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ये हैं असली सिंह इज किंग, 786 नंबर के 14 लाख नोट

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सरदार नरेंद्र पाल सिंह। शौक 786 के नोट जमा करने का..और इतनी अधिक कलेक्शन कि बना डाला रिकार्ड। अब उनकी पहचान 786 नंबर से हो गई है। तस्वीरों में देखिए, पूरा मामला। रिपोर्टः अजय वर्मा/राजेश ढल्ल
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ये हैं असली सिंह इज किंग, 786 नंबर के 14 लाख नोट

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जुनून सिर पर सवार हो जाए तो आदमी कुछ ऐसा कर जाता है जिससे उसकी अलग पहचान बन जाती है।  चंडीगढ़ के नरेंद्र पाल सिंह ने भी कुछ ऐसी ही जिद की है । अब उनकी पहचान 786 नंबर से हो गई है। वे नाम से कम बल्कि 786 नंबर से अधिक जाने जाते हैं। नरेंद्र पाल सिंह को उन नोटों को इकट्ठा करने का शौक है जिनके नंबर की अंतिम सीरिज 786 नंबर होती है।
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ये हैं असली सिंह इज किंग, 786 नंबर के 14 लाख नोट

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1989 में लगे शौक से अब तक 14 लाख 35 हजार रुपये 786 नंबर के नोट से इकट्ठे कर चुके हैं। नोटों की संख्या 25 हजार 927 है। सिक्ख होने के बावजूद 786 नंबर से उनका प्यार भी लोगों को हैरान कर देता है। जबकि यह नंबर मुस्लिम समुदाय में काफी शुभ माना जाता है। इस जुनून से ही नरेंद्र पाल सिंह का नाम लिम्का बुक, इंडिया बुक, यूनिक बुक और ग्लोबल बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है। लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड में उनका नाम साल 2001 से लगातार दर्ज होता जा रहा है।

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देशभर में नरेंद्र पाल सिंह के अलावा कोई ऐसा निवासी नहीं है जिसके पास 786 नंबर के इतने अधिक संख्या और राशि के नोट हों। सिंह का कार का नंबर और मोबाइल नंबर की अंतिम सीरिज भी 786 है। सिंह पंजाब स्टेट कोआपरेटिव बैंक से रिटायर्ड प्रबंधक है।
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सिंह के पास 786 नंबर के इंडिया के नहीं बल्कि 13 देशों के नोट भी है। जिनमें पाकिस्तान के 9, अमेरिका के 10, नेपाल के 6, इंग्लैंड के 4, सिगांपुर के 3, थाईलैंड के 2, कनाडा के 1, यूरो-1, आस्ट्रेलिया के 3, हांगकांग के 1, दुबई के 1, भूटान के 2 और न्यूजीलैंड के 12 नोट हैं। सिंह का बेटा भी न्यूजीलैंड में रहता है। सिंह की पत्नी पीजीआई में नौकरी करती है।
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सिंह इस तरह के नोट इकट्ठे करने के लिए बैंकों, गुरुद्वारों, मंदिरों और कई दुकानदार के पास चक्कर लगाते हैं। कई दुकानदार तो अब खुद ही 786 का नोट संभाल कर रखते हैं और सिंह के आने पर उन्हें देते हैं। उनके पास कई लोग भी ऊंचे रेट पर नोट मांगने आते हैं लेकिन उन्होंने कभी नहीं दिए। सिंह के पास ऐसे नोट हैं, जिनमें दो बार 786-786 प्रिंट हुआ है।
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14 लाख 35 हजार की इतनी बड़ी राशि वह सेक्टर-32 स्थित एक बैंक के लाकर में रखते हैं। जबकि बैंक में राशि जमा कराने का ब्याज मिलता है। लेकिन यह ऐसा मामला है जिसके तहत यह राशि बैंक लॉकर में रखने से हर साल 7 से 8 हजार रुपये का शुल्क अदा करना पड़ता है। सिंह जब भी शॉपिंग करने के लिए जाते हैं तो वह बड़े से बड़ा नोट भी नॉर्मल खर्चे के लिए देते हैं। ताकि ज्यादा से ज्यादा नोटों की संख्या वापस आए और वह चेक कर सकें कि कोई नोट 786 का तो नहीं आया।

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नरेंद्र सिंह को सिक्के इकट्ठे करने का भी शौक है। उनके पास आजादी से पहले से लेकर अब तक के जारी हुए हर किस्म के सिक्के हैं। यहां तक की उनके पास एक हजार रुपये का भी सिक्का है। जबकि 150 रुपये के छह और 100 रुपये के 8 सिक्के उपलब्ध हैं।
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सिंह ने बताया कि एक बार किसी के पास 25 हजार रुपये के 786 नंबर के नोट थे। उसका किसी से विवाद हो गया। ऐसे में उसने बुलाया और यह नोट दे दिए। लेकिन इन नोटों के बदले उन्होंने जो 25 हजार रुपये की राशि दी, वह बैंक में जमा एफडी तुड़वा कर अदा की थी। साल 1953 में हज पर जाने वालों को हरे रंग का नोट विशेष तौर पर दिया जाता था। इस तरह से दो 100 रुपये के नोट भी सिंह के पास है। इस तरह का एक नोट पिछले साल बंगलूरू में हुए एक एग्जीबिशन में एक लाख 80 हजार रुपये का बिक चुका है।
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