अगर लीज पर दी गई जगहों और कब्जे पर ली गई ट्रस्ट की जगहों का हिसाब लगाया जाए तो यह घोटाला 500 करोड़ के आसपास है। सिद्धू ने कहा कि कंपनी के अधिकारी दोनों शहरों के ट्रस्ट का ऑडिट कर रहे हैं, जो काफी हद तक पूरा हो गया। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट मुलाजिमों ने कंपनी अधिकारियों को करीब 50 फाइलें जमा नहीं कराई हैं। फाइलें निकलवाने के बाद करीब दो महीने के अंतर्गत ऑडिट का सारा रिकार्ड पेश किया जाएगा।
सरकारी बाबुओं ने कई बैंक में खाते खुलवाकर पैसों को इधर-उधर घुमाकर अपने रिश्तेदारों के खाते में जमा कराए हैं। इसका खुलासा भी ऑडिट में ही होगा। लीज पर दी गई प्रॉपर्टीज का भी कोई हिसाब नहीं है, कोई पांच रुपये पर तो कोई 50 रुपये पर लीज पर दी गई हैं। सिद्धू ने कहा कि दोनों शहरों के ट्रस्टों के अधिकारियों ने ढेरों जमीनों को बिना खसरा नंबर के आगे अलॉट किया हुआ है। जालंधर में ऐसी जगहों का करीब 75 करोड़ रुपये का घोटाला है।
ऐसे मामले में करीब 120 फाइलें उनके पास आई हैं। इन जगहों का मार्केट रेट लगाए तो 200 करोड़ और डीसी रेट के हिसाब से 100 रुपये का है। जालंधर के मॉडल टाउन में ट्रस्ट की पौने दो एकड़ जगह है, जिस पर कब्जा है। इस जगह का 25 लाख रुपये प्रति मरले का रेट है। यह राजनीतिक दबाव के कारण हुआ है। उन्होंने कहा जालंधर ट्रस्ट ने बैंक लोन लिया था और उसमें जितनी प्रॉपर्टी बनती नहीं थी, उससे ज्यादा की प्रॉपर्टी अटैच करा दी।
सभी ने एक साथ मिलकर बड़ा घोटाला किया है। सिद्धू ने कहा कि पंजाब में अभी 10 बड़े शहर और करीब 165 छोटी कमेटियां हैं। इन का ऑडिट करना अभी बाकी हैं। सिद्धू ने कहा कि ट्रस्ट और निगम में आज भी सिंगल एंट्री सिस्टम है, जबकि यूरोप हम से कहीं आगे निकल चुका है। सिंगल एंट्री सिस्टम में हेरफेर आसान होता है, इसलिए सरकारी अधिकारी इन सिस्टम को नहीं बदल रहे।