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आर्ट्स एंड हेरिटेज फेस्टिवल में हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन, राजनीति पर चले कटाक्ष के बाण

Sat, 15 Sep 2018 09:42 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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हास्य कवि सम्मलेन
आर्ट्स एंड हेरिटेज फेस्टिवल 2018 के दूसरे दिन चंडीगढ़ साहित्य अकादमी की ओर हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस दौरान कवियों ने अपने काव्य पाठ से दर्शकों को लोट-पोट कर दिया। इस मौके पर हास्य कवियों ने दर्शकों को खूब गुदगुदाया। पूरा ऑडिटोरियम हंसी के ठहाकों से गूंज उठा। वहीं, अर्थव्यवस्था पर भी कविताओं के बाण चले। कार्यक्रम में मीडिया पार्टनर का रोल अमर उजाला निभा रहा है। 

शनिवार को प्रेम कबूतर प्ले होगा। इसमें श्रीराम सेंटर दिल्ली के कलाकार भाग लेंगे। टैगोर थियेटर में कवि सम्मेलन का शुभारंभ कल्चरल अफेयर्स के निदेशक जितेंद्र यादव ने कवियों के सम्मान से किया उसके बाद काव्य पाठ शुरू हुआ। शुरूआत चंडीगढ़ के हास्य कवि सतीश पापुलर की कविता से हुई। उन्होंने पति-पत्नी के बीच के रिश्तों को अपनी कविता में शामिल करते हुए कहा, जो हंसे उसका घर बसे, सोचना ये है कि घर बसने के बाद कितना हंसे। 

दिल्ली से आए हास्य कवि दीपक सैनी ने भी लोगों को खूब हंसाया। खेलों में हो रही राजनीति पर उन्होंने प्रहार किया और कविता पढ़ी- हमारे खिलाड़ियों की आत्मा गरीबी में पली और झोपड़ियों में रोती है, क्योंकि खेलों के नाम पर राजनीति होती है, जिस दिन भी राजनीति खेलों से हट जाएगी, उसी दिन हमारी धरती स्वर्ण पदकों से पट जाएगी। इस पर खूब तालियां भी बजीं। 

मशहूर कवि अरुण जैमिनी ने अंग्रेजी के चलन पर शब्दों के तीर चलाए। उन्होंने हिंदी को सर्वश्रेष्ठ बताया। इस दौरान कहा कि चारों ओर अंग्रेजी का भरपूर तमाशा है, पर ताकतवर तो हमारी हिंदी भाषा है। कहा, कवियों के लिए सोशल मीडिया चुनौती बना। सोशल मीडिया पर किसी की भी कविता को लोग अपने द्वारा रचित बता रहे हैं। ऐसे लोग कविता को वायरल कर रहे हैं।
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कविता पाठ करते हुए कवि
दिल्ली से आए कवि आनंद क्रांतिवर्धन ने निर्भया कांड पर कहा- हे दामिनी अगर दरिंदों के सामने समर्पण कर देती, भले ही तुम्हारी आत्मा तार-तार हो जाती पर तुम्हारी आंतें तो सलामत रह जातीं, तुम्हारी जैसी लड़कियां जो सम्मान के लिए लड़ती हैं, वह यह नहीं जानती कि जीने के लिए आत्मा की नहीं आंतों की जरूरत पड़ती है।

 इसी तरह दिल्ली से आए कवि बागी चाचा ने धर्म के नाम पर लोगों को बांटने वालों पर प्रहार किया। साथ लोगों को कविता से एकजुटता की सीख दी। उन्होंने कहा तोड़ दे अब धर्म और जाति के मचान को, भूल जा चाहे अभी तू गीता और कुरान को, बंट चुकी है ये धरती टुकड़ों में बहुत, धर्म तू बना ले अपना पूरे आसमान को। दिल्ली से आए कवि महेंद्र शर्मा ने लोगों को खूब हंसाया और कविता पढ़ी कि वो छत पर गया पतंग उड़ाने के बहाने, पड़ोसन भी आ गई कपड़े सुखाने के बहाने, बीवी ने देखा ये रंगीन नजारा, वो डंडा ले आई बंदर को भगाने के बहाने।

 रेवाड़ी के कवि हलचल हरियाणवी ने राजनीति पर व्यंग्य कर हलचल मचा दी। उन्होंने कहा कि जनता को तो लुटना है सत्ता की दुकानों पर, बदली है तुला लेकिन हर बाट पुराना है, दो रंगी सियासत का इतना सा फसाना है, नेताओं की चांदी है, चमचों का जमाना है। इस पर दर्शकों ने खूब वाह-वाह की। इनकेअलावा आलोक, उर्दू शायर टीएन राज़ आदि ने भी शेर पढ़े।
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