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इस गुरुद्वारे में हुआ था ऑपरेशन ब्लू स्टार, नाम में मंदिर, एक मुस्लिम ने नींव रखी

Wed, 07 Jun 2017 09:36 AM IST
amarujala.com- Presented by: खुशबू गोयल
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Golden Temple, Amritsar
ऑपरेशन ब्लू स्टार एक ऐेसे गुरुद्वारे में अंजाम दिया गया था, जिसके नाम में मंदिर आता है और जिसकी नींव एक मुसलमान ने रखी थी, चौंक गए न जानकर।
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Operation Blue Star
पंजाब के अमृतसर में बना श्री हरिमन्दिर साहिब गुरुद्वारा यानी स्थित स्वर्ण मंदिर में सिखों का पवित्र स्थल है। न केवल सिखों की, बल्कि लोगों की इसमें अटूट आस्था है। यही कारण है कि जब 6 जून 1984 को यहां खून खराबा हुआ। 492 लोगों और 83 जवानों की जान गई तो सिखों की आस्था को गहरी ठेस पहुंची।
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पंजाब के अमृतसर में स्थित गुरुद्वारा श्री हरिमन्दिर साहिब
स्वर्ण मंदिर की नींव मुसलमान पीर सूफी संत साईं मिया मीर ने रखी थी। इसका पूरा उल्लेख स्वर्ण मंदिर में लगे शिलालेखों से पता चलता है। सूफी संत साईं मिया मीर का सिख धर्म के प्रति शुरू से ही झुकाव था। वे लाहौर के रहने वाले थे और सिक्खों के पांचवें सिख गुरु अर्जन देव जी के दोस्त थे। जब हरिमंदिर साहिब के निर्माण पर विचार किया गया, तो फैसला हुआ था कि इस मंदिर में सभी धर्मों के लोग आ सकेंगे।

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पंजाब के अमृतसर में स्थित गुरुद्वारा श्री हरिमन्दिर साहिब
इसके बाद सिखों के पांचवें गुरु अर्जन देव जी ने लाहौर के सूफी संत साईं मियां मीर से दिसंबर 1588 में गुरुद्वारे की नींव रखवाई थी। पूरा अमृतसर शहर स्वर्ण मंदिर के चारों तरफ बसा हुआ है। अमृतसर का नाम वास्तव में उस सरोवर के नाम पर रखा गया है जिसका निर्माण गुरु राम दास ने स्वयं अपने हाथों से किया था।
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स्वर्ण मंदिर अमृतसर
लगभग 400 साल पुराने इस गुरुद्वारे का नक्शा खुद गुरु अर्जुन देव जी ने तैयार किया था। यह गुरुद्वारा शिल्प सौंदर्य की अनूठी मिसाल है। इसकी नक्काशी और बाहरी सुंदरता देखते ही बनती है। गुरुद्वारे के चारों ओर दरवाजे हैं, जो चारों दिशाओं (पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण) में खुलते हैं। यहां हर धर्म के अनुयायी का स्वागत किया जाता है। श्री हरिमन्दिर साहिब परिसर में दो बड़े और कई छोटे-छोटे तीर्थस्थल हैं।
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स्वर्ण मंदिर अमृतसर
ये सारे तीर्थस्थल जलाशय के चारों तरफ फैले हुए हैं। इस जलाशय को अमृतसर, अमृत सरोवर और अमृत झील के नाम से जाना जाता है। पूरा स्वर्ण मंदिर सफेद संगमरमर से बना हुआ है और इसकी दीवारों पर सोने की पत्तियों से नक्काशी की गई है। हरिमन्दिर साहिब में पूरे दिन गुरबाणी (गुरुवाणी) की स्वर लहरियां गूंजती रहती हैं। सिक्ख गुरु को ईश्वर तुल्य मानते हैं।
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स्वर्ण मंदिर अमृतसर
स्वर्ण मंदिर में प्रवेश करने से पहले वह मंदिर के सामने सर झुकाते हैं, फिर सी‍ढ़ि‍यों से मुख्य मंदिर तक जाते हैं। सीढ़ि‍यों के साथ-साथ स्वर्ण मंदिर से जुड़ी हुई सारी घटनाएं और इसका पूरा इतिहास लिखा हुआ है। श्री हरिमन्दिर साहिब में अनेक तीर्थस्थान हैं। इनमें से बेरी वृक्ष को भी एक तीर्थस्थल माना जाता है। इसे बेर बाबा बुड्ढा के नाम से जाना जाता है।

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स्वर्ण मंदिर अमृतसर
कहा जाता है कि जब स्वर्ण मंदिर बनाया जा रहा था तब बाबा बुड्ढा जी इसी वृक्ष के नीचे बैठे थे और मंदिर के निर्माण कार्य पर नजर रखे हुए थे। यहां चौबीस घंटे लंगर चलता है। स्वर्ण मंदिर सरोवर के बीच में मानव निर्मित झील है, जहां श्रद्धालु स्नान करते हैं। यह झील मछलियों से भरी हुई है। मंदिर से 100 मी. की दूरी पर स्वर्ण जड़ि‍त, अकाल तख्त है। इसमें एक भूमिगत तल है और पांच अन्य तल हैं। इसमें एक संग्रहालय और सभागार है।

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स्वर्ण मंदिर अमृतसर
यहां पर सिख पंथ से जुड़ी हर समस्या का समाधान किया जाता है। गुरुद्वारे के बाहर दाईं ओर अकाल तख्त है। अकाल तख्त का निर्माण सन 1606 में किया गया था। यहाँ दरबार साहिब स्थित है। उस समय यहाँ कई अहम फैसले लिए जाते थे। संगमरमर से बनी यह इमारत देखने योग्य है। इसके पास शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समि‍ति‍ का कार्यालय है, जहां सिखों से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते हैं।

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स्वर्ण मंदिर अमृतसर
गुरु का लंगर 24 घंटे खुला रहता है। खाने-पीने की व्यवस्था गुरुद्वारे में आने वाले चढ़ावे और दूसरे कोषों से होती है। लंगर में खाने-पीने की व्यवस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समि‍ति‍ की ओर से नियुक्त सेवादार करते हैं। अनुमान है कि करीब 40 हजार लोग रोज यहाँ लंगर का प्रसाद ग्रहण करते हैं। श्री गुरु रामदास सराय में गुरुद्वारे में आने वाले लोगों के लिए ठहरने की व्यवस्था भी है।

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स्वर्ण मंदिर अमृतसर
इस सराय का निर्माण सन 1784 में किया गया था। यहां 228 कमरे और 18 बड़े हॉल हैं। यहां पर रात गुजारने के लिए गद्दे व चादरें मिल जाती हैं। एक व्यक्ति की तीन दिन तक ठहरने की पूर्ण व्यवस्था है। स्वर्ण मंदिर को कई बार नुकसान पहुंचाया गया था, लेकिन भक्ति और आस्था के इस केंद्र का फिर से निर्माण कराया गया।
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स्वर्ण मंदिर अमृतसर
ऐसा माना जाता है कि 19 वीं शताब्दी में अफगान हमलावरों ने इस मंदिर को पूरी तरह नष्ट कर दिया था। तब महाराजा रणजीत सिंह ने इसकी मुरम्मत कराई। साथ ही इसकी गुंबद को सोने की परत से सजवाया। मंदिर को कब-कब नष्ट किया गया और कब-कब बनाया गया, यह मंदिर में लगी शिलालेख में लिखा हुआ है।
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