हाथ में अंगूठा न होने की वजह से 200 लोगों का राशन लटक गया, अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही बतायें की अगर राशन नहीं मिला तो वे खायेंगे क्या?
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राशन डिपो
दरअसल, देश में बढ़ती ऑनलाइन प्रक्रिया जहां आम लोगों की जिंदगी को आसान बना रही है, वहीं कुष्ठ रोगियों के लिए बड़ी समस्या बनकर उभरी है। अंगूठा नहीं होने के कारण ऐसे लोगों को राशन नहीं मिल पा रहा है। इसका समाधान फिलहाल तो सरकार के पास भी नजर नहीं आ रहा है।
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खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले के विभाग ने जून महीने से राशन वितरण प्रणाली को ऑनलाइन शुरू कर सभी राशन कार्ड को आधारकार्ड से जोड़ दिया है। उपभोक्ताओं को अब अंगूठा लगाने के बाद ही राशन मिलेगा, लेकिन विभाग की यह योजना हरियाणा के करनाल जिले में हांसी रोड पर बसे कुष्ठ रोगियों के गांव इंद्रा चक्रवर्ती में मुसीबत बनी हुई है।
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वर्ष 1969 में कुष्ठ रोगियों के लिए यह इंद्रा चक्रवर्ती गांव बसाया गया था। गांव में इस समय 65 परिवारों के करीब 200 सदस्य रह रहे हैं। सभी परिवार के मुखिया कुष्ठ रोग से पीड़ित हैं और राशन कार्ड में उन्हीं के नाम हैं। ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत राशन लेने के लिए हाथ के अंगूठे का निशान देना होता है, लेकिन कुष्ठ रोग से पीड़ित होने के कारण यहां के लोगों के हाथ में अंगुलियां व अंगूठे हैं ही नहीं।
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ऐसे में वे राशन कार्ड धारक होते हुए भी राशन नहीं ले पा रहे हैं। समस्या के संबंध में ग्रामीण यशराज, कल्लू राय, अंटी महाराणा, कामेश्वर राव, तिलक धारी, तुलसी राव, अकबर मियां और डिपो होल्डर जोगिंद्र डीएफएससी के पास भी पहुंचे, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया। इसलिए विभाग ने उच्च अधिकारियों के साथ ऑनलाइन प्रक्रिया का सॉफ्टवेयर विकसित करने वाली कंपनी को अवगत कराया।
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दरअसल, गांव में सभी घरों के मुखिया कुष्ठ रोगी हैं। समस्या के समाधान के लिए विभाग ने जब राशन कार्ड में नॉमिनी बदलने को कहा तो पता चला कि परिवार के दूसरे सदस्य भी कुष्ठ रोगी हैं, इसलिए वे भी अंगूठा नहीं लगा सकते। हालांकि, गांव के कुछ परिवारों के सदस्य ऐसे हैं जो कुष्ठ रोग से पीड़ित नहीं हैं, लेकिन उनकी उम्र काफी कम है, इसलिए वे राशन कॉर्ड में नॉमिनी नहीं बन सकते। वहीं, विभाग इनको मैनुअली राशन नहीं दे सकता।
गांव की समस्या के बारे में पता चला है। अभी इसका समाधान नहीं है। इस संबंध में उच्च अधिकारियों को अवगत कराकर सहायता मांगी गई है। उम्मीद है जल्द समस्या का समाधान हो जाएगा।
- अनिल कुमार, डीएफएससी, करनाल