नाम ऑटो लेकिन काम मिनी बस का। चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला में बहुत से ऑटो लिमिट से पांच गुणा अधिक सवारी ढो रहे हैं। इतनी सवारियां तो मिनी बस या वैन में भी मुश्किल से आती हैं, लेकिन जुगाड़ में माहिर ऑटो चालक मिनी बस जितनी सवारियां ऑटो में ले जा रहे हैं।
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देखिए इन्हें, जितना मर्जी डांटो, मगर ये यूं ही चलाएंगे ऑटो
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‘अमर उजाला’ ने मुहिम के तहत शहर के विभिन्न चौक-चौराहों और स्टैंड पर सवारियों की हालत देखी। डीजल और एलपीजी दोनों ही तरह के ऑटो में चालक को छोड़कर तीन ही सवारी बिठाई जा सकती है। हालत यह हैं कि ऑटो में तीन सवारी तो चालक अपने साथ आगे ही बिठा लेता है।
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हर जगह ‘आप थोड़ा इधर हो जाइए। आप आगे मेरे पास आ जाएं, थोड़ा ऐडजस्ट कर इन्हें बिठा लीजिए’, जैसी बातें सुनने को मिलीं। एक तो गर्मी ऊपर से ऑटो के अंदर की ऐडजस्टमेंट से लोग परेशान हैं। अगर सवारी मना करती है तो उसे अपना अलग से ऑटो बुक कर जाने के लिए कहा जाता है। रोजाना ऑटो चालकों की इस मनमानी को जनता झेल रही है।
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कई ऑटो तो इतनी सवारियां उठाने में सक्षम भी नहीं हैं, जितनी वह उठा रहे हैं। ओवरलोड ऑटो काला धुआं फेंकते हुए बमुश्किल से गंतव्य तक पहुंचते हैं। डीजल ऑटो तो खासकर आठ से दस सवारी बगैर चलते ही नहीं।
देखिए इन्हें, जितना मर्जी डांटो, मगर ये यूं ही चलाएंगे ऑटो
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इंडस्ट्रियल एरिया में एक ऑटो चालक ने अंदर सवारियां भरकर पीछे भी टांगें बाहर लटकाकर बच्चों को बिठा रखा था। स्कूली बच्चों का भी यही हाल होता है। चालक अपने दोनों ओर सवारी बिठाकर ले जाता मिला।