एक बार टूट गया था, लेकिन उनके पिता ने हौसला बढ़ाते कहा कि दोबारा कोशिश करने से कामयाबी जरूर मिलती है।
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रिंकी ने बताया कि पिछली बार भी पंजाब सिविल ज्यूडिशियरी की लिखित परीक्षा तो पास कर ही ली थी, इंटरव्यू के लिए काफी मेहनत की। आखिर में रिंकी बहल इस इंटरव्यू को क्लीयर करने में सफल हो ही गईं।
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फैंटनगंज में चावल के होलसेल व्यापारी राम कृष्ण बहल ने कहा, ये माता-पिता की जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को आगे बढ़ने में मदद करें। फिर वो लड़का हो या लड़की। दोनों को बराबरी से आगे बढ़ने का हक है।