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देशद्रोह की धारा पर विवाद, बड़ा सवाल- प्रदर्शन करना देशद्रोह कैसे?

Thu, 13 Apr 2017 09:37 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब यूनिवर्सिटी में बवाल का मामला - फोटो : अमर उजाला
यूनिवर्सिटी में फीस वृद्धि को लेकर हुए बवाल के बाद विद्यार्थियों पर देशद्रोह की धारा लगाने वाली पुलिस विवादों में घिर गई है। सवाल ये है कि, प्रदर्शन करना देशद्रोह कैसे?
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Students, cops clash at Panjab University
पंजाब यूनिवर्सिटी में फीस वृद्धि को लेकर हुए बवाल पर अब पुलिस व यूनिवर्सिटी प्रशासन आमने-सामने आ गई है। इस मसले पर वीसी का कहना है कि उनकी शिकायत में इंटर स्टेट यूनिवर्सिटी के खिलाफ नारेबाजी करने का आरोप लगाया गया था। 
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Students, cops clash at Panjab University
जबकि डीएसपी सेंट्रल रामगोपाल ने बताया कि पीयू की पहली शिकायत में स्टेट के खिलाफ होने का आरोप मिला था, जिसकी दो बार वेरिफिकेशन की गई। लेकिन एफआईआर दर्ज होने के बाद पीयू प्रशासन अपने पहले बयान से मुकरकर दूसरा बयान देना शुरू कर दिया। इसके बाद एफआईआर के अंदर से धारा 124 हटाई गई।

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Students, cops clash at Panjab University
पुलिस की लापरवाही
जिला अदालत के वकील हरीश भारद्वाज के अनुसार एफआईआर में किसी भी धारा को दर्ज करने से पहले पुलिस के पास एक ठोस आधार होनी चाहिए। जिसको आधार बनाकर पुलिस ने लगाई धारा पर कार्रवाई करवा सके। वारदात होने पर दोपहर बाद मिली शिकायत पर पुलिस ने तत्काल आरोपियों के खिलाफ देशद्रोह की धारा जोड़कर शाम तक धारा हटवा दी। इसके पीछे पुलिस की लापरवाही सामने आ रही है। हालांकि, पुलिस अपनी जांच के बाद एफआईआर में लिखी धारा हटाने व अन्य धारा जोड़ने की पॉवर रखती है। 
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Students, cops clash at Panjab University
पुलिस की विज्ञप्ति में 124 ए धारा का जिक्र नहीं
पुलिस ने दर्ज एफआईआर का बुधवार को प्रेस नोट जारी किया, जिसमें पुलिस ने धारा 124 ए (देशद्रोह) का जिक्र नहीं किया गया है। लेकिन लोगों का कहना है आखिर   पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने में जल्दबाजी क्यों दिखाई। 
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Students, cops clash at Panjab University
उधर, पंजाब यूनिवर्सिटी में फीस वृद्धि को लेकर मंगलवार को हुए बवाल के दौरान गिरफ्तार किए गए 53 विद्यार्थियों को बुधवार को जिला अदालत में पेश किया गया। इनमें तीन छात्राएं भी शामिल हैं। अदालत ने सभी के अलग-अलग बयान दर्ज किए। विद्यार्थियों ने कोर्ट में पुलिस की ज्यादती बयां की।
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Students, cops clash at Panjab University
इस पर अदालत ने एसएसपी को आदेश दिया कि वह गिरफ्तारी के बाद हिरासत में स्टूडेंट्स से मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों की पहचान कर रिपोर्ट अदालत में सौंपे। साथ ही मेडिकल बोर्ड बनाकर उन 18 विद्यार्थियों का नये सिरे से मेडिकल कराया जाए, जिन्हें हिरासत में पीटा गया। इसके बाद अदालत ने सभी 53 स्टूडेंट्स को न्यायिक हिरासत में बुड़ैल जेल भेज दिया।

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Students, cops clash at Panjab University - फोटो : अमर उजाला
इससे पहले कड़ी सुरक्षा के बीच सभी विद्यार्थियों को जिला अदालत में पेश किया। अदालत में जिला बार एसोसिएशन के प्रधान रविंदर सिंह, अमर सिंह चहल समेत कई वकील मौजूद रहे। जिला बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों के अलावा जिला अदालत के कई वरिष्ठ एडवोकेट स्टूडेंट्स पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में छात्रों के समर्थन में अदालत में उनकी ओर से खुद पेश हुए।

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Students, cops clash at Panjab University - फोटो : अमर उजाला
सभी एडवोकेट ने अदालत को बताया कि उन्होंने खुद स्टूडेंट्स का सरेंडर करवाया था। इसके बावजूद उन्हें थाने में ले जाकर पीटा गया। वहीं कई ऐसे स्टूडेंट्स को पुलिस ने गिरफ्तार किया जो कि हिंसा के दौरान वहां थे भी नहीं। जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि पुलिस ने पीयू प्रशासन की ओर से सौंपी गई छात्रों की सूची के आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया है और उनके खिलाफ केस दर्ज किया है।
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Students, cops clash at Panjab University
सभी छात्रों के एक-एक कर हुए बयान
वकीलों ने अदालत को बताया कि उन्होंने खुद स्टूडेंट्स को पुलिस के समक्ष सरेंडर करवाया था। इसके बावजूद उन्हें थाने में ले जाकर डंडो और बेल्ट से पीटा गया। पुलिस ने बदले की भावना से यह कार्रवाई की है। इसके बाद अदालत ने सभी स्टूडेंट्स को एक-एक कर कटघरे में बुलाया और उनके बयान लिए। स्टूडेंट्स ने बताया कि कैसे पुलिस ने उनकी पिटाई की। कुछ स्टूडेंट्स के अनुसार पुलिस ने गिरफ्तार करने के बाद थाने ले जाते समय ही गाड़ी में ही पीटना शुरू कर दिया था। इसके बाद देर रात मेडिकल से पहले तक रुक-रुक कर पिटते रहे। 
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