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एक देश, जहां लोगों ने सालों से संभाल कर रखी है अस्थियां, वजह चौंकाने वाली

Fri, 16 Feb 2018 09:56 AM IST
रमेश शुक्ला सफर/अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
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पाकिस्तानी हिन्दू परिवार
20-20 साल से अपनों की अस्थियां संभाल कर रखी हुई हैं। इसके पीछे की वजह सामने आई तो जानकर सभी चौंक गए, आप भी यकीं नहीं कर पाएंगे।
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पाकिस्तानी हिन्दू परिवार
हुआ यूं कि पाकिस्तान में रहने वाले सैकड़ों हिंदू परिवारों को अपने मृत परिजनों की अस्थियों को मोक्ष के लिए हरिद्वार ले जाने को वीजा का इंतजार है। इन परिवारों ने अस्थियां संभाल कर रखी हुई हैं, लेकिन 20-20 साल गुजर जाने के बाद भी मोक्ष नसीब नहीं हो पा रहा है।

 
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पाकिस्तानी हिन्दू परिवार
पाकिस्तान से आए विजय हजारी ने बताया कि पोते की मौत पर मुझे कर्मकांड के लिए हरिद्वार जाना था, लेकिन वीजा केवल अमृतसर का ही मिला। उन्होंने भारत सरकार से अपील की है कि वीजा पांच दिन बढ़ाकर उन्हें हरिद्वार जाने की अनुमति दी जाए। पाक से अन्य लोग भी अस्थियां लेकर आए हैं, लेकिन उनके पास भी हरिद्वार का वीजा नहीं है। अब या तो अस्थियां दोबारा पाक ले जाएंगे या फिर ब्यास नदी में उन्हें विसर्जित करना पड़ेगा।

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उनका कहना था कि वीजा बढ़ने और हरिद्वार जाने की इजाजत मिलते नहीं दिख रही है। विजय हजारी ने बताया कि उनकी संस्था श्री गुरु सेवा वेलफेयर सोसाइटी पाक में रखी अस्थियों को गंगा में विसर्जित करवाने के लिए काम करती है। कई परिवार ऐसे हैं, जो पूर्वजों की अस्थियों को मोक्ष के लिए गंगा में विसर्जन के लिए बीस-बीस साल से वीजा का इंतजार कर रहे हैं।
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भारत-पाक में जंग नहीं चाहते: लक्ष्मण दास
सिंध प्रांत से अमृतसर धार्मिक यात्रा पर आए एक हिंदू परिवार के मुखिया लक्ष्मण दास का कहना था कि वह भारत-पाक में जंग नहीं चाहते। क्योंकि जब भारत-पाक के बीच जंग होती है तो पाक में रहने वाले हिंदू परिवारों पर जुल्म ढाया जाने लगता है। बहू-बेटियों से दुराचार होता है। ऐसे में दोनों मुल्कों को प्यार से रहना चाहिए।
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पाक से आया 141 हिंदुओं का जत्था
पाक से सोमवार देर रात 141 हिंदुओं का जत्था धार्मिक यात्रा पर अटारी बार्डर के रास्ते अमृतसर पहुंचा। इस जत्थे के पास केवल अमृतसर का वीजा है। इसमें करीब 70 महिलाएं हैं। इन हिंदू श्रद्धालुओं को अमृतसर में ठहरने के लिए श्री दुर्ग्याणा मंदिर प्रबंधक कमेटी ने इंतजाम किया है। कमेटी के प्रधान रमेश शर्मा ने कहा कि शिवरात्रि पर्व मनाने ये लोग यहां आए हैं।
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