सोनीपत के मुरथल में कथित गैंगरेप प्रकरण के चलते जिस सुखदेव ढाबे का नाम सबसे ज्यादा सुर्खियों में है, वह ढाबा खासियतों के चलते भी चर्चा में रहता है।
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मुरथल गैंगरेप: लैंडमार्क बना एक ढाबा, साख पर उठे सवाल
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दिल्ली-अमृतसर नेशनल हाइवे NH 1पर मौजूद सुखदेव ढाबा दिल्ली से महज कुछ घंटों की दूरी पर है। ढाबे का नाम अमरीक सुखदेव है। ये 12 तरह के पराठों के लिए विख्यात है, जिसकी खुशबू हाईवे से गुजरने वाले हर टूरिस्ट को अपनी ओर खींचती है।
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मुरथल गैंगरेप: लैंडमार्क बना एक ढाबा, साख पर उठे सवाल
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सुखदेव ढाबे की शुरुआत 1956 में हुई थी। जीटी रोड किनारे ट्रक ड्राइवरों की जरूरत को देखते हुए सरदार प्रकाश सिंह ने ढाबे की शुरुआत की थी। अक्सर देर रात या वीकेंड दिल्ली और एनसीआर के लोग ढाबे पर किफायती दाम में दाल-पराठे खाने और लस्सी पीने के लिए आते हैं।
मुरथल गैंगरेप: लैंडमार्क बना एक ढाबा, साख पर उठे सवाल
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हाल ही में हुए जाट आंदोलन के दौरान मुरथल में महिलाओं के साथ हुए कथित गैंगरेप की खबरों के बाद ये ढाबा सुर्खियों में आया। रिपोर्ट के मुताबिक, जाट आन्दोलन के दौरान ढाबे के नजदीक ही उपद्रवी बदमाशों की एक टोली, महिलाओं को कार से खींचकर खेतों में उठा ले गई थी।
मुरथल गैंगरेप: लैंडमार्क बना एक ढाबा, साख पर उठे सवाल
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रिपोर्ट के बाद मुरथल में घटनास्थल की 'लैंडमार्क' के तौर पर सबसे फेमस सुखदेव ढाबे का ही नाम आया। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक मुरथल की घटना में लैंडमार्क के तौर पर ढाबे का नाम बार-बार लिए जाने से इसके मालिक काफी परेशान हैं। उनका मानना है कि इससे ढाबे की छवि पर असर पड़ रहा है।