नोटबंदी को 30 दिन हो गए, लेकिन लोगों के हाथ में पैसा नहीं। आज, कल और परसों बैंक बंद रहेंगे। ऐसे में एटीएम के बाहर किस तरह के हाल हैं, खुद देख लिजिए।
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चंडीगढ़ में एटीएम के बाहर लगी लंबी लाइनें
शनिवार से सोमवार तक बैंक बंद हैं और करेंसी के मामले में लोग भगवान भरोसे हैं। रात को भी लाइनों में लगे रहे और आज सवेरे भी एटीएम के बाहर लंबी लाइनें दिखी। एक तरफ घना कोहरा, दूसरी तरफ पैसों की टेंशन। वीकेंड और छुट्टी का दिन, लेकिन आराम नहीं। जब बैंक खुले होते हैं तो 90 फीसदी एटीएम में कैश नहीं होता। जब बैंक बंद रहेंगे तब लोगों को कैसे कैश मिलेगा। क्योंकि जब एटीएम में पैसा नहीं तो लोग बैंक से पैसे निकाल लेते थे। जब तीन दिन बैंक भी बंद रहेंगे तब क्या हाल होगा।
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चंडीगढ़ में एटीएम के बाहर लगी लंबी लाइनें
शुक्रवार को शहर में दोपहर तक 90 फीसदी एटीएम कैशलेस थे। रात को भी लोग एक सेक्टर से दूसरे सेक्टर भटकते हुए दिखाई दिए। सेक्टर 9, 17 19 में रात तक कैश वाले एटीएम के बाहर लंबी लंबी लाइनों में लगे दिखे। सेक्टर 17 में एसबीआई के बाहर सैकड़ों लोग इस आस में खड़े थे कि बैंक खुलेगा तो एटीएम में कैश डलेगा और वो पैसे निकाल सकेंगे। लेकिन बैंक खुलने के बाद अंदर से बैंक के एजीएम बाहर आए और बताया कि दोपहर तक कैश एटीएम में नहीं डलेगा। इसके बाद सभी लोग एटीएम ढूंढने निकल पड़े।
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चंडीगढ़ में एटीएम के बाहर लगी लंबी लाइनें
पूरे बैंक स्क्वायर में सुबह के वक्त सर्फ दो एटीएम में ही नगदी थी। लेकिन सेक्टरों में तो हालत और भी खराब थी। वहां सुबह से लेकर दोपहर तक लगभग सभी एटीएम खाली थे। सेक्टर 44 की मंजीत कौर ने बताया कि कैश वाला एटीएम ढूंढते हुए सुबह से चार घंटे हो गए, लेकिन वह कहीं नहीं मिला। सेक्टर 17 में इलाहाबाद बैंक के एटीएम में दो घंटे लाइन में लगने के बाद 2 हजार रुपये निकले हैं। जब आगे तीन दिन बैंक बंद रहेगा, उस दौरान तो बुरा हाल होने वाला है।
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चंडीगढ़ में एटीएम के बाहर लगी लंबी लाइनें
सेक्टर 15 निवासी केडी शर्मा ने बताया कि तीन दिन पहले एक एटीएम से 2500 हजार रुपये निकाले थे। अब जेब में सिर्फ 200 रुपये बचे हैं। इतने पैसे में कैसे घर चलेगा। पूरा शहर लगभग बैंक स्क्वायर के सहारे ही चल रहा है। लेकिन आज तो एसबीआई की मेन ब्रांच के एटीएम भी बंद हैं। जहां पर अब तक हमेशा पैसे मिले हैं। वहीं एक प्राइवेट बैंक मैनेजर ने बताया कि बैंक खुला हो या बंद हो उससे क्या फर्क पड़ता है। जब बैंकों के पास कैश ही नहीं है तो वो एटीएम में डलेगा कैसे। इससे तो अच्छा है कि बैंक बंद ही रहें। कम से कम लोगों के गुस्से से तो बचेंगे।
वैसे सुना है कि आरबीआई के पास कैश आया तो है। लेकिन बैंकों के पास कब आएगा ये नहीं पता। बैंक अधिकारियों का कहना है कि एटीएम में कैश डालने का कांट्रैक्ट आगे एजेंसियों को दिया जाता है। शहर में जितने एटीएम है उनमें विभिन्न एजेंसियों द्वारा ही कैश डाला जाता है। लेकिन एजेंसियां क्या कर सकती हैं जब बैंकों से उनको कैश ही नहीं मिल रहा। नोटबंदी से पहले जहां एक एटीएम में औसतन 23 लाख रुपये रोज डाला जा रहा था। लेकिन नोटबंदी के बाद से कैश न मिलने के कारण सिर्फ 3 लाख रुपये तक ही डाला जा रहा है।