पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आने वाला। अब उसने एक ऐसी हिमाकत कर दी है कि भारतीय सरकार और पीएम मोदी सकते में हैं, जानिए माजरा।
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वाघा बॉर्डर
दरअसल, अमृतसर सेंट्रल जेल के ट्रांजिट कैंप में सजा पूरी करने के बाद वतन वापसी का इंतजार कर रहे 16 पाकिस्तानी कैदियों को पाकिस्तान ने अपना मानने से ही इनकार कर दिया है। पाकिस्तान के इनकार के बाद अब इन कैदियों की रिहाई का रास्ता मुश्किल हो गया है क्योंकि ये भारत के नागरिक नहीं हैं।
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वाघा बॉर्डर
यह जानकारी केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट द्वारा लिए गए स्वत: संज्ञान के एक मामले की सुनवाई के दौरान दी। केंद्र सरकार की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि अमृतसर सेंट्रल जेल में ऐसे 38 कैदी थे जो सजा पूरी कर चुके थे और जिनको पाकिस्तान वापस भेजने के लिए सरकार ने प्रयास किए हैं। इनमें से सरकार 16 को उनके देश वापस भेज चुकी है और 2 कैदियों की मौत हो चुकी है।
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वाघा बॉर्डर
बाकी बचे 20 में से 2 कैदी बांग्ला देश के और एक-एक नेपाल और म्यांमार के हैं। सबसे अधिक 16 कैदी अब पाकिस्तान के बचे हैं। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ़ इंडिया सत्यपाल जैन ने हाईकोर्ट को बताया की इन 20 कैदियों की अभी राष्ट्रीयता तय नहीं हो पा रही है, क्योंकि इनके देश ही इनको अपना नागरिक मानने से इंकार कर रहे हैं।
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Court
हाईकोर्ट ने इस जानकारी पर केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वे कोई ऐसा तरीका निकालें कि कैदियों की सही पहचान कर उन्हें वापस उनके देश भेजा जा सके। इन्हीं आदेशों के साथ हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई 24 अगस्त तक स्थगित कर दी है।
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पाकिस्तान
पिछली सुनवाई पर हाई कोर्ट को बताया गया था कि इन सभी विदेशी कैदियों को वापस उनके मुल्क भेजे जाने के लिए उनके नाम, पते, फोटो सहित अन्य सभी जरूरी जानकारियां संबंधित फॉरेन रीजनल ऑफिस या जिला पुलिस मुखिया को भेजी जा चुकी हैं। यह जानकारी आगे इन देशों के दूतावासों को भेजी जानी थी।
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prisoner
हर तीन महीने पर काउंसलर सेशन का आयोजन
हाईकोर्ट को बताया गया था कि पाकिस्तानी कैदियों के उनके मुल्क वापस भेजने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा समय पर विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जाते हैं। जिसके तहत मंत्रालय पाकिस्तानी दूतावास के साथ प्रत्येक तीन महीने में एक काउंसलर एक्सेस सेशन आयोजित करता है। जिसके तहत अमृतसर सेंट्रल जेल में पाकिस्तानी कैदियों से मिला जाता है।
हाईकोर्ट ने राज्यों से मांगी थी जानकारी
गौरतलब है की सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2015 में अंडर ट्रायल कैदियों और वे कैदी जो अपनी आधी सजा काट चुके हैं, के अधिकारों के मामले में देश की सभी हाईकोर्ट को अपने क्षेत्राधिकार के तहत आने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस मामले में ठोस कदम उठाने के आदेश दिए थे। सुप्रीम कोर्ट के इन्हीं आदेशों पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ को नोटिस जारी कर यह जानकारी मांगी थी।